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दिव्यांगों के हित में उठाए जाएंगे हर जरूरी कदम: राज्य आयुक्त प्रो. हिमांशु शेखर झा ने अभिभावकों से किया संवाद



सीआरसी गोरखपुर में आयोजित अभिभावक प्रशिक्षण कार्यक्रम में राज्य दिव्यांगजन आयुक्त प्रो. हिमांशु शेखर झा ने दिव्यांगजनों के अभिभावकों से संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं। यूडीआईडी कार्ड और सरकारी सुविधाओं से जुड़ी कठिनाइयों के समाधान का भरोसा दिया। तिरंगा यात्रा में शामिल होकर दिव्यांगजनों का उत्साहवर्धन भी किया।

(Report and edited by-Mohammad Sayeed Pathan)

गोरखपुर। दिव्यांगता केवल किसी व्यक्ति की शारीरिक या मानसिक स्थिति नहीं, बल्कि समाज की संवेदनशीलता, व्यवस्था की पहुंच और अवसरों की समानता की भी परीक्षा है। जब किसी दिव्यांग बच्चे के अभिभावक को सरकारी सुविधा पाने के लिए कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं या जरूरी दस्तावेज हासिल करने में कठिनाई होती है, तो समस्या केवल एक परिवार की नहीं रह जाती। इसी संवेदनशील पहलू को केंद्र में रखते हुए राज्य दिव्यांगजन आयुक्त, उत्तर प्रदेश प्रो. हिमांशु शेखर झा ने दिव्यांगजनों के हित में हर जरूरी प्रयास किए जाने का भरोसा दिलाया।

यह बात उन्होंने सीआरसी गोरखपुर द्वारा आयोजित अभिभावक प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान कही। मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे प्रो. झा ने दिव्यांगजनों के अभिभावकों से संवाद करते हुए उनकी समस्याओं को सुना और उनके समाधान के संबंध में आवश्यक सुझाव दिए।

यूडीआईडी कार्ड और सरकारी सुविधाओं की दिक्कतें बनीं प्रमुख मुद्दा

संवाद के दौरान अभिभावकों ने यूडीआईडी कार्ड के निर्गमन सहित दिव्यांगजनों को मिलने वाली विभिन्न सरकारी सुविधाओं का लाभ प्राप्त करने में आ रही परेशानियों को सामने रखा। अभिभावकों की समस्याओं से यह भी स्पष्ट हुआ कि योजनाओं और सुविधाओं की उपलब्धता के बावजूद जमीनी स्तर पर प्रक्रिया की जानकारी, दस्तावेजी औपचारिकताओं और विभागीय समन्वय की कमी कई परिवारों के लिए चुनौती बनी हुई है।

राज्य दिव्यांगजन आयुक्त प्रो. हिमांशु शेखर झा ने समस्याओं को गंभीरता से सुनते हुए संबंधित प्रक्रियाओं को लेकर आवश्यक सुझाव दिए। उन्होंने कहा कि दिव्यांगजनों का हित प्राथमिकता में है और उनके अधिकारों एवं सुविधाओं की राह में आने वाली व्यावहारिक कठिनाइयों को दूर करने के लिए हर जरूरी कदम उठाए जाएंगे।

अभिभावकों को सशक्त बनाना भी जरूरी

सीआरसी गोरखपुर के निदेशक जितेंद्र यादव ने राज्य दिव्यांगजन आयुक्त का स्वागत करते हुए कहा कि संस्थान दिव्यांगजनों को गुणवत्तापूर्ण सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि दिव्यांग बच्चों की देखभाल और उनके विकास में अभिभावकों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। इसलिए सीआरसी की ओर से ऐसे प्रयास किए जा रहे हैं, जिनसे अभिभावक अपने बच्चों की जरूरतों को बेहतर ढंग से समझ सकें और उनकी शिक्षा, उपचार, पुनर्वास तथा सामाजिक सहभागिता में प्रभावी भूमिका निभा सकें।

यह पहल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण की प्रक्रिया केवल संस्थागत सेवाओं तक सीमित नहीं हो सकती। परिवार को जानकारी, मार्गदर्शन और आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराना भी उतना ही जरूरी है। जागरूक और प्रशिक्षित अभिभावक दिव्यांग बच्चे के आत्मविश्वास तथा भविष्य निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

तिरंगा यात्रा में शामिल होकर बढ़ाया उत्साह

कार्यक्रम के बाद प्रो. हिमांशु शेखर झा सीआरसी गोरखपुर द्वारा आयोजित तिरंगा यात्रा में भी शामिल हुए। उन्होंने दिव्यांगजनों के साथ यात्रा में सहभागिता कर उनका उत्साहवर्धन किया। तिरंगे के साथ दिव्यांगजनों की भागीदारी ने कार्यक्रम को भावनात्मक रूप से विशेष बना दिया और यह संदेश दिया कि राष्ट्र निर्माण की यात्रा में दिव्यांगजन भी समान रूप से सहभागी हैं।

कार्यक्रम का संचालन सहायक प्राध्यापक राजेश कुमार ने किया। इस अवसर पर प्रशासनिक अधिकारी विजय गुप्ता सहित सीआरसी गोरखपुर के अधिकारी एवं कर्मचारी मौजूद रहे।

योजनाओं से आगे बढ़कर जरूरत है प्रभावी पहुंच की

कार्यक्रम से सामने आया सबसे महत्वपूर्ण पक्ष यह रहा कि दिव्यांगजनों के लिए योजनाएं और अधिकार तभी सार्थक होंगे, जब उनका लाभ वास्तविक पात्र व्यक्ति तक बिना अनावश्यक बाधा के पहुंचे। यूडीआईडी कार्ड जैसे जरूरी दस्तावेज से लेकर सरकारी योजनाओं तक पहुंच की प्रक्रिया जितनी सरल और पारदर्शी होगी, उतना ही दिव्यांग परिवारों का भरोसा व्यवस्था पर मजबूत होगा।

राज्य दिव्यांगजन आयुक्त का अभिभावकों से सीधा संवाद इस दिशा में सकारात्मक पहल माना जा सकता है। अब जरूरत इस बात की है कि संवाद में सामने आई समस्याओं के समाधान की नियमित समीक्षा भी हो, ताकि आश्वासन जमीनी बदलाव में परिवर्तित हो सके। दिव्यांगजनों के लिए सम्मान, समान अवसर और सहज सरकारी सेवाएं केवल कल्याणकारी नीति नहीं, बल्कि समावेशी समाज की बुनियादी आवश्यकता हैं।

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