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सीआरसी गोरखपुर में सामाजिक अधिकारिता शिविर: 40 से अधिक दिव्यांगजनों को मिले सहायक उपकरण

(Report and edited by-Mohammad Sayeed Pathan)

गोरखपुर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 76वें जन्मदिवस के अवसर पर देश के 76 स्थानों पर आयोजित सामाजिक अधिकारिता शिविरों की श्रृंखला के तहत सीआरसी गोरखपुर में भी दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण के लिए शिविर आयोजित किया गया। कार्यक्रम में 40 से अधिक दिव्यांगजनों को मोटराइज्ड ट्राई साइकिल, ट्राई साइकिल, बैसाखी, ब्रेल किट, स्मार्टफोन, स्मार्ट केन और श्रवण यंत्र समेत विभिन्न सहायक उपकरण वितरित किए गए।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पिपराइच विधायक महेंद्र पाल सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री की सोच है कि सरकारी सुविधाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। उनके मुताबिक, दिव्यांगजनों को दिए जा रहे सहायक उपकरण उन्हें आत्मनिर्भर बनाने और समाज की मुख्यधारा से जोड़ने में मदद करेंगे।

वहीं, सीआरसी गोरखपुर के निदेशक जितेंद्र यादव ने बताया कि देश के विभिन्न स्थानों पर इस तरह के शिविर आयोजित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सीआरसी परिसर में प्रधानमंत्री दिव्याशा केंद्र भी संचालित है, जहां दिव्यांगजन सहायक उपकरण निःशुल्क प्राप्त कर सकते हैं।

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सिर्फ उपकरण वितरण नहीं, उसके बाद की व्यवस्था भी अहम

दिव्यांगजनों को सहायक उपकरण उपलब्ध कराना निश्चित तौर पर उपयोगी पहल है, लेकिन ऐसे कार्यक्रमों की वास्तविक सफलता का आकलन केवल वितरित उपकरणों की संख्या से नहीं किया जा सकता। अहम सवाल यह है कि उपकरण प्राप्त करने के बाद दिव्यांगजनों को उनके इस्तेमाल का प्रशिक्षण, मरम्मत, रखरखाव और आवश्यकता पड़ने पर समय पर प्रतिस्थापन जैसी सुविधाएं कितनी आसानी से उपलब्ध होती हैं।

मसलन, मोटराइज्ड ट्राई साइकिल या स्मार्ट डिवाइस जैसे उपकरणों के लिए तकनीकी सहायता और रखरखाव की जरूरत पड़ सकती है। वहीं ब्रेल किट, स्मार्ट केन और श्रवण यंत्र जैसे उपकरणों का वास्तविक लाभ तभी संभव है जब लाभार्थी को उनका उपयोग करने की पर्याप्त जानकारी और आवश्यक सहयोग भी मिले।

इस लिहाज से प्रधानमंत्री दिव्याशा केंद्र जैसी व्यवस्था को केवल वितरण केंद्र के बजाय दिव्यांगजनों के लिए निरंतर सहायता केंद्र के रूप में प्रभावी बनाना महत्वपूर्ण होगा।

पात्रता और पहुंच को लेकर भी पारदर्शिता जरूरी

दिव्यांगजन कल्याण योजनाओं में एक अन्य महत्वपूर्ण पक्ष पात्र लाभार्थियों तक सूचना और सुविधा की पहुंच है। ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले कई दिव्यांगजन योजनाओं, पात्रता, आवेदन प्रक्रिया और उपलब्ध उपकरणों की जानकारी से पूरी तरह परिचित नहीं हो पाते। ऐसे में शिविरों के साथ-साथ पंचायत और ब्लॉक स्तर पर जागरूकता तथा आवेदन सहायता की व्यवस्था भी प्रभावी भूमिका निभा सकती है।

कार्यक्रम में बीआरडी मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. धर्मेंद्र कुमार, दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के उपनिदेशक अनूप सिंह, जिला दिव्यांगजन अधिकारी तनुज त्रिपाठी, डॉ. वाई. सिंह समेत अन्य अधिकारी एवं गणमान्य मौजूद रहे।

कार्यक्रम का संचालन राजेश कुमार ने किया, जबकि अंत में नागेंद्र पांडे ने उपस्थित लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया।

समीक्षा: सहायक उपकरण किसी दिव्यांग व्यक्ति के लिए केवल सरकारी सहायता नहीं, बल्कि शिक्षा, रोजगार, आवागमन और आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण साधन हो सकते हैं। इसलिए ऐसे शिविरों की अगली कसौटी यह होनी चाहिए कि उपकरण वितरण के बाद लाभार्थियों के जीवन में वास्तविक बदलाव कितना आया और जरूरतमंद लोगों तक यह सुविधा कितनी व्यापकता से पहुंच सकी।

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