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लंबित विवेचनाओं और IGRS शिकायतों पर एसपी सख्त, लापरवाही पर विभागीय कार्रवाई की चेतावनी


(Report and edited by-Mohammad Sayeed Pathan)

संतकबीरनगर। पुलिसिंग की गुणवत्ता का आकलन केवल मुकदमा दर्ज करने से नहीं, बल्कि उसकी निष्पक्ष विवेचना, समयबद्ध कार्रवाई और पीड़ित को न्याय मिलने की प्रक्रिया से होता है। इसी को लेकर पुलिस अधीक्षक संतकबीरनगर संदीप कुमार मीना ने शुक्रवार, 7 अगस्त 2026 को थाना कोतवाली खलीलाबाद और धनघटा के अधिकारियों एवं कर्मचारियों के साथ लंबित विवेचनाओं तथा IGRS पोर्टल पर प्राप्त शिकायतों की समीक्षा की।

समीक्षा बैठक में एसपी ने लंबित विवेचनाओं को निर्धारित समयसीमा में निष्पक्ष, गुणवत्तापूर्ण और प्रभावी तरीके से पूरा करने के निर्देश दिए। खास तौर पर महिला अपराध, पॉक्सो एक्ट और अन्य गंभीर मामलों में वैज्ञानिक एवं फॉरेंसिक साक्ष्यों के संकलन को प्राथमिकता देने पर जोर दिया गया। फरार अभियुक्तों की गिरफ्तारी और पीड़ितों को विवेचना की प्रगति की नियमित जानकारी देने के निर्देश भी दिए गए।

IGRS शिकायतों पर भी जवाबदेही तय करने के संकेत

IGRS पोर्टल पर प्राप्त शिकायतों और उन मामलों में, जहां शिकायतकर्ता निस्तारण से असंतुष्ट हैं, एसपी ने गंभीरता से पुनः परीक्षण कर संतोषजनक निस्तारण सुनिश्चित करने को कहा। यह निर्देश इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि शिकायत का केवल पोर्टल पर निस्तारण दर्ज कर देना और वास्तविक समस्या का समाधान होना, दोनों अलग-अलग बातें हैं। असंतुष्ट शिकायतकर्ताओं के मामलों की दोबारा समीक्षा इस अंतर को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकती है।

एसपी ने स्पष्ट चेतावनी दी कि विवेचनाओं अथवा शिकायतों के निस्तारण में अनावश्यक विलंब और लापरवाही पाए जाने पर संबंधित विवेचकों के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की जाएगी। इससे पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों की व्यक्तिगत जवाबदेही तय करने का संकेत मिलता है।

उपनिरीक्षक के खिलाफ विभागीय जांच के आदेश

समीक्षा के दौरान उपनिरीक्षक नन्दू गौतम के संबंध में नियमानुसार विभागीय जांच के आदेश भी दिए गए। हालांकि विभागीय जांच के कारणों और आरोपों का विस्तृत विवरण जारी नहीं किया गया है। ऐसे में जांच पूरी होने से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचने के बजाय उसके परिणाम का इंतजार करना ही उचित होगा।

निर्देशों का असर क्रियान्वयन से तय होगा

बैठक में दिए गए निर्देश पुलिस व्यवस्था में जवाबदेही और समयबद्ध कार्रवाई की दिशा में अहम माने जा सकते हैं, लेकिन इनकी वास्तविक प्रभावशीलता जमीनी स्तर पर होने वाले क्रियान्वयन से ही तय होगी। लंबित विवेचनाओं की संख्या, पुराने मामलों की स्थिति, IGRS में असंतुष्ट शिकायतों के वास्तविक समाधान और विभागीय कार्रवाई की प्रगति पर नियमित निगरानी ही यह साबित करेगी कि समीक्षा बैठकें महज प्रशासनिक औपचारिकता नहीं, बल्कि पुलिसिंग में वास्तविक सुधार का माध्यम बन रही हैं।

पुलिस अधीक्षक ने कहा कि संतकबीरनगर पुलिस आमजन को त्वरित न्याय, पारदर्शी पुलिसिंग और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।

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