(Report and edited by-Mohammad Sayeed Pathan)
संत कबीरनगर। पुलिसिंग को केवल कानून-व्यवस्था और अपराध नियंत्रण तक सीमित न रखते हुए पुलिस एवं जनता के बीच विश्वास और आत्मीयता बढ़ाने की दिशा में थाना महुली परिसर में विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। पुलिस अधीक्षक संतकबीरनगर संदीप कुमार मीना के निर्देशन में परिसर स्थित शिव मंदिर पर आयोजित भंडारे में पुलिसकर्मियों के साथ क्षेत्रीय नागरिकों ने भी उत्साहपूर्वक सहभागिता की।
भंडारे के दौरान पुलिसकर्मियों और आम नागरिकों ने एक साथ बैठकर प्रसाद ग्रहण किया। इससे थाना परिसर में धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक सौहार्द और आपसी भाईचारे का माहौल देखने को मिला। थाना महुली के पुलिसकर्मियों एवं कर्मचारियों ने आयोजन की व्यवस्थाओं में सक्रिय भूमिका निभाते हुए सेवाभाव के साथ सहभागिता की।
वर्दी के साथ संवेदना का संदेश
पुलिस की भूमिका सामान्यतः अपराध नियंत्रण, कानून-व्यवस्था और सुरक्षा व्यवस्था से जोड़कर देखी जाती है। ऐसे आयोजनों में पुलिसकर्मियों की सहभागिता उसकी एक अलग सामाजिक भूमिका को सामने लाती है। भंडारे जैसे सामुदायिक आयोजन पुलिस और नागरिकों के बीच औपचारिक दूरी कम करने तथा संवाद के अवसर पैदा करने में सहायक हो सकते हैं।
स्थानीय नागरिकों ने पुलिसकर्मियों की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि पुलिस केवल कार्रवाई करने वाली संस्था नहीं, बल्कि सामाजिक सरोकारों के प्रति संवेदनशील रहते हुए जरूरत के समय जनता के साथ खड़ी रहने वाली संस्था भी हो सकती है।
हालांकि, जनविश्वास केवल धार्मिक या सामाजिक आयोजनों से स्थायी रूप से मजबूत नहीं होता। इसके लिए पुलिस का निष्पक्ष व्यवहार, त्वरित सुनवाई, संवेदनशील कार्रवाई और आमजन के साथ नियमित संवाद भी उतना ही जरूरी है। इस दृष्टि से थाना परिसर में आयोजित भंडारे को पुलिस-जनसंपर्क की एक सकारात्मक पहल के रूप में देखा जा सकता है।
कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि पुलिस की जिम्मेदारी वर्दी पहनने के साथ समाप्त नहीं होती, बल्कि समाज के साथ विश्वास और सहयोग का रिश्ता कायम करना भी प्रभावी पुलिसिंग का महत्वपूर्ण हिस्सा है। सेवा, संवेदना और कर्तव्य के बीच संतुलन ही पुलिस और जनता के बीच मजबूत संबंध की आधारशिला बन सकता है।
सेवा में संस्कार, कर्तव्य में संवेदना और समाज के साथ विश्वास—यही जनोन्मुखी पुलिसिंग की वास्तविक पहचान है।

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