संतकबीरनगर। महिला सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन को लेकर उत्तर प्रदेश शासन के मिशन शक्ति अभियान फेज-5.0 के द्वितीय चरण में संतकबीरनगर पुलिस ने जनपदभर में जागरूकता अभियान चलाया। पुलिस अधीक्षक संदीप कुमार मीना के निर्देशन में सभी थाना क्षेत्रों में एंटी रोमियो टीमों, महिला बीट अधिकारियों और मिशन शक्ति टीमों ने बाजारों, सार्वजनिक स्थलों, विद्यालयों और ग्रामीण क्षेत्रों में पहुंचकर महिलाओं, बालिकाओं और छात्राओं से संवाद किया।
अभियान के दौरान ग्राम चौपालों को संवाद का माध्यम बनाते हुए ग्रामीणों की समस्याएं सुनी गईं और उन्हें शिकायतों के त्वरित एवं विधिसम्मत निस्तारण के प्रति आश्वस्त किया गया। महिला पुलिसकर्मियों ने महिलाओं और बालिकाओं को अपने अधिकारों, आत्मरक्षा के उपायों तथा किसी भी तरह की हिंसा, उत्पीड़न या अपराध की स्थिति में तत्काल पुलिस से संपर्क करने के लिए प्रेरित किया।
पुलिस टीमों ने महिलाओं को महिला हेल्पलाइन 1090, आपातकालीन सेवा 112, चिकित्सा सहायता 108, बाल सहायता हेल्पलाइन 1098 और साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 की जानकारी दी। साथ ही साइबर अपराध की शिकायत के लिए cybercrime.gov.in पोर्टल के उपयोग के बारे में भी बताया गया। पुलिस ने महिलाओं से अपील की कि वे किसी भी अपराध या उत्पीड़न को छिपाने के बजाय निर्भीक होकर शिकायत करें।
अभियान के तहत कोतवाली खलीलाबाद की एंटी रोमियो टीम ने तामेश्वरनाथ, ब्लूमिंग बड्स स्कूल, सरैया बाजार, सूर्या इंटरनेशनल स्कूल और गोरखल में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए। महिला थाना पुलिस ने ग्राम उनखास, महुली पुलिस ने ग्राम नाथनगर, मेंहदावल पुलिस ने मरवटिया कला व सोनोरा, बेलहरकला पुलिस ने करमहिया तथा धर्मसिंहवा पुलिस ने धर्मसिंहवा, सीकरी, गोरीराई और केचुआखोर में महिलाओं, बालिकाओं एवं स्कूली छात्राओं को पंपलेट वितरित कर जागरूक किया।
महिला बीट अधिकारियों और मिशन शक्ति टीमों ने चौपाल शैली में संवाद करते हुए महिलाओं को विभिन्न सरकारी योजनाओं और सुरक्षा उपायों की जानकारी दी। उन्हें आत्मविश्वास के साथ अपनी बात रखने और अन्याय के विरुद्ध आवाज उठाने के लिए प्रेरित किया गया।
जागरूकता के साथ निरंतरता भी जरूरी
समीक्षात्मक दृष्टि से देखें तो मिशन शक्ति जैसे अभियानों की सफलता केवल जागरूकता कार्यक्रमों की संख्या से नहीं, बल्कि उनके बाद होने वाली कार्रवाई और महिलाओं के बीच पैदा होने वाले भरोसे से तय होती है। हेल्पलाइन नंबरों की जानकारी तभी प्रभावी होगी, जब शिकायत मिलने के बाद पुलिस की प्रतिक्रिया त्वरित, संवेदनशील और निष्पक्ष हो। ग्रामीण क्षेत्रों में चौपालों के माध्यम से सीधे संवाद की पहल इसलिए महत्वपूर्ण है कि इससे उन महिलाओं तक भी सुरक्षा तंत्र की जानकारी पहुंच सकती है, जो थाने या ऑनलाइन माध्यमों तक आसानी से नहीं पहुंच पातीं।
सड़क सुरक्षा नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन और सार्वजनिक स्थानों पर महिलाओं की सुरक्षा के लिए भी पुलिस की नियमित निगरानी आवश्यक है। मिशन शक्ति के तहत चलाए जा रहे जागरूकता अभियानों को निरंतर फील्ड मॉनिटरिंग और शिकायतों के परिणाम आधारित निस्तारण से जोड़ा जाए तो महिला सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन के उद्देश्य को अधिक प्रभावी ढंग से हासिल किया जा सकता है।


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