लखनऊ, 14 अगस्त। उत्तर प्रदेश सरकार की योजनाओं, उपलब्धियों और प्रदेश में हुए बदलाव को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग अपने संचार माध्यमों को युवा केंद्रित बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। विभाग की मासिक पत्रिका ‘उत्तर प्रदेश संदेश’ को हिंदी के साथ अंग्रेजी में भी प्रकाशित करने तथा युवाओं की रुचि के अनुरूप ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने की तैयारी है।
सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग के निदेशक विशाल सिंह ने शुक्रवार को सूचना निदेशालय में आयोजित सम्मान समारोह के दौरान यह जानकारी दी। कार्यक्रम में ‘उत्तर प्रदेश संदेश’ के अप्रैल-मई और जून-जुलाई अंकों में उत्कृष्ट लेखन करने वाले लेखकों को सम्मानित किया गया।
सरकार की योजनाओं की जानकारी पहुंचाना जिम्मेदारी
विशाल सिंह ने कहा कि पिछले साढ़े नौ वर्षों में उत्तर प्रदेश में विभिन्न क्षेत्रों में बदलाव और विकास के प्रयास हुए हैं। ऐसे में सरकार की योजनाओं, उनके क्रियान्वयन और उपलब्धियों की जानकारी जनता तक पहुंचाने में सूचना तंत्र के साथ लेखकों और बुद्धिजीवियों की भूमिका महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि सकारात्मक लेखन के साथ तथ्यपरकता भी जरूरी है। योजनाओं और उपलब्धियों को केवल प्रचार के रूप में प्रस्तुत करने के बजाय उनके प्रभाव और सामाजिक बदलाव को भी सामने लाने की आवश्यकता है। इससे पाठकों को योजनाओं की वास्तविक उपयोगिता समझने में मदद मिल सकती है।
जेन जी और जेन अल्फा के अनुरूप बदलना होगा संवाद
सूचना निदेशक ने कहा कि समाज और सूचना ग्रहण करने का तरीका तेजी से बदल रहा है। जेन जी और जेन अल्फा डिजिटल माध्यमों को अधिक प्राथमिकता दे रहे हैं। ऐसे में सरकार और समाज के बीच संवाद के पारंपरिक तरीकों के साथ डिजिटल माध्यमों को भी प्रभावी बनाना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि विकास और बदलाव को युवा दृष्टिकोण से देखने तथा नई पीढ़ी की अपेक्षाओं के अनुरूप प्रस्तुत करने की जरूरत है। ‘उत्तर प्रदेश संदेश’ को भी इसी दिशा में अधिक प्रभावी ढंग से युवाओं से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।
अंग्रेजी लेखों से बढ़ेगा पाठक वर्ग
वर्तमान में ‘उत्तर प्रदेश संदेश’ हिंदी में प्रकाशित होती है। विभाग भविष्य में इसमें अंग्रेजी लेखों को भी स्थान देने की दिशा में काम करेगा। इससे प्रदेश में हो रहे विकास कार्यों और सरकारी योजनाओं से जुड़ी सामग्री को व्यापक पाठक वर्ग तक पहुंचाने का अवसर मिलेगा।
हालांकि, पत्रिका को युवा और डिजिटल पाठकों से जोड़ने की सफलता केवल भाषा बदलने से तय नहीं होगी। सामग्री की प्रस्तुति, डिजिटल पहुंच, विषयों का चयन, आंकड़ों की विश्वसनीयता और उपलब्धियों के साथ जमीनी प्रभाव को संतुलित रूप से सामने रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण होगा।
लेखकों के सम्मान से रचनात्मकता को प्रोत्साहन
समारोह में ‘उत्तर प्रदेश संदेश’ के विभिन्न अंकों में उत्कृष्ट लेखन करने वाले लेखकों को पुष्पगुच्छ, प्रमाणपत्र और अंगवस्त्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। विशाल सिंह ने कहा कि लेखकों का सम्मान भारतीय सांस्कृतिक परंपरा का हिस्सा है और इससे रचनात्मक कार्य करने वालों का मनोबल बढ़ता है।
उन्होंने कहा कि पत्रकारिता, लेखन और समाज सेवा के क्षेत्र में योगदान देने वाले विद्वानों के अनुभव और विचार समाज को नई दिशा देने में सहायक होते हैं। सम्मान की यह प्रक्रिया आगे भी जारी रखने की बात कही गई।
इन लेखकों को मिला सम्मान
‘उत्तर प्रदेश संदेश’ के अप्रैल-मई अंक में सुरक्षा एवं सुशासन सेक्टर में उल्लेखनीय लेखन के लिए लखनऊ के प्रद्युम्न तिवारी, समाज कल्याण में लखनऊ की पायल लक्ष्मी सोनी और हाथरस की डॉ. शिवानी कटारा, शिक्षा में गोरखपुर की ऋचा सिंह, कृषि में सिद्धार्थनगर की यशोदा श्रीवास्तव तथा अवस्थापना एवं संबद्ध क्षेत्र में लखनऊ के सियाराम पांडेय ‘शांत’ को सम्मानित किया गया।
वहीं जून-जुलाई अंक में संतुलित विकास सेक्टर में देवरिया के डॉ. सौरभ मालवीय, कृषि एवं संबद्ध क्षेत्र में प्रयागराज के वीरेन्द्र पाठक, नगर एवं ग्राम्य विकास में लखनऊ के रुद्रेश घिल्डियाल, पर्यटन में महाराजगंज के रवि प्रकाश तथा शिक्षा क्षेत्र में आगरा की डॉ. सोनाली शुभम् को सम्मान प्रदान किया गया।
प्रदेशभर के लेखकों को पत्रिका से जुड़ने का आह्वान
सूचना निदेशक ने प्रदेशभर के विद्वानों और लेखकों से ‘उत्तर प्रदेश संदेश’ से जुड़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश के विकास, सरकारी योजनाओं और समाज में हो रहे सकारात्मक बदलावों पर लेखक अपने अनुभव और बौद्धिक योगदान के माध्यम से पत्रिका को समृद्ध कर सकते हैं।
कार्यक्रम को अपर निदेशक अरविन्द कुमार मिश्र ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर वरिष्ठ वित्त एवं लेखाधिकारी संजय कुमार सिंह, सहायक निदेशक सतीश चन्द्र भारती, चन्द्र मोहन, डॉ. जितेन्द्र प्रताप सिंह, चन्द्र विजय वर्मा, अमित कुमार यादव, सहयुक्त संपादक अजय कुमार द्विवेदी, उप संपादक दिनेश कुमार गुप्ता सहित विभागीय अधिकारी मौजूद रहे।
समीक्षा: प्रचार से आगे विश्वसनीय संवाद की चुनौती
‘उत्तर प्रदेश संदेश’ को अंग्रेजी और डिजिटल माध्यमों से युवाओं तक पहुंचाने की पहल समय की मांग के अनुरूप दिखाई देती है। लेकिन इसकी सबसे बड़ी चुनौती सरकारी उपलब्धियों की जानकारी और स्वतंत्र, तथ्यपरक तथा विश्वसनीय प्रस्तुति के बीच संतुलन बनाए रखना होगी।
यदि पत्रिका योजनाओं की घोषणा के साथ उनके जमीनी असर, लाभार्थियों के अनुभव, आंकड़ों और सामने आने वाली चुनौतियों को भी स्थान देती है, तो यह नई पीढ़ी के लिए अधिक उपयोगी सूचना मंच बन सकती है। डिजिटल युग में युवा केवल उपलब्धियां सुनना नहीं चाहते, बल्कि यह भी जानना चाहते हैं कि किसी योजना का वास्तविक असर क्या हुआ और उसका लाभ अंतिम व्यक्ति तक कितना पहुंचा। इसी कसौटी पर ‘उत्तर प्रदेश संदेश’ का नया स्वरूप अपनी प्रभावशीलता साबित कर सकेगा।

Post a Comment