संतकबीरनगर। मिशन शक्ति अभियान फेज-5.0 के द्वितीय चरण के तहत महिला अपराधों की रोकथाम को लेकर बेलहरकला थाना पुलिस ने कार्रवाई करते हुए युवती को शादी का झांसा देकर दुष्कर्म करने के आरोप में वांछित एक अभियुक्त को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार गिरफ्तार अभियुक्त को आवश्यक विधिक कार्रवाई के बाद न्यायालय भेज दिया गया।
पुलिस के मुताबिक कार्रवाई पुलिस अधीक्षक संतकबीरनगर संदीप कुमार मीना के निर्देशन, अपर पुलिस अधीक्षक सुशील कुमार सिंह के मार्गदर्शन तथा क्षेत्राधिकारी मेंहदावल सर्व दवन सिंह के पर्यवेक्षण में की गई। थानाध्यक्ष बेलहरकला सर्वेश कुमार के नेतृत्व में गठित पुलिस टीम ने मुकदमा अपराध संख्या 285/2026 में नामजद अभियुक्त को गिरफ्तार किया।
घर के पास से हुई गिरफ्तारी
पुलिस के अनुसार गिरफ्तार अभियुक्त की पहचान सुजीत पुत्र बहरैची, निवासी भोलाखर्ग कला, थाना बेलहरकला, संतकबीरनगर के रूप में हुई है। उसे 24 सितंबर 2026 को उसके घर के पास से गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने बताया कि अभियुक्त के विरुद्ध थाना बेलहरकला में धारा 69, 352 और 351(3) बीएनएस के तहत मामला दर्ज है।
पुलिस का कहना है कि महिला द्वारा दिए गए प्रार्थना पत्र के आधार पर शादी का झांसा देकर दुष्कर्म किए जाने के आरोप में मुकदमा दर्ज किया गया था। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस ने साक्ष्य संकलन के आधार पर कार्रवाई करते हुए आरोपी की गिरफ्तारी की।
मिशन शक्ति के तहत कार्रवाई, लेकिन असली कसौटी जांच की गुणवत्ता
महिला अपराधों के मामलों में त्वरित कार्रवाई महत्वपूर्ण है, लेकिन किसी व्यक्ति की गिरफ्तारी को मामले का अंतिम निष्कर्ष नहीं माना जा सकता। ऐसे मामलों में शिकायत के साथ-साथ बयानों, उपलब्ध डिजिटल या अन्य साक्ष्यों, मेडिकल परीक्षण, परिस्थितिजन्य तथ्यों और विवेचना की निष्पक्षता की भूमिका महत्वपूर्ण होती है।
पुलिस की त्वरित कार्रवाई से शिकायतकर्ता को कानून के स्तर पर कार्रवाई की उम्मीद जरूर मिलती है, लेकिन आगे की जांच कितनी तथ्यपरक और समयबद्ध रहती है, यह भी उतना ही महत्वपूर्ण प्रश्न है। विशेष रूप से शादी का झांसा देकर यौन अपराध के आरोपों में जांच एजेंसियों के सामने तथ्यों को कानूनी कसौटी पर परखने की जिम्मेदारी रहती है।
महिला सुरक्षा अभियान का प्रभाव केवल गिरफ्तारी से नहीं
मिशन शक्ति अभियान का उद्देश्य महिलाओं और बालिकाओं को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना तथा अपराधों के प्रति त्वरित पुलिस प्रतिक्रिया सुनिश्चित करना है। ऐसे में किसी मामले में गिरफ्तारी के साथ-साथ यह भी देखना जरूरी है कि पीड़िता की सुरक्षा, सम्मान और गोपनीयता का संरक्षण हो तथा विवेचना निष्पक्ष तरीके से आगे बढ़े।
स्थानीय स्तर पर महिला अपराधों की रोकथाम का वास्तविक प्रभाव तभी दिखाई देगा, जब कार्रवाई के साथ शिकायतों की सुनवाई, प्रभावी जांच, पीड़ित सहायता और न्यायिक प्रक्रिया तक निरंतर फॉलोअप भी सुनिश्चित हो।
पुलिस टीम
अभियुक्त की गिरफ्तारी करने वाली टीम में उपनिरीक्षक वीरेंद्र कन्नौजिया, हेड कांस्टेबल दीनानाथ राजभर, कांस्टेबल लक्ष्मीकान्त तिवारी और कांस्टेबल मनीष चन्द्र यादव शामिल रहे।
कानूनी स्थिति: पुलिस द्वारा लगाए गए आरोप अभी न्यायिक परीक्षण के अधीन हैं। किसी अभियुक्त की गिरफ्तारी या उसके विरुद्ध दर्ज मुकदमा अपने आप में दोषसिद्धि नहीं है; अंतिम निर्णय सक्षम न्यायालय द्वारा साक्ष्यों के आधार पर किया जाएगा।

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