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गो-आश्रय स्थलों की व्यवस्था पर डीएम सख्त, तीन दिन में सीसीटीवी दुरुस्त करने के निर्देश



(Report and edited by-Mohammad Sayeed Pathan)

संत कबीर नगर, । जनपद के गो-आश्रय स्थलों में संरक्षित गोवंशों की व्यवस्थाओं और सुविधाओं को लेकर जिलाधिकारी आलोक कुमार ने मंगलवार को कलेक्ट्रेट सभागार में समीक्षा बैठक की। बैठक में भूसा-चारा, दाना, हरा चारा, स्वच्छ पेयजल, टीन शेड, बाउंड्रीवाल, चिकित्सा व्यवस्था और बरसात के दौरान जलभराव जैसी समस्याओं की समीक्षा की गई। अपर जिलाधिकारी (न्यायिक) चंद्रेश कुमार सिंह और मुख्य विकास अधिकारी जयकेश त्रिपाठी समेत संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।

समीक्षा के दौरान जिलाधिकारी ने गो-आश्रय स्थलों की निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. एसके तिवारी को तीन दिन के भीतर गो-आश्रय स्थलों में सीसीटीवी व्यवस्था सुदृढ़ करने के निर्देश दिए। सीसीटीवी की व्यवस्था केवल निगरानी तक सीमित न रहकर गोवंशों की वास्तविक स्थिति, देखरेख और व्यवस्थाओं की नियमित मॉनिटरिंग का माध्यम बने, तभी इसका उद्देश्य पूरा होगा।

बरसात को देखते हुए डीएम ने सभी खंड विकास अधिकारियों और अधिशासी अधिकारियों को निर्देश दिया कि वृहद गो-संरक्षण केंद्रों तथा अस्थायी एवं स्थायी गो-आश्रय स्थलों में किसी भी स्थिति में जलभराव न होने पाए। इसके लिए जल निकासी की व्यवस्था पहले से सुनिश्चित करने को कहा गया। गोवंशों के लिए पर्याप्त सूखा स्थान उपलब्ध रहना भी आवश्यक है, क्योंकि बारिश के दौरान कीचड़ और जलभराव पशुओं के स्वास्थ्य के लिए गंभीर समस्या बन सकते हैं।

बैठक में अस्थायी गो-आश्रय स्थल मोहद्दीनपुर में संरक्षित गोवंशों को जल्द से जल्द कान्हा गौशाला कुरमौल में स्थानांतरित करने के निर्देश भी दिए गए। प्रशासन का यह कदम अस्थायी व्यवस्था से अपेक्षाकृत व्यवस्थित संरक्षण केंद्र की ओर स्थानांतरण के रूप में देखा जा सकता है।

जिलाधिकारी ने सभी गो-आश्रय स्थलों में संरक्षित गोवंशों का नियमित स्वास्थ्य परीक्षण और स्थलीय निरीक्षण सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए। इसके लिए संबंधित खंड विकास अधिकारियों और पशु चिकित्सा अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई। उन्होंने स्पष्ट किया कि गोवंशों की संख्या, उपलब्ध सुविधाओं और स्वास्थ्य व्यवस्था का वास्तविक आकलन केवल कागजी रिपोर्ट के आधार पर नहीं, बल्कि नियमित स्थलीय निरीक्षण के माध्यम से किया जाना चाहिए।

समीक्षा से उठे अहम सवाल

गो-आश्रय स्थलों में भूसा, चारा, पानी और चिकित्सा जैसी मूलभूत सुविधाओं की उपलब्धता के साथ बरसात में जलभराव की समस्या पर प्रशासन का ध्यान देना जरूरी है। हालांकि, निर्देश जारी होने के बाद असली चुनौती उनका प्रभावी क्रियान्वयन है। सीसीटीवी लगाने के साथ उसकी नियमित निगरानी, पशुओं के स्वास्थ्य परीक्षण और जल निकासी की व्यवस्था की वास्तविक स्थिति की लगातार जांच भी जरूरी होगी। इससे सरकारी संरक्षण व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ने के साथ गोवंशों की देखभाल की गुणवत्ता में भी सुधार की उम्मीद है।

बैठक में गो-आश्रय स्थलों के निरीक्षण एवं सत्यापन के लिए नामित जनपद स्तरीय नोडल अधिकारियों के अलावा संबंधित खंड विकास अधिकारी, पशु चिकित्सा अधिकारी, अधिशासी अधिकारी एवं अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।

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