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संत कबीर नगर: मोबाइल गुम होते ही खाते से उड़ गए 1 लाख रुपये, साइबर सेल ने पूरी रकम कराई वापस

मेहदावल पुलिस 
(Report Mohammad Sayeed Pathan Editor Mission Sandesh Hindi News Paper)

संतकबीरनगर। मोबाइल फोन खोने के बाद बैंक खाते से एक लाख रुपये की साइबर ठगी का शिकार हुए मेंहदावल क्षेत्र के एक व्यक्ति को साइबर सेल थाना मेंहदावल की सक्रियता से बड़ी राहत मिली। पुलिस टीम ने बैंक अधिकारियों से समन्वय और तकनीकी विश्लेषण के जरिए ठगी की रकम को समय रहते होल्ड कराया और आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद पीड़ित के खाते में पूरी 1,00,000 रुपये की धनराशि वापस करा दी। मेहनत की कमाई वापस मिलने के बाद पीड़ित और उसके परिजनों ने पुलिस टीम की सराहना करते हुए आभार जताया।

मोबाइल गुम होने के बाद खाते से निकली रकम

पुलिस के अनुसार, ग्राम डेडूआ, थाना मेंहदावल निवासी रामदास पुत्र तेजई का मोबाइल फोन गुम हो गया था। इसके बाद उनके बैंक खाते से करीब एक लाख रुपये की धोखाधड़ी कर ली गई। लेनदेन की जानकारी होने पर पीड़ित को जब घटना की वास्तविकता का पता चला तो उन्होंने तत्काल साइबर अपराध की शिकायत दर्ज कराने की कार्रवाई की।

पीड़ित ने 20 अप्रैल 2026 को साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 के माध्यम से शिकायत दर्ज कराई। शिकायत संख्या 33104260086772 दर्ज होने के बाद मामले को गंभीरता से लेते हुए साइबर सेल थाना मेंहदावल की टीम सक्रिय हुई।

बैंक से तत्काल संपर्क, रकम कराई गई होल्ड

मामले में आरक्षी संदीप कुमार गौतम और आरक्षी सौरभ कुमार ने संबंधित बैंक से संपर्क कर लेनदेन से जुड़ी जानकारी जुटाई। तकनीकी विश्लेषण और आवश्यक समन्वय के माध्यम से ठगी गई धनराशि को होल्ड कराया गया।

इसके बाद निर्धारित विधिक प्रक्रिया पूरी करते हुए 1,00,000 रुपये की पूरी रकम पीड़ित के बैंक खाते में वापस करा दी गई। साइबर ठगी के मामलों में रकम की वापसी काफी हद तक इस बात पर निर्भर करती है कि पीड़ित घटना की जानकारी कितनी जल्दी संबंधित तंत्र को देता है। इस मामले में समय पर शिकायत किए जाने से पुलिस को रकम को सुरक्षित कराने में मदद मिली।

साइबर अपराध के खिलाफ ‘क्रैक साइबर क्राइम’ के तहत कार्रवाई

पुलिस अधीक्षक संतकबीरनगर संदीप कुमार मीना के निर्देशन में जिले में साइबर अपराधों की रोकथाम और पीड़ितों को त्वरित राहत दिलाने के लिए ‘क्रैक साइबर क्राइम’ अभियान के तहत कार्रवाई की जा रही है। इस प्रकरण में भी साइबर सेल की त्वरित कार्रवाई को इसी अभियान की प्रभावी कड़ी के रूप में देखा जा रहा है।

यह मामला इस बात की ओर भी संकेत करता है कि साइबर ठगी के बाद घबराने के बजाय पीड़ित को तत्काल बैंक और 1930 साइबर हेल्पलाइन से संपर्क करना चाहिए। शुरुआती समय में शिकायत मिलने पर संदिग्ध लेनदेन को रोकने अथवा धनराशि को होल्ड कराने की संभावना बढ़ जाती है।

साइबर सेल की टीम ने निभाई अहम भूमिका

इस कार्रवाई में साइबर सेल थाना मेंहदावल की टीम के प्रभारी निरीक्षक राकेश कुमार सिंह, वरिष्ठ उपनिरीक्षक राकेश कुमार, उपनिरीक्षक संजय कुमार वर्मा, आरक्षी संदीप कुमार गौतम, आरक्षी सौरभ कुमार और आरक्षी अमित कुमार की भूमिका रही।

पूरी धनराशि वापस मिलने के बाद पीड़ित रामदास और उनके परिजनों ने थाना मेंहदावल पुलिस तथा साइबर सेल टीम की भूरी-भूरी प्रशंसा की।

साइबर ठगी से बचने के लिए पुलिस की अपील

  • जनपद पुलिस ने आम नागरिकों से साइबर अपराधों को लेकर सतर्क रहने की अपील की है। पुलिस के अनुसार—
  • किसी अज्ञात व्यक्ति के भेजे लिंक, कॉल या संदेश पर बैंक संबंधी जानकारी साझा न करें।
  • किसी को भी अपना ओटीपी, पासवर्ड, एटीएम/डेबिट कार्ड संबंधी गोपनीय जानकारी या यूपीआई पिन न बताएं।
  • फोन पर रिश्तेदार या मित्र बनकर पैसे मांगने वाले व्यक्ति की पहचान की पुष्टि किए बिना भुगतान न करें।
  • साइबर अपराधी कई बार आवाज बदलकर, डर पैदा कर या भावनात्मक दबाव बनाकर लोगों को अपने जाल में फंसाते हैं।
  • खाते से कोई संदिग्ध लेनदेन होने पर बिना देरी किए 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं और आवश्यकतानुसार cybercrime.gov.in के माध्यम से भी शिकायत करें।

समीक्षा : जागरूकता और ‘गोल्डन ऑवर’ की अहमियत

इस प्रकरण की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि साइबर ठगी के बाद तत्काल शिकायत करना पीड़ित के लिए सबसे बड़ा हथियार साबित हो सकता है। साइबर अपराध में रकम कई खातों या डिजिटल माध्यमों से तेजी से स्थानांतरित की जा सकती है। ऐसे में देरी होने पर धनराशि की रिकवरी कठिन हो सकती है।

एक लाख रुपये की पूरी रकम वापस कराया जाना पीड़ित के लिए बड़ी राहत है, लेकिन यह घटना आम लोगों के लिए चेतावनी भी है कि मोबाइल फोन खोने की स्थिति में बैंकिंग और यूपीआई सेवाओं की सुरक्षा को तत्काल सुनिश्चित करना जरूरी है। मोबाइल में बैंकिंग एप, यूपीआई या अन्य संवेदनशील जानकारी सक्रिय होने की स्थिति में फोन गुम होते ही संबंधित बैंक/सेवा प्रदाता से संपर्क करना और आवश्यक सुरक्षा कदम उठाना चाहिए।

साइबर अपराध से बचाव में पुलिस की कार्रवाई के साथ नागरिक की सतर्कता और शिकायत में तेजी—दोनों समान रूप से महत्वपूर्ण हैं।

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