- सड़क हादसे के बाद चाईबासा के वृद्धाश्रम में रह रहे थे फूल देव यादव, भाई को देखते ही भावुक हुआ मिलन
(Report Mohammad Sayeed Accredited journalist )
संतकबीरनगर। न्याय की अवधारणा को केवल अदालत और कानूनी विवादों तक सीमित नहीं किया जा सकता। जरूरतमंद व्यक्ति को उसके अधिकार, सुरक्षा, सम्मान और परिवार तक पहुंचाना भी विधिक सेवा की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। इसका मानवीय उदाहरण जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) संत कबीर नगर और DLSA चाईबासा, झारखंड के संयुक्त प्रयास से सामने आया, जब वर्षों से परिवार से बिछड़े बुजुर्ग फूल देव यादव को उनके परिजनों से मिलाया गया।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण संत कबीर नगर की सचिव सुश्री अनन्या साह के अनुसार, बनपुरवा गांव निवासी फूल देव यादव किसी कारणवश रास्ता भटककर झारखंड के चाईबासा पहुंच गए थे। इसी दौरान वह सड़क दुर्घटना का भी शिकार हुए। स्थानीय लोगों की मदद से उन्हें चाईबासा स्थित वृद्धाश्रम में पहुंचाया गया, जहां उन्हें आश्रय और आवश्यक देखभाल उपलब्ध कराई गई।
वर्षों तक परिवार से दूर रहने वाले फूल देव यादव की पहचान और उनके परिजनों की तलाश के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण चाईबासा ने प्रयास शुरू किए। इसी क्रम में संत कबीर नगर DLSA से संपर्क किया गया। दोनों जिलों के विधिक सेवा प्राधिकरणों के बीच सूचना के आदान-प्रदान और स्थानीय स्तर पर सत्यापन की प्रक्रिया आगे बढ़ी। प्रयासों के बाद फूल देव यादव के परिजनों की पहचान हो सकी।
वर्षों बाद भाई से मिला भाई, भावुक हुआ माहौल
परिजनों का पता चलने के बाद फूल देव यादव के भाई सिद्धनाथ यादव चाईबासा पहुंचे। वर्षों के इंतजार के बाद दोनों भाइयों का आमना-सामना हुआ तो माहौल भावुक हो गया। लंबे समय से बिछड़े भाई को सामने देखकर परिवार की खुशी और भावनाएं सहज ही दिखाई दीं।
यह मिलन केवल एक परिवार के पुनर्मिलन की घटना नहीं, बल्कि उन बुजुर्गों के लिए भी महत्वपूर्ण संदेश है जो किसी कारणवश परिवार और सामाजिक व्यवस्था से दूर हो जाते हैं। ऐसे मामलों में समय पर पहचान, संस्थागत सहयोग और संवेदनशील हस्तक्षेप किसी व्यक्ति को दोबारा उसके अपनों तक पहुंचा सकता है।
विधिक सेवा की मानवीय भूमिका भी उजागर
इस प्रकरण ने यह भी रेखांकित किया कि जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की भूमिका केवल अदालतों में कानूनी सहायता उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है। जरूरतमंद, असहाय और वंचित लोगों को उनके अधिकारों तथा सम्मान के साथ जीवन से जोड़ना भी विधिक सेवा व्यवस्था का अहम पक्ष है।
इस पूरे प्रयास का मार्गदर्शन DLSA संत कबीर नगर की सचिव सुश्री अनन्या साह और DLSA चाईबासा के सचिव रवि चौधरी ने किया। वहीं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण संत कबीर नगर के अध्यक्ष/जनपद न्यायाधीश रणधीर सिंह के नेतृत्व एवं संरक्षण में यह प्रयास सफल हुआ।
अभियान में DLSA चाईबासा की वॉलंटियर प्रमिला पात्र, संत कबीर नगर के वॉलंटियर नीरज तथा DLSA संत कबीर नगर के कार्यालय लिपिक आर. भवन चौधरी का भी महत्वपूर्ण सहयोग रहा।
बुजुर्गों की सुरक्षा के लिए सामूहिक जिम्मेदारी जरूरी
इस घटना का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष यह है कि यदि कोई बुजुर्ग भटककर किसी दूसरे जिले या राज्य में पहुंच जाए तो उसकी पहचान और परिवार तक वापसी के लिए प्रशासन, पुलिस, विधिक सेवा संस्थाओं और समाज के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है। केवल परिवार की तलाश पर्याप्त नहीं, बल्कि ऐसे लोगों की गरिमा और सुरक्षा सुनिश्चित करना भी उतना ही आवश्यक है।
DLSA ने आमजन से अपील की है कि यदि कोई बुजुर्ग, असहाय या बेसहारा व्यक्ति परिवार से बिछड़ा हुआ मिले तो इसकी सूचना तत्काल जिला विधिक सेवा प्राधिकरण या निकटतम पुलिस प्रशासन को दें। इससे समय रहते उसकी पहचान कर परिवार तक पहुंचाने की संभावना बढ़ सकती है।
वरिष्ठ नागरिकों के हित संरक्षण के लिए नालसा (वरिष्ठ नागरिकों के लिए विधिक सेवाएं) योजना, 2016 के तहत पात्र व्यक्तियों को निःशुल्क विधिक सहायता, परामर्श और आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराया जाता है। फूल देव यादव की घर वापसी इस बात का उदाहरण है कि संवेदनशीलता और संस्थागत समन्वय साथ आएं तो कानून की पहुंच कागजों से आगे बढ़कर सीधे इंसान और परिवार तक पहुंच सकती है।

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