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बहुदिव्यांग बच्चों के लिए थेरेपी बनी उम्मीद की नई राह, सीआरसी गोरखपुर के ऑनलाइन CRE कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने साझा किए उपचार के महत्वपूर्ण पहलू

(Report and edited by-Mohammad Sayeed Pathan)

गोरखपुर। बहुदिव्यांग बच्चों के समग्र विकास, उपचार और उन्हें अधिक से अधिक आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में सीआरसी गोरखपुर द्वारा “बहुदिव्यांग बच्चों की चिकित्सा थेरेपी” विषय पर एकदिवसीय ऑनलाइन सीआरई (Continuing Rehabilitation Education) कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने बहुदिव्यांग बच्चों की शारीरिक, भाषा-वाणी एवं मनोवैज्ञानिक चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा करते हुए थेरेपी की भूमिका को रेखांकित किया।

कार्यक्रम में बतौर रिसोर्स पर्सन श्री राजेश कुमार, डॉ. विजय गुप्ता, सुश्री विद्या भारती एवं श्री आशुतोष सिंह ने विषय के विभिन्न पहलुओं पर प्रतिभागियों को महत्वपूर्ण जानकारी दी। विशेषज्ञों ने बताया कि बहुदिव्यांगता से प्रभावित बच्चों की आवश्यकताएं सामान्य बच्चों की तुलना में अधिक जटिल हो सकती हैं। ऐसे बच्चों को केवल एक प्रकार के उपचार के बजाय उनकी व्यक्तिगत जरूरतों के अनुरूप समन्वित एवं निरंतर थेरेपी की आवश्यकता होती है।

भाषा-वाणी से लेकर मनोवैज्ञानिक विकास तक चुनौती

विशेषज्ञों ने कहा कि बहुदिव्यांग बच्चे अक्सर भाषा एवं वाणी, शारीरिक गतिविधियों तथा मनोवैज्ञानिक स्तर पर विभिन्न प्रकार की समस्याओं का सामना करते हैं। इन चुनौतियों का समय रहते आकलन कर उचित चिकित्सकीय एवं पुनर्वास सेवाएं उपलब्ध कराई जाएं तो बच्चों के विकास में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि थेरेपी का उद्देश्य केवल किसी शारीरिक अथवा भाषायी समस्या को कम करना नहीं है, बल्कि बच्चे की दैनिक जीवन की क्षमताओं, संचार कौशल, सामाजिक सहभागिता और आत्मविश्वास को विकसित करना भी है। नियमित एवं सही दिशा में दी जाने वाली थेरेपी बच्चों को अपनी क्षमताओं का बेहतर उपयोग करने में मदद करती है।

समय पर हस्तक्षेप से बेहतर परिणाम की उम्मीद

कार्यक्रम के दौरान इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि बहुदिव्यांग बच्चों की पहचान और उनके लिए आवश्यक हस्तक्षेप में देरी नहीं होनी चाहिए। बच्चे की आवश्यकता के अनुसार थेरेपी की योजना तैयार कर उसे निरंतरता के साथ लागू करना महत्वपूर्ण है। विशेषज्ञों के अनुसार, परिवार की सक्रिय भागीदारी और प्रशिक्षित पुनर्वास विशेषज्ञों के मार्गदर्शन से थेरेपी के परिणाम अधिक प्रभावी हो सकते हैं।

समीक्षात्मक दृष्टि से देखें तो, बहुदिव्यांग बच्चों के पुनर्वास की चुनौती केवल चिकित्सा तक सीमित नहीं है। उनके बेहतर भविष्य के लिए परिवार, चिकित्सक, थेरेपिस्ट, शिक्षक और समाज—सभी की सामूहिक भूमिका जरूरी है। ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से पुनर्वास क्षेत्र से जुड़े लोगों को नवीन जानकारी उपलब्ध कराना निश्चित रूप से बच्चों को बेहतर सेवाएं देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

देशभर से 104 प्रतिभागियों ने लिया हिस्सा

ऑनलाइन आयोजित इस कार्यक्रम में देश के अलग-अलग हिस्सों से 104 प्रतिभागियों ने सहभागिता की। ऑनलाइन माध्यम ने कार्यक्रम की पहुंच को व्यापक बनाया, जिससे विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत पुनर्वास एवं संबंधित क्षेत्र के लोगों को विशेषज्ञों से जुड़ने और विषय की जानकारी प्राप्त करने का अवसर मिला।

कार्यक्रम की सफलता पर सीआरसी गोरखपुर के निदेशक श्री जितेंद्र यादव ने अपनी शुभकामनाएं प्रेषित कीं। उन्होंने कार्यक्रम के आयोजन एवं सहभागिता के लिए संबंधित सभी लोगों का उत्साहवर्धन किया।

कार्यक्रम का समन्वय श्री अमित विश्वकर्मा ने किया। आयोजन का प्रमुख उद्देश्य बहुदिव्यांग बच्चों की चिकित्सा एवं पुनर्वास संबंधी आवश्यकताओं को समझना तथा इस क्षेत्र में कार्यरत प्रतिभागियों के ज्ञान एवं कौशल को और अधिक सुदृढ़ करना रहा।

निष्कर्षतः, बहुदिव्यांग बच्चों के लिए समय पर सही थेरेपी, निरंतर देखभाल और परिवार का सहयोग उनके जीवन में बड़ा परिवर्तन ला सकता है। सीआरसी गोरखपुर का यह ऑनलाइन प्रशिक्षण कार्यक्रम इसी दिशा में ज्ञान, जागरूकता और पुनर्वास सेवाओं को मजबूत करने वाला सार्थक प्रयास माना जा सकता है।

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