(Report and edited by-Mohammad Sayeed Pathan)
संतकबीरनगर । वर्ष 2018 से चल रहे नाबालिग को बहला-फुसलाकर भगाने और दुष्कर्म के मामले में, पॉक्सो एक्ट की विशेष अदालत ने अभियुक्त सचिन कुमार उर्फ किशुन को दोषसिद्ध करते हुए 10 वर्ष के सश्रम कारावास और कुल 8 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है।
पुलिस के अनुसार, थाना महुली में दर्ज मुकदमे की विवेचना के बाद आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया गया था। “ऑपरेशन कनविक्शन” के तहत प्रभावी पैरवी को पुलिस ने दोषसिद्धि की महत्वपूर्ण वजह बताया है।
लेकिन इस फैसले का दूसरा पहलू भी अहम है—मुकदमा वर्ष 2018 में दर्ज हुआ और फैसला 2026 में आया। गंभीर अपराधों में दोषसिद्धि निश्चित रूप से महत्वपूर्ण है, लेकिन पीड़ित परिवार के लिए समय पर न्याय भी उतना ही जरूरी है।
न्यायालय ने धारा 363, 366, 376 भादवि तथा पॉक्सो एक्ट की धारा 3/4 के तहत अभियुक्त को दोषसिद्ध किया।
मिशन संदेश सवाल करता है:
क्या “ऑपरेशन कनविक्शन” जैसे अभियानों के साथ गंभीर मामलों की सुनवाई को और अधिक समयबद्ध बनाने पर भी समान जोर दिया जा रहा है? क्योंकि न्याय की प्रभावशीलता केवल सजा तक नहीं, बल्कि समय पर न्याय मिलने से भी तय होती है।
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