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मिशन शक्ति 5.0 का असर: धनघटा परिवार परामर्श केन्द्र ने 4 परिवारों में कराया सुलह-समझौता, टूटते रिश्तों को मिली नई राह


संतकबीरनगर। पारिवारिक विवाद कई बार छोटी-छोटी गलतफहमियों, आपसी संवाद की कमी और बढ़ते मतभेदों के कारण ऐसे मोड़ पर पहुंच जाते हैं, जहां रिश्ते टूटने की कगार पर खड़े दिखाई देने लगते हैं। ऐसे मामलों में यदि समय रहते संवाद और समझाइश का रास्ता अपनाया जाए तो परिवारों को बिखरने से बचाया जा सकता है। इसी उद्देश्य से मिशन शक्ति फेज-5.0 के द्वितीय चरण के तहत चलाए जा रहे ‘साथ-साथ’ कार्यक्रम के अंतर्गत परिवार परामर्श केन्द्र द्वारा काउंसलिंग के माध्यम से विवादों के समाधान का प्रयास किया जा रहा है।

पुलिस अधीक्षक संतकबीरनगर संदीप कुमार मीना के निर्देशन में इस सप्ताह परिवार परामर्श केन्द्र धनघटा में पारिवारिक विवाद से जुड़े चार मामलों में काउंसलिंग कराकर आपसी सुलह-समझौता कराया गया। काउंसलिंग के बाद संबंधित पक्षों ने आपसी मतभेद दूर कर साथ रहने की सहमति जताई।

कार्यवाही अपर पुलिस अधीक्षक एवं क्षेत्राधिकारी धनघटा के मार्गदर्शन में थाना प्रभारी दिलीप सिंह, मिशन शक्ति प्रभारी रामेश्वर यादव, परिवार परामर्श केन्द्र प्रभारी महिला उपनिरीक्षक अंजली सरोज तथा सहायक प्रभारी उपनिरीक्षक तूफानी सिंह यादव की उपस्थिति में संपन्न हुई। इस दौरान महिला आरक्षी पूजा गौतम, रोशनी तिवारी और पिंकी कुमारी तथा काउंसलर अवध नारायण मिश्र एवं डॉ. आकांक्षा श्रीवास्तव भी मौजूद रहे।


चार मामलों में बनी सहमति की राह

पहला मामला—नेहा एवं जितेन्द्र कुमार उर्फ गोलू:
पारिवारिक विवाद के चलते दोनों के बीच संबंध टूटने की स्थिति में पहुंच गए थे। काउंसलिंग के दौरान दोनों पक्षों की बात सुनी गई। समझाइश के बाद दोनों ने आपसी सहमति से साथ रहने की इच्छा जताई।

दूसरा मामला—आंचल पाण्डेय एवं सागर पाण्डेय:
आपसी पारिवारिक विवाद के कारण दांपत्य संबंध प्रभावित हो रहे थे। काउंसलिंग के दौरान दोनों पक्षों को समझाया गया, जिसके बाद दोनों ने मतभेद दूर कर साथ रहने पर सहमति व्यक्त की।

तीसरा मामला—संजू एवं माया:
दोनों पक्षों के मध्य चल रहे पारिवारिक विवाद को काउंसलिंग के माध्यम से सुलझाने का प्रयास किया गया। बातचीत के बाद दोनों पक्षों ने आपसी मतभेद समाप्त कर साथ रहने की सहमति दी।

चौथा मामला—मंजू देवी एवं विजयी:
पारिवारिक विवाद के कारण वैवाहिक संबंध प्रभावित हो रहे थे। परिवार परामर्श केन्द्र में दोनों पक्षों की काउंसलिंग की गई। समझाइश के बाद दोनों ने आपसी सहमति से साथ रहने का निर्णय लिया।

समीक्षा: समझौता ही हर मामले का समाधान नहीं, लेकिन संवाद जरूरी

परिवार परामर्श केन्द्र की यह पहल इस मायने में महत्वपूर्ण है कि हर पारिवारिक विवाद को सीधे कानूनी संघर्ष में बदलने के बजाय पहले संवाद, काउंसलिंग और आपसी सहमति का अवसर दिया जा रहा है। चार मामलों में बनी सहमति यह संकेत देती है कि कई पारिवारिक विवादों की जड़ में संवादहीनता और आपसी गलतफहमियां भी होती हैं।


हालांकि, सुलह-समझौता तभी सार्थक है जब वह दोनों पक्षों की स्वतंत्र और वास्तविक सहमति से हो। गंभीर हिंसा, उत्पीड़न या किसी पक्ष की सुरक्षा से जुड़े मामलों में केवल समझौते पर जोर देने के बजाय पीड़ित की सुरक्षा और कानून के अनुरूप कार्रवाई को प्राथमिकता देना आवश्यक है। इसलिए परिवार परामर्श केन्द्र की भूमिका केवल परिवार बचाने तक सीमित न होकर न्यायसंगत और सुरक्षित समाधान सुनिश्चित करने की भी है।

पुलिस विभाग के अनुसार, परिवार परामर्श केन्द्र द्वारा काउंसलिंग के माध्यम से पारिवारिक विवादों का आपसी सहमति से समाधान कराने, टूटते परिवारों को जोड़ने तथा परिवारों में आपसी सौहार्द बनाए रखने का निरंतर प्रयास किया जा रहा है। ‘साथ-साथ’ कार्यक्रम की मूल भावना भी यही है कि विवाद बढ़ने से पहले संवाद का रास्ता खोला जाए और जहां संभव हो, रिश्तों को सम्मानजनक तरीके से बचाया जा सके।

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