संतकबीरनगर। जिले के बखिरा थाना क्षेत्र में दहेज उत्पीड़न के बाद एक विवाहिता की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए वांछित महिला आरोपी को गिरफ्तार कर शनिवार को न्यायालय भेज दिया है। पुलिस का कहना है कि महिला संबंधी अपराधों के प्रति अपनाई जा रही सख्त नीति के तहत यह कार्रवाई की गई है।
पुलिस के अनुसार, बखिरा थाना क्षेत्र के तिघरा गांव निवासी नीतू देवी, पत्नी विजय कुमार, को मड़या चौराहा स्थित नेहरू स्कूल के पास से गिरफ्तार किया गया। आरोपी के विरुद्ध दहेज मृत्यु और दहेज प्रतिषेध अधिनियम की विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज है। गिरफ्तारी के बाद उसे न्यायिक अभिरक्षा के लिए न्यायालय भेज दिया गया।
मामले की पृष्ठभूमि के अनुसार, पीड़िता के भाई ने बखिरा थाने में दर्ज कराई गई तहरीर में आरोप लगाया था कि उसकी बहन को विवाह के बाद से ही अतिरिक्त दहेज की मांग को लेकर लगातार मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जाता था। आरोप है कि मांग पूरी न होने पर उसके साथ मारपीट की जाती रही और अंततः 6 जून 2026 को उसे फांसी लगाकर मौत के घाट उतार दिया गया। शिकायत के आधार पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर विवेचना शुरू की थी।
जांच के दौरान मिले साक्ष्यों और तथ्यों के आधार पर पुलिस ने आरोपी महिला की तलाश तेज कर दी थी। आखिरकार उसे गिरफ्तार कर न्यायालय के समक्ष पेश किया गया। इस कार्रवाई को पुलिस महिला अपराधों के विरुद्ध चलाए जा रहे अभियान का हिस्सा बता रही है।
दहेज उत्पीड़न और दहेज मृत्यु जैसी घटनाएं आज भी समाज के सामने गंभीर चुनौती बनी हुई हैं। कानून सख्त होने के बावजूद ऐसी घटनाएं यह संकेत देती हैं कि केवल कानूनी कार्रवाई पर्याप्त नहीं है, बल्कि सामाजिक सोच में भी व्यापक बदलाव की आवश्यकता है। बेटियों को बोझ और दहेज को प्रतिष्ठा का प्रतीक मानने वाली मानसिकता पर प्रभावी प्रहार किए बिना ऐसे अपराधों पर पूरी तरह अंकुश लगाना कठिन होगा।
पुलिस की त्वरित कार्रवाई से पीड़ित परिवार को न्याय मिलने की उम्मीद जरूर मजबूत हुई है, लेकिन यह मामला एक बार फिर समाज से यह सवाल पूछता है कि आखिर दहेज की लालच में कितनी और बेटियों की जान जाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में त्वरित जांच, प्रभावी अभियोजन और दोषियों को कठोर सजा ही समाज में कानून के प्रति विश्वास और अपराधियों में भय पैदा कर सकती है।

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