(By- Mohammad Sayeed Pathan Editor Mission Sandesh)
संत कबीर नगर,। सेवा संकल्प अभियान के तहत बुधवार को विकास भवन परिसर स्थित डीपीआरसी हाल में दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग एवं सीआरसी गोरखपुर के संयुक्त तत्वावधान में ‘पर्पल फेयर’ कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में मेंहदावल विधायक अनिल कुमार त्रिपाठी, धनघटा विधायक गणेश चन्द्र चौहान तथा राज्य आयुक्त दिव्यांगजन हिमांशू शेखर झा की उपस्थिति रही। मुख्य विकास अधिकारी जयकेश त्रिपाठी भी कार्यक्रम में मौजूद रहे।
कार्यक्रम का उद्देश्य दिव्यांगजनों को केवल सहायता अथवा उपकरण उपलब्ध कराने तक सीमित न रखकर उन्हें खेलकूद, सांस्कृतिक गतिविधियों और जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से सामाजिक भागीदारी से जोड़ना रहा। विभिन्न स्टॉलों के जरिए दिव्यांगजन कल्याण से जुड़ी योजनाओं और सुविधाओं की जानकारी दी गई, जबकि खेलकूद एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने प्रतिभागियों को अपनी क्षमता प्रदर्शित करने का अवसर दिया।
उपकरण वितरण से आगे बढ़कर जरूरी है स्थायी समावेशन
पर्पल फेयर जैसे आयोजन दिव्यांगजनों के प्रति समाज की सोच बदलने और उनकी प्रतिभा को मंच देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माने जा सकते हैं। हालांकि, किसी एक कार्यक्रम की सफलता का वास्तविक आकलन इस बात से होगा कि कार्यक्रम के बाद दिव्यांगजनों को योजनाओं का लाभ कितनी आसानी से मिलता है और उनकी रोजमर्रा की बाधाएं कितनी कम होती हैं।
दिव्यांगजनों के लिए उपकरण उपलब्ध कराना एक महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन इसके साथ शिक्षा, रोजगार, कौशल विकास, स्वास्थ्य सेवाओं, प्रमाणपत्र एवं यूडीआईडी जैसी सुविधाओं तक आसान पहुंच और सार्वजनिक स्थानों पर सुगम व्यवस्था भी उतनी ही जरूरी है। ऐसे में पर्पल फेयर जैसे आयोजनों से प्राप्त जागरूकता को विभागीय स्तर पर नियमित सहायता और फॉलोअप से जोड़ना चुनौती भी है और आवश्यकता भी।
खेल और संस्कृति से बढ़ता है आत्मविश्वास
कार्यक्रम में विभिन्न खेलकूद प्रतियोगिताओं और सांस्कृतिक गतिविधियों का आयोजन इस दृष्टि से अहम रहा कि दिव्यांगजन केवल सहायता प्राप्त करने वाले लाभार्थी के रूप में नहीं, बल्कि सक्रिय प्रतिभागी और समाज के समान सदस्य के रूप में सामने आए। ऐसे मंच प्रतिभाओं की पहचान करने और आत्मविश्वास बढ़ाने में सहायक हो सकते हैं।
कार्यक्रम में जिला दिव्यांगजन सशक्तीकरण अधिकारी प्रतिभा यादव, सीआरसी गोरखपुर के निदेशक जितेन्द्र यादव, जिला पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी रवीश चन्द्र, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी अमित कुमार सिंह, जिला विद्यालय निरीक्षक उपेन्द्र कुमार सहित अन्य जिला स्तरीय अधिकारी, नामित चिकित्सकों का पैनल तथा संबंधित विभागीय कर्मचारी मौजूद रहे।
सरकारी स्तर पर आयोजित जागरूकता कार्यक्रमों की उपयोगिता तभी व्यापक मानी जाएगी, जब इनमें सामने आने वाली समस्याओं का समयबद्ध समाधान और लाभार्थियों का फॉलोअप भी सुनिश्चित हो। ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले दिव्यांगजनों तक योजनाओं की जानकारी, प्रमाणपत्र, सहायक उपकरण, शिक्षा एवं रोजगार संबंधी सुविधाएं कितनी सहजता से पहुंच रही हैं—यह भी निरंतर समीक्षा का विषय होना चाहिए।
पर्पल फेयर ने समावेशन और समान अवसर का संदेश जरूर दिया है, लेकिन अब इसकी अगली कड़ी के रूप में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कार्यक्रम में सामने आए जरूरतमंद दिव्यांगजनों की समस्याओं और मांगों पर संबंधित विभाग किस स्तर तक कार्रवाई करता है। जागरूकता से अधिकारों की जानकारी मिलती है, लेकिन अधिकारों का वास्तविक लाभ व्यवस्था की पहुंच और जवाबदेही से ही सुनिश्चित होता है।



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