संतकबीरनगर, 20 अगस्त 2026। खरीफ-2026 में प्राकृतिक आपदाओं से फसल को होने वाले नुकसान के जोखिम से किसानों को आर्थिक सुरक्षा देने के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत बीमा कराने की प्रक्रिया जारी है। जिला कृषि अधिकारी डॉ. सर्वेश कुमार यादव ने किसानों से निर्धारित समयसीमा के भीतर फसल बीमा कराने की अपील की है।
कृषि विभाग के अनुसार गैर-ऋणी किसानों के लिए फसल बीमा कराने की अंतिम तिथि 14 अगस्त 2026 थी, जबकि ऋणी किसानों के लिए अंतिम तिथि 31 अगस्त 2026 निर्धारित है। ऐसे में ऋणी किसानों के पास बीमा कराने के लिए अब सीमित समय शेष है। विभाग ने पात्र किसानों से समय रहते योजना का लाभ लेने की अपील की है।
धान की फसल के लिए कितना प्रीमियम?
जनपद में खरीफ मौसम के अंतर्गत धान की फसल को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में अधिसूचित किया गया है। विभाग के मुताबिक धान के लिए बीमित धनराशि 82,200 रुपये है, जबकि किसान अंश के रूप में 1,644 रुपये प्रीमियम निर्धारित किया गया है। यह प्रीमियम बीमित धनराशि का 2 प्रतिशत है।
ऋणी और गैर-ऋणी किसान ऐसे कराएं बीमा
समस्त पात्र ऋणी किसानों का फसल बीमा बैंक स्तर से कराया जाएगा। वहीं गैर-ऋणी किसान आवश्यक अभिलेखों के साथ नजदीकी जनसेवा केंद्र पर पहुंचकर आवेदन करा सकते हैं। इसके लिए आधार कार्ड, बैंक पासबुक, भूमि की खतौनी और फसल बुआई प्रमाण-पत्र जैसे दस्तावेज जरूरी होंगे।
किसान किसी भी प्रकार की जानकारी, सुझाव, शिकायत अथवा फसल नुकसान की सूचना के लिए संयुक्त टोल फ्री नंबर 14447 पर संपर्क कर सकते हैं। इसके अलावा नजदीकी विकासखंड स्थित कृषि बीज भंडार, कृषि रक्षा इकाई, जिला कृषि अधिकारी कार्यालय अथवा उप कृषि निदेशक कार्यालय, संतकबीरनगर से भी जानकारी प्राप्त की जा सकती है।
बाढ़, सूखा और असफल बुआई समेत कई जोखिम कवर
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना खरीफ-2026 के तहत ग्राम पंचायत स्तर पर बाढ़, सूखा और असफल बुआई जैसी दैवीय आपदाओं को कवर किया गया है। इसके अलावा अधिसूचित शर्तों के अनुसार खड़ी फसल को ओलावृष्टि, जलभराव (धान को छोड़कर), भूस्खलन, बादल फटने तथा आकाशीय बिजली से उत्पन्न आग से होने वाली क्षति भी व्यक्तिगत स्तर पर कवर की गई है।
फसल कटाई के बाद खेत में सुखाने के लिए रखी गई फसल को भी कटाई के बाद 14 दिनों तक ओलावृष्टि, चक्रवात, वर्षा अथवा बेमौसम बारिश से होने वाली क्षति की स्थिति में योजना के अंतर्गत कवर किया गया है।
फसल नुकसान की सूचना में देरी पड़ सकती है भारी
योजना के तहत कवर जोखिम से फसल को नुकसान होने की स्थिति में किसान को 72 घंटे के भीतर संयुक्त टोल फ्री नंबर 14447 पर सूचना देना अनिवार्य है। समय पर सूचना नहीं देने की स्थिति में क्षति का दावा प्रभावित हो सकता है।
समीक्षात्मक दृष्टि से देखें तो फसल बीमा योजना किसानों के लिए प्राकृतिक आपदाओं के बीच आर्थिक सुरक्षा का महत्वपूर्ण माध्यम है, लेकिन इसका वास्तविक लाभ तभी मिल सकता है जब किसान समयसीमा, आवश्यक दस्तावेज और नुकसान की सूचना देने की प्रक्रिया को लेकर जागरूक रहें। खासकर 31 अगस्त की अंतिम तिथि को देखते हुए ऋणी किसानों को बैंक स्तर पर अपने बीमा की स्थिति सुनिश्चित कर लेनी चाहिए, जबकि फसल नुकसान की स्थिति में 72 घंटे की समयसीमा को किसी भी सूरत में नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
स्रोत: सूचना विभाग, संतकबीरनगर।

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