(Report and edited by- Mohammad Sayeed Pathan)
संतकबीरनगर। भारत-पाकिस्तान विभाजन की त्रासदी में जान गंवाने वाले लोगों और विस्थापन का दंश झेलने वाले परिवारों की स्मृति में शुक्रवार को भाजपा कार्यालय संतकबीरनगर में ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ के अवसर पर संगोष्ठी आयोजित की गई। कार्यक्रम में भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं ने विभाजन के ऐतिहासिक, सामाजिक और मानवीय प्रभावों पर विचार साझा किए तथा राष्ट्रीय एकता और अखंडता को मजबूत बनाए रखने का संकल्प लिया।
संगोष्ठी में मुख्य अतिथि के रूप में भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष एवं एमएलसी धर्मेंद्र सिंह शामिल हुए। कार्यक्रम में भाजपा जिलाध्यक्ष नीतू सिंह, जिला प्रभारी अजय सिंह गौतम, विधायक अंकुर राज तिवारी, विधायक गणेश चंद्र चौहान और पूर्व सांसद इन्द्रजीत मिश्र सहित पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता मौजूद रहे।
विभाजन की त्रासदी को राजनीतिक घटना से आगे देखने की जरूरत
वक्ताओं ने कहा कि वर्ष 1947 का विभाजन भारतीय इतिहास की सबसे बड़ी मानवीय त्रासदियों में से एक था। विभाजन के दौरान व्यापक स्तर पर हिंसा हुई, बड़ी संख्या में लोगों की जान गई और करोड़ों लोगों को अपने घर-बार छोड़कर विस्थापित होना पड़ा। परिवार बिछड़े और लोगों को सामाजिक, आर्थिक तथा मानसिक स्तर पर लंबे समय तक इसके दुष्परिणाम झेलने पड़े।
कार्यक्रम में विभाजन को केवल राजनीतिक सीमाओं के पुनर्निर्धारण के रूप में देखने के बजाय इसके मानवीय और सामाजिक प्रभावों को समझने पर जोर दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि उस दौर की पीड़ा को याद करने का उद्देश्य किसी समुदाय के प्रति नफरत पैदा करना नहीं, बल्कि इतिहास से सबक लेते हुए भविष्य में ऐसी परिस्थितियों की पुनरावृत्ति रोकने की चेतना विकसित करना होना चाहिए।
स्मरण के साथ राष्ट्रीय एकता का संदेश
भाजपा नेताओं ने कहा कि विभाजन की त्रासदी में अपना सब कुछ खोने वाले लोगों का स्मरण आने वाली पीढ़ियों को इतिहास की जटिलताओं और उसके परिणामों को समझने का अवसर देता है। साथ ही यह अवसर देश की एकता, अखंडता और संप्रभुता के प्रति प्रतिबद्धता को दोहराने का भी है।
वक्ताओं ने कहा कि भारत की विविधता उसकी ताकत है। भाषा, क्षेत्र, जाति और विभिन्न सामाजिक-सांस्कृतिक परंपराओं के बावजूद देश की एकता लोकतांत्रिक व्यवस्था और साझा राष्ट्रीय चेतना की महत्वपूर्ण आधारशिला है। ऐसे में विभाजन की त्रासदी से यह सीख लेने की जरूरत है कि सामाजिक सद्भाव और आपसी विश्वास को कमजोर करने वाली परिस्थितियों से लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक मूल्यों के माध्यम से निपटा जाए।
राजनीतिक विमर्श से अलग मानवीय स्मृति भी जरूरी
समीक्षात्मक दृष्टि से देखें तो ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ को लेकर सार्वजनिक विमर्श में इतिहास की व्याख्या और राजनीतिक दृष्टिकोण दोनों शामिल रहते हैं। विभाजन की जिम्मेदारी और उसके कारणों को लेकर इतिहासकारों एवं राजनीतिक धाराओं के बीच अलग-अलग मत रहे हैं। इसलिए ऐसे आयोजनों की सार्थकता इस बात में है कि ऐतिहासिक घटना को केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित रखने के बजाय आम लोगों की पीड़ा, विस्थापन, पुनर्वास और सामाजिक प्रभावों को भी पर्याप्त स्थान दिया जाए।
संगोष्ठी में विभाजन के दौरान पीड़ित परिवारों के प्रति श्रद्धांजलि व्यक्त करते हुए कहा गया कि उस त्रासदी को याद करना वर्तमान और आने वाली पीढ़ियों को शांति, सामाजिक सद्भाव तथा राष्ट्रीय एकता के महत्व का एहसास कराता है।
कार्यक्रम के अंत में विभाजन की विभीषिका में जान गंवाने वाले लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई और देश की एकता, अखंडता एवं संप्रभुता को सर्वोपरि रखने का संकल्प दोहराया गया। वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं की मौजूदगी में आयोजित कार्यक्रम ने भाजपा के स्तर पर विभाजन की स्मृति को राष्ट्रीय एकता के संदेश से जोड़ने का प्रयास किया।


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