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सिर पर कलश, कदमों में श्रद्धा और उमड़ा जनसैलाब; मटीहना में विधायक अंकुर राज तिवारी ने दिया समरसता का संदेश



(Report and edited by-Mohammad Sayeed Pathan)

संतकबीरनगर। संत शिरोमणि गुरु रविदास जी की 650वीं जयंती वर्ष के अवसर पर सामाजिक समरसता, समानता और भाईचारे के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से चलाए जा रहे ‘समरसता संकल्प अभियान’ के तहत खलीलाबाद विधानसभा क्षेत्र के मटीहना गांव में कलश वंदन यात्रा का आयोजन किया गया। यात्रा के दौरान आस्था, श्रद्धा और सामाजिक एकजुटता का ऐसा संगम देखने को मिला, जिसने पूरे माहौल को भावपूर्ण बना दिया।

कलश वंदन यात्रा के स्वागत में बड़ी संख्या में ग्रामवासी और श्रद्धालु जुटे। सदर विधायक अंकुर राज तिवारी भी यात्रा में शामिल हुए और सिर पर कलश लेकर श्रद्धा एवं सहभागिता का संदेश दिया। विधायक के साथ सैकड़ों समर्थक और ग्रामीण मौजूद रहे। यात्रा के दौरान लोगों में खासा उत्साह देखने को मिला और संत रविदास जी के जयघोष से वातावरण भक्तिमय हो उठा।


इस अवसर पर विधायक अंकुर राज तिवारी ने भारत रत्न बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा पर श्रद्धा-सुमन अर्पित कर उन्हें नमन किया। यह दृश्य सामाजिक न्याय, समानता और समरसता के उन मूल्यों की ओर भी संकेत करता नजर आया, जिनके लिए संत रविदास और बाबा साहब डॉ. अंबेडकर ने अपने-अपने युग में समाज को जागरूक करने का कार्य किया।

कलश यात्रा बनी सामाजिक एकता का प्रतीक

कलश वंदन यात्रा केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसने सामाजिक एकता और सद्भाव का संदेश भी दिया। ग्रामीणों की भागीदारी और श्रद्धालुओं का उत्साह इस बात का प्रमाण रहा कि संत रविदास जी के विचार आज भी समाज के विभिन्न वर्गों को जोड़ने की क्षमता रखते हैं।

संत रविदास जी ने अपने विचारों और रचनाओं के माध्यम से जातिगत भेदभाव, ऊंच-नीच और सामाजिक असमानता के विरुद्ध आवाज उठाई थी। उनका दर्शन मनुष्य को उसकी जाति या सामाजिक स्थिति से नहीं, बल्कि उसके कर्म और मानवीय मूल्यों से देखने की प्रेरणा देता है। ऐसे में उनकी जयंती वर्ष के अवसर पर आयोजित समरसता अभियान सामाजिक स्तर पर भी महत्वपूर्ण संदेश देता है।



‘बेगमपुरा’ की कल्पना आज भी प्रासंगिक

संत रविदास जी के विचारों में ऐसे समाज की कल्पना दिखाई देती है, जहां भेदभाव, भय और असमानता के लिए कोई स्थान न हो। उनकी ‘बेगमपुरा’ की अवधारणा समानता और मानवीय गरिमा पर आधारित समाज का सपना प्रस्तुत करती है। वर्तमान समय में सामाजिक और राजनीतिक जीवन में समरसता की आवश्यकता को देखते हुए उनके विचारों की प्रासंगिकता और बढ़ जाती है।

मटीहना में उमड़ी भीड़ और ग्रामीणों की सहभागिता ने इस विचार को जमीन पर जीवंत रूप दिया। यात्रा में शामिल लोगों ने संत रविदास जी के बताए मार्ग पर चलने और समाज में आपसी प्रेम, भाईचारा तथा सद्भाव मजबूत करने का संकल्प लिया।


सामाजिक समरसता का संदेश बना आयोजन का केंद्र

आयोजन का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष यह रहा कि धार्मिक श्रद्धा के साथ सामाजिक जिम्मेदारी का संदेश भी सामने आया। संत रविदास जी की शिक्षाओं को केवल स्मरण करने के बजाय उन्हें व्यवहार में उतारना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। सामाजिक भेदभाव को समाप्त कर सम्मान, समान अवसर और भाईचारे की भावना को मजबूत करना आज भी समाज की बड़ी आवश्यकता है।

मटीहना में कलश वंदन यात्रा के दौरान उमड़ा जनसमूह इसी भावना का प्रतीक बना। विधायक अंकुर राज तिवारी की सहभागिता और ग्रामीणों की व्यापक मौजूदगी ने कार्यक्रम को राजनीतिक गतिविधि से आगे बढ़ाकर सामाजिक संदेश के रूप में भी स्थापित किया।

कार्यक्रम के दौरान श्रद्धालुओं ने “संत शिरोमणि गुरु रविदास जी की जय” के जयघोष के साथ सामाजिक समरसता और सद्भावपूर्ण समाज के निर्माण का संकल्प लिया। आयोजन ने यह संदेश दिया कि संत रविदास जी की विरासत केवल किसी एक वर्ग की नहीं, बल्कि समानता और मानवता में विश्वास रखने वाले पूरे समाज की साझा धरोहर है।

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