(Report and edited by-Mohammad Sayeed Pathan)
संतकबीरनगर/बस्ती। किशोरों से जुड़े मामलों में केवल कानूनी कार्रवाई ही नहीं, बल्कि उनके पठन-पाठन, स्वास्थ्य, सुरक्षा और पुनर्वास की व्यवस्था भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। इसी कड़ी में जिलाधिकारी आलोक कुमार और पुलिस अधीक्षक संदीप कुमार मीना ने शुक्रवार को राजकीय संप्रेक्षण गृह (किशोर), बस्ती का संयुक्त निरीक्षण किया। यहां संतकबीरनगर के 40 किशोर संवासित बताए गए हैं।
निरीक्षण के दौरान डीएम और एसपी ने किशोरों से सीधे बातचीत कर उनका हालचाल जाना और उन्हें उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं के बारे में जानकारी ली। प्रशासन के अनुसार, बच्चों ने निरीक्षण के दौरान किसी प्रकार की समस्या नहीं बताई।
किराए के भवन में संचालित हो रहा संप्रेक्षण गृह
निरीक्षण में एक महत्वपूर्ण तथ्य यह सामने आया कि राजकीय संप्रेक्षण गृह फिलहाल किराए के भवन में संचालित हो रहा है। संस्था के अधीक्षक अविनाश पटेल ने अधिकारियों को बताया कि राजकीय मेडिकल कॉलेज बस्ती के पास नए भवन का निर्माण कराया जा रहा है, जिसकी क्षमता 100 बच्चों की होगी।
नए भवन के तैयार होने के बाद वर्तमान व्यवस्था की तुलना में किशोरों के लिए बेहतर और अधिक व्यवस्थित वातावरण उपलब्ध होने की उम्मीद है। हालांकि, निर्माणाधीन भवन की गुणवत्ता, समयसीमा और उसमें शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल विकास तथा पुनर्वास से जुड़ी सुविधाओं की वास्तविक स्थिति भी भविष्य में महत्वपूर्ण कसौटी होगी।
शिक्षा और स्वच्छता पर विशेष जोर
जिलाधिकारी ने अधिकारियों को किशोरों के पठन-पाठन और साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। यह निर्देश इसलिए भी अहम है क्योंकि संप्रेक्षण गृह में रहने वाले किशोरों को केवल निगरानी में रखना पर्याप्त नहीं माना जा सकता। उनके भविष्य को सामान्य जीवन की ओर ले जाने के लिए शिक्षा, व्यवहारिक प्रशिक्षण, मानसिक-सामाजिक सहयोग और कौशल विकास जैसी व्यवस्थाओं की निरंतरता जरूरी है।
ऐसे संस्थानों में प्रशासनिक निरीक्षण की उपयोगिता तभी अधिक प्रभावी मानी जाएगी, जब निरीक्षण के दौरान सामने आने वाली कमियों का समयबद्ध समाधान हो और बच्चों के पुनर्वास की प्रगति की भी नियमित समीक्षा की जाए।
40 किशोरों की मौजूदगी ने बढ़ाई जिम्मेदारी
संतकबीरनगर के 40 किशोरों का बस्ती स्थित संप्रेक्षण गृह में संवासित होना इस व्यवस्था की जिम्मेदारी को और महत्वपूर्ण बनाता है। किशोर न्याय व्यवस्था का उद्देश्य केवल संरक्षण या अनुशासन तक सीमित नहीं, बल्कि बच्चों को बेहतर भविष्य की दिशा में वापस ले जाना भी है।
ऐसे में अधिकारियों का बच्चों से सीधे संवाद करना सकारात्मक पहल है, लेकिन इसकी वास्तविक सफलता का आकलन इस आधार पर किया जाना चाहिए कि क्या बच्चों को नियमित शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाएं, परामर्श, कौशल प्रशिक्षण और सुरक्षित वातावरण लगातार मिल रहा है।
निरीक्षण के दौरान तहसीलदार सदर खलीलाबाद अनुराग यादव, जिला प्रोबेशन अधिकारी सतीश चंद्र, संस्था के फार्मासिस्ट, विधि सह परिवीक्षा अधिकारी तथा अन्य कर्मचारी मौजूद रहे।
मिशन संदेश का सवाल:
संप्रेक्षण गृह का निरीक्षण महज औपचारिक जांच न रहकर बच्चों के भविष्य की नियमित समीक्षा का माध्यम बने—क्या निर्माणाधीन 100 क्षमता वाले नए भवन में आधुनिक शिक्षा, कौशल प्रशिक्षण, स्वास्थ्य और पुनर्वास की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी? आने वाले समय में इसकी निगरानी भी उतनी ही जरूरी होगी जितना आज का निरीक्षण।

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