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1200 मतदाताओं के मानक पर होगा मतदेय स्थलों का पुनर्गठन, निर्वाचन विभाग ने जारी की समय-सारिणी

 


संतकबीरनगर। आगामी निर्वाचक नामावलियों के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण की तैयारियों के तहत निर्वाचन विभाग ने जनपद में मतदेय स्थलों के पुनर्गठन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। उप जिला निर्वाचन अधिकारी एवं अपर जिलाधिकारी सत्य प्रकाश ने बताया कि मुख्य निर्वाचन अधिकारी, उत्तर प्रदेश के निर्देशानुसार प्रत्येक मतदेय स्थल पर अधिकतम 1200 मतदाताओं के मानक के आधार पर मतदान केंद्रों का पुनर्निर्धारण और संभावित विभाजन किया जाएगा।

निर्वाचन विभाग द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार 24 जून से 28 जून 2026 तक मतदेय स्थलों का भौतिक सत्यापन, नए मतदान केंद्रों के लिए उपयुक्त भवनों का चिन्हांकन तथा आवश्यकतानुसार पुनर्निर्धारण की कार्रवाई की जाएगी। इसके बाद 29 जून से 1 जुलाई तक मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर प्रस्ताव तैयार किए जाएंगे।

4 जुलाई 2026 को प्रस्तावित मतदेय स्थलों की आलेख्य सूची प्रकाशित की जाएगी तथा उसे राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि वे अपने सुझाव और आपत्तियां दर्ज करा सकें। प्राप्त आपत्तियों के निस्तारण के बाद 18 जुलाई को सांसदों, विधायकों एवं मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के साथ बैठक आयोजित कर सूची को अंतिम रूप दिया जाएगा।

इसके उपरांत 25, 27 एवं 28 जुलाई को जिला निर्वाचन अधिकारी द्वारा सभी आवश्यक अभिलेखों सहित प्रस्ताव मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय को अनुमोदन के लिए भेजे जाएंगे, जबकि 31 जुलाई 2026 को मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय द्वारा आयोग से अंतिम स्वीकृति प्राप्त करने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

समीक्षात्मक दृष्टि से मतदेय स्थलों का पुनर्गठन चुनाव प्रक्रिया को अधिक सुगम, पारदर्शी और मतदाता-अनुकूल बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। 1200 मतदाताओं के मानक का उद्देश्य मतदान केंद्रों पर भीड़ कम करना, मतदान प्रक्रिया को व्यवस्थित बनाना और प्रत्येक मतदाता को सुविधाजनक मतदान स्थल उपलब्ध कराना है। हालांकि, यह भी आवश्यक है कि नए मतदान केंद्रों का चयन स्थानीय भौगोलिक परिस्थितियों, दिव्यांग एवं वरिष्ठ नागरिकों की पहुंच तथा ग्रामीण क्षेत्रों की वास्तविक आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर किया जाए। यदि राजनीतिक दलों, जनप्रतिनिधियों और आम नागरिकों के सुझावों को गंभीरता से शामिल किया जाता है, तो यह प्रक्रिया आगामी चुनावों की निष्पक्षता और मतदाता सहभागिता को और अधिक मजबूत कर सकती है।

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