संतकबीरनगर। भूमि खरीद-बिक्री के नाम पर कथित जालसाजी और लाखों रुपये की धोखाधड़ी के मामले में कोतवाली खलीलाबाद पुलिस ने वांछित एक आरोपी को गिरफ्तार करने का दावा किया है। पुलिस के अनुसार आरोपी को न्यायालय में पेश कर अग्रिम विधिक कार्रवाई की गई है। हालांकि, मामले में दर्ज आरोपों की पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के दौरान साक्ष्यों के आधार पर होगी।
पुलिस अधीक्षक संदीप कुमार मीना के निर्देशन, अपर पुलिस अधीक्षक सुशील कुमार सिंह के मार्गदर्शन तथा क्षेत्राधिकारी खलीलाबाद प्रियम राजशेखर पाण्डेय के पर्यवेक्षण में चलाए जा रहे अपराध नियंत्रण अभियान के तहत प्रभारी निरीक्षक जयप्रकाश दूबे के नेतृत्व में गठित टीम ने मु0अ0सं0 507/2026 से संबंधित वांछित अभियुक्त जितेन्द्र गिरी पुत्र पशुपति नाथ गिरी, निवासी ग्राम बाँसपार, थाना गीडा, जनपद गोरखपुर को मगहर स्थित दुर्गा मंदिर के पास से गिरफ्तार किया।
क्या है पूरा मामला?
पुलिस के अनुसार, 11 जून 2026 को वादिनी श्रीमती गुड्डी गुप्ता ने कोतवाली खलीलाबाद में तहरीर देकर आरोप लगाया था कि भूमि खरीद के नाम पर आरोपियों ने ₹40 लाख में सौदा तय किया। इस दौरान उनसे अग्रिम के रूप में ₹24 लाख लिए गए, जिनमें ₹16 लाख ऑनलाइन तथा ₹8 लाख नकद दिए जाने का दावा किया गया।
शिकायत में आरोप लगाया गया कि धनराशि प्राप्त करने के बाद आरोपियों ने विभिन्न बहाने बनाकर न तो भूमि का बैनामा कराया और न ही रकम वापस की। उल्टे शेष भुगतान की मांग करते रहे। वादिनी ने यह भी आरोप लगाया कि सौदे के दौरान कूटरचित दस्तावेज तैयार किए गए और पैसे वापस मांगने पर गाली-गलौज तथा जान से मारने की धमकी दी गई।
इन आरोपों के आधार पर पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कर विवेचना शुरू की थी।
पुलिस की कार्रवाई और आगे की जांच
पुलिस का कहना है कि गिरफ्तार आरोपी को न्यायालय में पेश कर दिया गया है तथा मामले में अन्य आरोपियों की भूमिका और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर विवेचना आगे बढ़ाई जा रही है। गिरफ्तारी करने वाली टीम में उपनिरीक्षक प्रभान्शु कुमार राय, कांस्टेबल मुकेश यादव और अमितेश सिंह शामिल रहे।
भूमि सौदों में बढ़ते विवाद चिंता का विषय
भूमि खरीद-बिक्री से जुड़े विवाद और कथित धोखाधड़ी के मामलों में लगातार वृद्धि प्रशासन और आम नागरिकों दोनों के लिए चिंता का विषय बनती जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि बिना दस्तावेजों का विधिवत सत्यापन किए बड़ी धनराशि का भुगतान करना जोखिमपूर्ण हो सकता है। ऐसे मामलों में खरीदारों को राजस्व अभिलेखों की जांच, विक्रेता के स्वामित्व की पुष्टि और विधिक सलाह लेने के बाद ही किसी भी वित्तीय लेन-देन का निर्णय करना चाहिए।
फिलहाल यह मामला जांच और न्यायिक प्रक्रिया के अधीन है। आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायालय में प्रस्तुत साक्ष्यों और सुनवाई के बाद ही होगी।

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