रिपोर्ट - रामबाबू जायसवाल, संपादित सईद पठान
चौरीचौरा। गोरखपुर-देवरिया मुख्य मार्ग पर देवीपुर गांव के पास स्थित आरपी फार्मेसी डायबिटिक एंड हार्ट केयर अस्पताल में शुक्रवार को इलाज के दौरान एक महिला की मौत हो गई। महिला की मौत के बाद परिजनों ने चिकित्सकीय लापरवाही का आरोप लगाते हुए अस्पताल में हंगामा किया। घटना के बाद अस्पताल संचालक, डॉक्टर और कर्मचारियों के मौके से चले जाने की बात सामने आई है। सूचना पर पहुंची पुलिस ने मामले की जांच शुरू करते हुए शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
जानकारी के अनुसार, देवरिया जिले के गौरीबाजार थाना क्षेत्र की निवासी मिन्ता देवी पत्नी श्याम सुंदर राजभर को शुक्रवार सुबह करीब साढ़े दस बजे अचानक पेट में तेज दर्द हुआ। परिजन आनन-फानन में उन्हें देवीपुर स्थित आरपी फार्मेसी डायबिटिक एंड हार्ट केयर अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां चिकित्सकों ने उनका इलाज शुरू किया।
परिजनों का आरोप है कि इलाज के दौरान महिला की हालत बिगड़ गई और कुछ ही देर में उसकी मौत हो गई। महिला की मौत के बाद परिजनों ने चिकित्सकीय लापरवाही का आरोप लगाते हुए अस्पताल परिसर में हंगामा शुरू कर दिया। इसी दौरान अस्पताल के डॉक्टर व अन्य स्टाफ के वहां से चले जाने की बात कही जा रही है।
घटना की सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को संभालते हुए मामले की पड़ताल की। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच के बाद ही मौत की वास्तविक वजह स्पष्ट हो सकेगी।
अस्पताल के पुराने रिकॉर्ड को लेकर भी उठे सवाल
घटना के बाद अस्पताल के संचालन को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय स्तर पर यह दावा किया जा रहा है कि करीब तीन वर्ष पूर्व उक्त अस्पताल को सील किया गया था और बाद में नाम बदलकर इसका संचालन दोबारा शुरू किया गया। हालांकि, इस दावे की आधिकारिक पुष्टि अभी सामने नहीं आई है।
सबसे अहम सवाल यह है कि यदि अस्पताल पहले किसी कार्रवाई के चलते सील किया गया था तो बाद में उसे किन परिस्थितियों में दोबारा संचालित करने की अनुमति मिली? अस्पताल में इलाज करने वाले चिकित्सकों की योग्यता, पंजीकरण, अस्पताल की वैधता तथा आवश्यक स्वास्थ्य विभागीय अनुमतियों की स्थिति क्या है? इन बिंदुओं की जांच स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन के स्तर से होना जरूरी है।
फिलहाल महिला की मौत को लेकर परिजनों द्वारा लगाए गए लापरवाही के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में पोस्टमार्टम रिपोर्ट, पुलिस जांच और स्वास्थ्य विभाग की जांच से ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि महिला की मौत बीमारी की गंभीरता के कारण हुई या इलाज में किसी प्रकार की चिकित्सकीय चूक की भूमिका रही।
मामले में निष्पक्ष जांच इसलिए भी महत्वपूर्ण है ताकि मृतका के परिजनों को वास्तविक स्थिति का पता चल सके और यदि किसी स्तर पर लापरवाही या नियमों का उल्लंघन सामने आता है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

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