(By- Mohammad Sayeed Pathan Editor Mission Sandesh)
संतकबीरनगर। कोतवाली खलीलाबाद क्षेत्र के भकठान गोसाईपुर में ब्रह्मनन्द यादव की हत्या के मामले में पुलिस ने पांच आरोपितों को गिरफ्तार करने का दावा किया है। पुलिस के मुताबिक गिरफ्तार आरोपितों की निशानदेही पर घटना में इस्तेमाल किए गए चार बांस के डंडे, एक लोहे की गैंती और लाल मिर्च पाउडर बरामद किया गया है। पुलिस की कार्रवाई के बाद सामने आई कहानी में पुरानी रंजिश, कथित बदले की भावना और आगामी प्रधानी चुनाव को लेकर बनाई गई कथित रणनीति ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है।
पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपितों की पहचान अभिमन्यु यादव, अजय यादव, रामस्वरूप यादव, संजय यादव और राकेश यादव के रूप में हुई है। इनमें चार आरोपितों को 23 सितंबर की रात बयारा रोड स्थित मंझरिया रेलवे क्रासिंग के पास से तथा राकेश यादव को महाराजगंज जनपद के शिकारपुर नहर पुलिया तिराहा से गिरफ्तार किए जाने की बात पुलिस ने कही है।
रास्ता रोककर पहले आंखों में डाली मिर्च, फिर किया हमला
मामले की शुरुआत 22 सितंबर को हुई घटना से बताई जा रही है। मृतक के भाई रमाकान्त यादव द्वारा कोतवाली खलीलाबाद में दी गई तहरीर के अनुसार, ब्रह्मनन्द यादव बाइक से गिढीनी बाजार जा रहे थे। आरोप है कि राकेश यादव के घर के सामने उनकी बाइक रोककर उनकी आंखों में पिसी हुई लाल मिर्च डाल दी गई।
पुलिस के अनुसार, आंखों में मिर्च पड़ने से ब्रह्मनन्द नीचे गिर गए, जिसके बाद आरोपितों ने कथित तौर पर लाठी-डंडों और धारदार हथियार से उन पर हमला किया। गंभीर रूप से घायल ब्रह्मनन्द को स्थानीय लोगों की मदद से 112 नंबर की गाड़ी से जिला अस्पताल पहुंचाया गया, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
यह घटना अपने पीछे कई गंभीर सवाल छोड़ गई है—क्या हमला अचानक हुआ था या इसके पीछे पहले से तैयारी थी? यदि पुलिस की बरामदगी और विवेचना में सामने आई बातें सही साबित होती हैं, तो लाल मिर्च पाउडर से लेकर हथियारों तक की कथित तैयारी घटना की पूर्व नियोजित प्रकृति की ओर संकेत करती है। हालांकि इन बिंदुओं का अंतिम निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया में साक्ष्यों के आधार पर ही होगा।
पांचवें आरोपित का नाम विवेचना में सामने आने का दावा
पुलिस ने घटना के बाद मुकदमा अपराध संख्या 890/2026 के तहत धारा 103(1) और 3(5) बीएनएस में मुकदमा दर्ज किया था। विवेचना के दौरान पुलिस ने राकेश यादव का नाम प्रकाश में आने की बात कही है। गिरफ्तारी और कथित बरामदगी के आधार पर मुकदमे में बीएनएस की धारा 191(2), 191(3), 190 और 61(2) की बढ़ोतरी किए जाने की जानकारी भी पुलिस ने दी है।
पुरानी मारपीट और चुनावी रंजिश की कहानी
पुलिस द्वारा जारी पूछताछ विवरण में राकेश यादव के हवाले से दावा किया गया है कि गांव के प्रधान रमाकान्त यादव, उनके भाई ब्रह्मनन्द यादव और श्रीकान्त यादव से आरोपित पक्ष की पहले से रंजिश चली आ रही थी। पुलिस के मुताबिक आरोपित ने 18 मई 2026 को हुई कथित मारपीट की घटना का भी जिक्र किया है, जिसके संबंध में पहले मुकदमा दर्ज होने की बात कही गई है।
पुलिस के अनुसार पूछताछ में राकेश यादव ने कथित तौर पर बताया कि इसी रंजिश के चलते उसने अन्य आरोपितों के साथ मिलकर ब्रह्मनन्द यादव को रास्ते से हटाने और आगामी प्रधानी चुनाव में रमाकान्त यादव को हराने की योजना बनाई।
यह पुलिस द्वारा प्रस्तुत पूछताछ का संस्करण है। आरोपित के कथित बयान को स्वयं में अंतिम प्रमाण नहीं माना जा सकता; इसकी पुष्टि विवेचना में जुटाए गए स्वतंत्र साक्ष्यों, बरामदगी, प्रत्यक्षदर्शियों, तकनीकी साक्ष्यों और न्यायालयीन परीक्षण से होगी।
गैंती से वार करने का भी पुलिस का दावा
पुलिस के अनुसार पूछताछ में राकेश यादव ने कथित रूप से स्वीकार किया कि उसने ब्रह्मनन्द यादव की आंखों में लाल मिर्च पाउडर डालने के बाद अन्य लोगों के साथ लाठी-डंडों से हमला किया और घर में रखी लोहे की गैंती से भी सिर समेत शरीर के अन्य हिस्सों पर वार किया।
पुलिस का कहना है कि आरोपितों को इस बात का विश्वास हो गया था कि ब्रह्मनन्द की मृत्यु हो चुकी है। इसके बाद वे कथित रूप से अपने घर के आसपास लाठी-डंडों के साथ खड़े रहे और पुलिस कार्रवाई के डर से बाहर निकलने की फिराक में थे।
गांव की रंजिश से हत्या तक पहुंची कहानी
इस मामले का सबसे चिंताजनक पहलू केवल हत्या नहीं, बल्कि गांव की पुरानी रंजिश का कथित तौर पर हिंसक रूप ले लेना है। यदि विवेचना में पुलिस द्वारा बताए गए घटनाक्रम और पूर्व विवाद की कड़ियां प्रमाणित होती हैं, तो यह सवाल भी महत्वपूर्ण होगा कि पहले से चल रहे विवाद को समय रहते रोकने के लिए स्थानीय स्तर पर क्या प्रयास हुए थे।
ग्रामीण क्षेत्रों में राजनीतिक अथवा पारिवारिक वर्चस्व से जुड़े विवाद जब व्यक्तिगत दुश्मनी में बदलते हैं, तो उनका असर केवल दो पक्षों तक सीमित नहीं रहता। ऐसी घटनाएं पूरे गांव के सामाजिक माहौल को प्रभावित करती हैं और लंबे समय तक तनाव का कारण बन सकती हैं।
अब पुलिस के सामने चुनौती केवल आरोपितों की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है। विवेचना में यह स्थापित करना महत्वपूर्ण होगा कि घटना की वास्तविक योजना क्या थी, इसमें प्रत्येक आरोपित की कथित भूमिका क्या रही, हथियार और अन्य वस्तुएं घटना से किस प्रकार जुड़ी हैं तथा पूर्व विवाद और कथित चुनावी उद्देश्य का घटना से वास्तविक संबंध कितना है।
फिलहाल पांचों आरोपित पुलिस गिरफ्त में हैं और मामले की विवेचना जारी है। आरोपितों के विरुद्ध लगाए गए आरोप न्यायालय में साक्ष्यों के आधार पर तय होंगे।
गिरफ्तारी करने वाली टीम
पुलिस के अनुसार कार्रवाई प्रभारी निरीक्षक जयप्रकाश दुबे के नेतृत्व में कोतवाली खलीलाबाद पुलिस तथा एसओजी प्रभारी रजनीश राय की टीम ने की। कार्रवाई में निरीक्षक वीरेन्द्र कुमार यादव, निरीक्षक जयप्रकाश चौबे, उपनिरीक्षक प्रभान्शु कुमार राय, इल्ताफ खान, धर्मनाथ यादव, अश्वनी तिवारी, शैलेन्द्र कुमार समेत कोतवाली पुलिस के अधिकारी-कर्मचारी तथा एसओजी के हेड कांस्टेबल अनुप कुमार राय, धनंजय श्रीवास्तव, विवेक राय और अन्य पुलिसकर्मी शामिल रहे।

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