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खलीलाबाद पुलिस की कार्रवाई, नाबालिग को भगाने के मामले में बाल अपचारी निरुद्ध

  • 14 अगस्त को दर्ज हुआ था मुकदमा; साक्ष्य संकलन के बाद मोती तिराहा के पास से पुलिस ने पकड़ा, न्यायालय भेजा

Report and edited by-Mohammad Sayeed Pathan 

संतकबीरनगर। महिलाओं एवं बालिकाओं की सुरक्षा को लेकर चलाए जा रहे मिशन शक्ति 5.0 अभियान के तहत कोतवाली खलीलाबाद पुलिस ने नाबालिग को बहला-फुसलाकर भगाने के मामले में कार्रवाई करते हुए एक बाल अपचारी को निरुद्ध किया है। पुलिस के अनुसार, संबंधित मामले में साक्ष्य संकलन की प्रक्रिया पूरी करने के बाद यह कार्रवाई की गई।

पुलिस अधीक्षक संदीप कुमार मीना के निर्देशन, अपर पुलिस अधीक्षक सुशील कुमार सिंह के मार्गदर्शन तथा क्षेत्राधिकारी खलीलाबाद प्रियम राजशेखर पाण्डेय के पर्यवेक्षण में पुलिस टीम ने 31 अगस्त 2026 को मुकदमा संख्या 755/2026, धारा 137(2)/87 बीएनएस से संबंधित बाल अपचारी को मोती तिराहा के पास से निरुद्ध किया। इसके बाद उसे नियमानुसार सक्षम न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करने के लिए भेजा गया।

14 अगस्त को दर्ज हुई थी शिकायत

पुलिस के मुताबिक, मामले में पीड़िता के परिजन की ओर से 14 अगस्त 2026 को कोतवाली खलीलाबाद में प्रार्थना-पत्र दिया गया था। शिकायत में नाबालिग पुत्री को बहला-फुसलाकर भगाकर ले जाने का आरोप लगाया गया, जिसके आधार पर संबंधित धाराओं में अभियोग दर्ज किया गया।

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस ने साक्ष्यों का संकलन करते हुए जांच आगे बढ़ाई और करीब 17 दिन बाद बाल अपचारी को पकड़ लिया।

महिला एवं बालिका सुरक्षा के मामलों में त्वरित कार्रवाई पर जोर

इस कार्रवाई को मिशन शक्ति अभियान के उस उद्देश्य से जोड़कर देखा जा सकता है, जिसमें महिलाओं और बालिकाओं की सुरक्षा, शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई तथा संवेदनशील मामलों में पुलिस की सक्रियता पर जोर दिया जाता है। ऐसे मामलों में केवल मुकदमा दर्ज करना ही पर्याप्त नहीं होता, बल्कि पीड़ित पक्ष की सुरक्षा, साक्ष्यों का संरक्षण और कानून के अनुरूप आगे की कार्रवाई भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है।

पुलिस की ओर से उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस मामले में साक्ष्य संकलन के बाद कार्रवाई की गई है। हालांकि, किसी भी आरोपी अथवा बाल अपचारी के संबंध में अंतिम दोष का निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होता है। नाबालिग से संबंधित मामलों में उसकी पहचान और निजी विवरण को सार्वजनिक न करना भी कानून एवं बाल संरक्षण की दृष्टि से आवश्यक है।

इन पुलिसकर्मियों ने की कार्रवाई

कार्रवाई करने वाली टीम में उपनिरीक्षक शम्भूराम, हेड कांस्टेबल सुशील कुमार और महिला कांस्टेबल सुषमा खरवार शामिल रहीं।

निष्कर्षतः, खलीलाबाद पुलिस की यह कार्रवाई महिला एवं बालिका संबंधी मामलों में त्वरित जांच और कार्रवाई की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। अब मामले की आगे की वैधानिक प्रक्रिया न्यायालय के समक्ष होगी, जहां उपलब्ध साक्ष्यों और तथ्यों के आधार पर प्रकरण का निस्तारण किया जाएगा।

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