(Report and edited by-Mohammad Sayeed Pathan)
संतकबीरनगर। खरीफ सीजन-2026 में किसानों को प्राकृतिक आपदाओं से आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से संचालित प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत कृषि विभाग ने किसानों से समय रहते अपनी फसलों का बीमा कराने की अपील की है। उप कृषि निदेशक डॉ. राकेश कुमार सिंह ने बताया कि जनपद में इस वर्ष यूनिवर्सल सोम्पो जनरल इंश्योरेंस कंपनी को योजना के संचालन के लिए नामित किया गया है।
उन्होंने बताया कि ऋणी किसान 31 अगस्त 2026 तथा गैर-ऋणी किसान 14 अगस्त 2026 तक अपनी फसलों का बीमा करा सकते हैं। धान की अधिसूचित फसल के लिए 82,200 रुपये प्रति हेक्टेयर तक बीमा कवरेज निर्धारित किया गया है, जबकि किसान अंश प्रीमियम 1,644 रुपये प्रति हेक्टेयर रखा गया है।
योजना के तहत असफल बुवाई, फसल की मध्यावस्था में प्राकृतिक आपदाओं, कीट एवं रोगों से नुकसान, ओलावृष्टि, बादल फटना, आकाशीय बिजली, भूस्खलन तथा कटाई के बाद 14 दिनों तक खेत में रखी फसल को बेमौसम बारिश, चक्रवात और ओलावृष्टि से होने वाले नुकसान को भी कवर किया गया है। प्राकृतिक आपदा से फसल क्षति होने पर किसान 72 घंटे के भीतर टोल फ्री नंबर 14447 पर सूचना दर्ज करा सकते हैं।
कृषि विभाग के अनुसार किसान आधार कार्ड, खतौनी, बैंक खाते का विवरण, मोबाइल नंबर और फसल बुवाई घोषणा पत्र के साथ निकटतम सीएससी केंद्र अथवा बैंक शाखा में जाकर बीमा करा सकते हैं।
योजना अच्छी, लेकिन जागरूकता और पहुंच सबसे बड़ी चुनौती
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना किसानों के लिए राहत का महत्वपूर्ण माध्यम मानी जाती है, लेकिन हर वर्ष यह सवाल भी उठता है कि क्या इसकी जानकारी वास्तव में सभी पात्र किसानों तक समय पर पहुंच पाती है? विशेषकर छोटे और सीमांत किसान अक्सर अंतिम तिथि, आवश्यक दस्तावेजों और दावा प्रक्रिया की जानकारी के अभाव में योजना से वंचित रह जाते हैं।
इसके अलावा, कई बार बीमा दावा निस्तारण में देरी और क्षति के आकलन को लेकर भी किसानों की शिकायतें सामने आती रही हैं। ऐसे में केवल बीमा कराने की अपील पर्याप्त नहीं होगी, बल्कि कृषि विभाग, बीमा कंपनी और स्थानीय प्रशासन को गांव-गांव जागरूकता अभियान चलाकर अधिक से अधिक किसानों को योजना से जोड़ना होगा।
यदि समयबद्ध पंजीकरण के साथ पारदर्शी और त्वरित दावा निस्तारण सुनिश्चित किया जाता है, तो यह योजना प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित किसानों के लिए वास्तविक आर्थिक सुरक्षा कवच साबित हो सकती है। फिलहाल, अंतिम तिथियां नजदीक हैं और अब यह देखना होगा कि कृषि विभाग कितने अधिक किसानों तक इस योजना का लाभ पहुंचाने में सफल होता है।

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