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कबीर की धरती पर पर्यटन का नया सवेरा, 28.64 करोड़ की परियोजनाओं से निखरेगा संत कबीर नगर


  • मगहर की आध्यात्मिक विरासत से बखिरा की प्राकृतिक खूबसूरती तक पर्यटन विकास की नई इबारत लिख रहा जिला

(Content editor Mohammad Sayeed Pathan)

लखनऊ/संत कबीर नगर, 4 सितंबर 2026। पूर्वांचल की आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासत को अपने भीतर समेटे संत कबीर नगर अब पर्यटन विकास की नई संभावनाओं की ओर तेजी से बढ़ रहा है। महान संत कबीरदास की निर्वाण स्थली मगहर से लेकर प्राकृतिक संपदा के लिए प्रसिद्ध बखिरा पक्षी अभयारण्य, समय माता मंदिर और तमेश्वरनाथ मंदिर तक जिले के प्रमुख धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों को आधुनिक सुविधाओं से जोड़ने की दिशा में सरकार की ओर से योजनाएं आगे बढ़ाई जा रही हैं।

सूफी-कबीर सर्किट के महत्वपूर्ण पड़ाव के रूप में पहचान बना रहे संत कबीर नगर में पर्यटन विकास को केवल धार्मिक स्थलों तक सीमित रखने के बजाय आध्यात्मिक, सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और प्रकृति पर्यटन के समन्वित मॉडल के रूप में विकसित करने की संभावनाएं दिखाई दे रही हैं। पर्यटन सुविधाओं के विस्तार से जहां श्रद्धालुओं और पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं मिलने की उम्मीद है, वहीं स्थानीय स्तर पर रोजगार, कारोबार और अर्थव्यवस्था को भी गति मिलने की संभावना है।

करीब तीन दशक पहले अस्तित्व में आया था जिला

संत कबीर नगर का गठन 5 सितंबर 1997 को हुआ था। प्रशासनिक पुनर्गठन के दौरान पूर्ववर्ती बस्ती जिले की खलीलाबाद तहसील, बस्ती तहसील के 131 गांव तथा सिद्धार्थनगर जिले की बांसी तहसील के सांथा विकासखंड के 161 गांवों को मिलाकर नए जिले का गठन किया गया।

लगभग तीन दशक के सफर में संत कबीर नगर ने प्रशासनिक पहचान के साथ अपनी सांस्कृतिक और पर्यटन पहचान को भी मजबूत किया है। गोरखपुर, बस्ती और आसपास के जिलों से सड़क मार्ग के जरिए जुड़ाव तथा रेल-सड़क संपर्क पर्यटन की संभावनाओं को और बढ़ाता है।

कबीर ने मगहर को दी नई पहचान

संत कबीर नगर की सबसे बड़ी पहचान मगहर से जुड़ी है। संत कबीरदास ने अपने जीवन के अंतिम समय में मगहर को अपनी कर्मभूमि बनाया और यहीं उनका निर्वाण हुआ। काशी में मोक्ष और मगहर में मृत्यु को लेकर प्रचलित मान्यताओं को चुनौती देते हुए कबीर ने अपने जीवन और विचारों से यह संदेश दिया कि मनुष्य की मुक्ति किसी स्थान विशेष की मोहताज नहीं है।

कबीर के निर्वाण के बाद उनकी स्मृति से जुड़े परिसर में हिंदू और मुस्लिम दोनों परंपराओं की झलक दिखाई देती है। यहां समाधि और मजार का निकट होना कबीर की उस विचारधारा को भी अभिव्यक्त करता है, जो धार्मिक विभाजनों से ऊपर उठकर मानवता और सामाजिक समरसता का संदेश देती है।

यही कारण है कि मगहर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि कबीर के दर्शन, सामाजिक चेतना और सांप्रदायिक सद्भाव की जीवंत विरासत के रूप में भी महत्वपूर्ण है।

बखिरा से मंदिरों तक पर्यटन की विविध तस्वीर

जिले में पर्यटन की संभावनाएं केवल मगहर तक सीमित नहीं हैं। बखिरा पक्षी अभयारण्य प्रकृति और पक्षी प्रेमियों के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र है। विभिन्न प्रजातियों के पक्षियों की मौजूदगी और प्राकृतिक परिवेश इसे इको-टूरिज्म के लिहाज से महत्वपूर्ण बनाते हैं।

इसी तरह समय माता मंदिर, तमेश्वरनाथ मंदिर, हनुमानगढ़ी एवं राम-जानकी मंदिर, ठाकुर जी मंदिर, बाबा बैजूनाथ धाम और सिद्धपीठ रामकोठ मंदिर जैसे धार्मिक स्थल जिले की आस्था और सांस्कृतिक विरासत को समृद्ध करते हैं। काजी खैली-उर-रहमान का किला जैसे ऐतिहासिक स्थल भी जिले के विरासत पर्यटन की संभावनाओं को विस्तार देते हैं।

28.64 करोड़ रुपये की पर्यटन परियोजनाओं को मंजूरी

पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह के अनुसार, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में संत कबीर नगर की विरासत को पर्यटन मानचित्र पर प्रमुख पहचान दिलाने के प्रयास किए जा रहे हैं। वित्तीय वर्ष 2025-26 में राज्य योजना के तहत जिले के लिए कुल 2864.22 लाख रुपये, यानी करीब 28.64 करोड़ रुपये की पर्यटन विकास परियोजनाएं स्वीकृत की गई हैं।

इनमें सबसे बड़ा प्रस्ताव तमेश्वरनाथ मंदिर के पर्यटन विकास के लिए है, जिसके लिए 2441.49 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इसके अलावा हनुमानगढ़ी एवं राम-जानकी मंदिर के लिए 86.80 लाख, ठाकुर जी मंदिर के लिए 143.46 लाख, बाबा बैजूनाथ धाम के लिए 91.55 लाख तथा सिद्धपीठ रामकोठ मंदिर के लिए 100.92 लाख रुपये की परियोजनाएं स्वीकृत की गई हैं।

इन परियोजनाओं का उद्देश्य प्रमुख धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए आवश्यक मूलभूत सुविधाओं का विकास करना है।

बढ़ते पर्यटकों से स्थानीय अर्थव्यवस्था को उम्मीद

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, जिले में पर्यटकों की संख्या में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वर्ष 2024 में 13.68 लाख पर्यटक संत कबीर नगर पहुंचे, जबकि 2025 में यह संख्या बढ़कर 14.21 लाख हो गई।

करीब 53 हजार पर्यटकों की यह अतिरिक्त आमद जिले में पर्यटन गतिविधियों के विस्तार का संकेत देती है। यदि पर्यटन स्थलों पर सुविधाओं का विकास, प्रचार-प्रसार और कनेक्टिविटी को समानांतर रूप से मजबूत किया जाता है, तो होटल, परिवहन, खान-पान, स्थानीय बाजार, हस्तशिल्प और अन्य छोटे कारोबारों को इसका सीधा लाभ मिल सकता है।

चुनौती सिर्फ विकास योजनाओं की नहीं, क्रियान्वयन की भी

संत कबीर नगर के पास पर्यटन की दृष्टि से मजबूत आधार मौजूद है, लेकिन इसे स्थायी पर्यटन केंद्र में बदलने के लिए केवल बजट स्वीकृति पर्याप्त नहीं होगी। पर्यटन स्थलों पर स्वच्छता, पार्किंग, पेयजल, शौचालय, सुरक्षा, प्रकाश व्यवस्था, सूचना केंद्र, स्थानीय गाइड और बेहतर प्रचार-प्रसार जैसी सुविधाओं का प्रभावी संचालन भी जरूरी होगा।

खास तौर पर मगहर और बखिरा जैसे प्रमुख स्थलों को आसपास के अन्य धार्मिक एवं ऐतिहासिक स्थलों से जोड़कर एकीकृत पर्यटन सर्किट विकसित किया जाए तो पर्यटकों के ठहराव की अवधि बढ़ सकती है। इससे जिले को केवल गुजरने वाले पर्यटकों के बजाय ठहरकर घूमने वाले पर्यटकों का केंद्र बनाने में मदद मिल सकती है।

कुल मिलाकर, कबीर की विचारधारा, मगहर की आध्यात्मिक विरासत, बखिरा की प्राकृतिक संपदा और जिले के धार्मिक-ऐतिहासिक स्थलों को आधुनिक पर्यटन सुविधाओं से जोड़ने की पहल संत कबीर नगर के लिए विकास का नया रास्ता खोल सकती है। अब असली परीक्षा इन योजनाओं के समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण क्रियान्वयन की होगी।

(Source DIO SKN)

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