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सीआरसी गोरखपुर में समावेशी शिक्षा पर मंथन, 22 प्रतिभागियों ने सीखी प्रभावी रणनीतियां


(Report and edited by-Mohammad Sayeed Pathan)

गोरखपुर। समावेशी शिक्षा को केवल सरकारी नीति तक सीमित रखने के बजाय उसे विद्यालय, परिवार और समाज के सामूहिक प्रयास से प्रभावी बनाने की जरूरत है। इसी उद्देश्य को केंद्र में रखते हुए सीआरसी गोरखपुर में ‘समावेशी शिक्षा की रणनीतियां’ विषय पर एकदिवसीय ऑफलाइन सीआरई कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से आए 22 प्रतिभागियों ने सहभागिता की।

कार्यक्रम का शुभारंभ सीआरसी गोरखपुर के निदेशक जितेंद्र यादव ने दीप प्रज्वलित कर किया। इसके बाद बतौर रिसोर्स पर्सन जितेंद्र यादव, राजेश यादव एवं राजेश कुमार ने समावेशी शिक्षा की अवधारणा, उसके व्यावहारिक पक्ष और इसे विद्यालयी स्तर पर प्रभावी बनाने की रणनीतियों पर विस्तार से चर्चा की।

केवल नीति नहीं, बदलना होगा सामाजिक नजरिया

कार्यक्रम में वक्ताओं ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि समावेशी शिक्षा की सफलता केवल सरकारी नीतियों और योजनाओं से सुनिश्चित नहीं हो सकती। दिव्यांग एवं विशेष आवश्यकता वाले बच्चों सहित प्रत्येक विद्यार्थी को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए समाज के दृष्टिकोण में सकारात्मक बदलाव जरूरी है।

विश्लेषण की दृष्टि से देखें तो समावेशी शिक्षा की सबसे बड़ी चुनौती संसाधनों के साथ-साथ सामाजिक स्वीकार्यता भी है। यदि परिवार, विद्यालय और समाज बच्चे की क्षमताओं को समझने और उसे समान अवसर देने के लिए तैयार नहीं हैं, तो बेहतर नीतियां भी अपेक्षित परिणाम नहीं दे सकतीं। ऐसे में विद्यालय प्रशासन की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। विद्यालयों को बच्चों की अलग-अलग जरूरतों को ध्यान में रखते हुए शिक्षण व्यवस्था को अधिक अनुकूल और संवेदनशील बनाने की दिशा में प्रयास करना होगा।

परिवार की भागीदारी को बताया अहम

वक्ताओं ने कहा कि सफल समावेशन के लिए परिवार का सहयोग अत्यंत आवश्यक है। बच्चे की जरूरतों को समझने, उसकी क्षमता के अनुरूप अवसर उपलब्ध कराने और विद्यालय के साथ निरंतर समन्वय बनाए रखने में परिवार की सक्रिय भूमिका महत्वपूर्ण है। वहीं विद्यालय प्रशासन और शिक्षकों को भी सभी विद्यार्थियों को समान शैक्षिक अवसर उपलब्ध कराने के लिए अपने स्तर पर प्रभावी कदम उठाने चाहिए।

कार्यक्रम का समन्वय कार्यक्रम समन्वयक अरविंद कुमार पांडे ने किया। आयोजन के माध्यम से प्रतिभागियों को समावेशी शिक्षा की व्यावहारिक रणनीतियों के साथ-साथ पुनर्वास क्षेत्र में निरंतर व्यावसायिक विकास की आवश्यकता से भी अवगत कराया गया।

सीआरई अंकों का पुनर्वास पेशेवरों के लिए महत्व

गौरतलब है कि सीआरई (Continuing Rehabilitation Education) कार्यक्रम पुनर्वास क्षेत्र से जुड़े व्यावसायिकों के लिए निरंतर प्रशिक्षण और व्यावसायिक ज्ञान को अद्यतन रखने का महत्वपूर्ण माध्यम है। ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से पुनर्वास व्यावसायिक अपने प्रमाण-पत्र के नवीनीकरण के लिए आवश्यक सीआरई अंक अर्जित करते हैं।

भारतीय पुनर्वास परिषद के मानकों के अनुसार प्रत्येक पुनर्वास व्यावसायिक को सात वर्ष की अवधि में 100 सीआरई अंक अर्जित करने होते हैं। इस लिहाज से ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम केवल औपचारिक प्रमाण-पत्र नवीनीकरण की प्रक्रिया नहीं, बल्कि पुनर्वास पेशेवरों के ज्ञान, दक्षता और कार्यप्रणाली को समय के साथ बेहतर बनाने का महत्वपूर्ण माध्यम भी हैं।

कुल मिलाकर, सीआरसी गोरखपुर में आयोजित यह कार्यक्रम समावेशी शिक्षा को कागजी नीतियों से आगे ले जाकर विद्यालयी व्यवहार, पारिवारिक सहयोग और सामाजिक संवेदनशीलता से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा सकता है। असली सफलता तभी मानी जाएगी, जब प्रशिक्षण में सामने आई रणनीतियां विद्यालयों और पुनर्वास सेवाओं के स्तर पर प्रभावी रूप से लागू होकर प्रत्येक बच्चे को समान और सम्मानजनक शैक्षिक अवसर उपलब्ध करा सकें।

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