(Report and edited by-Mohammad Sayeed Pathan)
संत कबीर नगर। संभावित बाढ़ आपदा से निपटने की तैयारियों का आकलन करने के लिए राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) की संयुक्त टीम ने शुक्रवार को जिले के बाढ़ संवेदनशील क्षेत्रों का स्थलीय निरीक्षण किया। टीम ने बाढ़ चौकियों, राहत केंद्रों और नदी तटीय गांवों का दौरा कर स्थानीय लोगों से संवाद किया तथा आपदा प्रबंधन व्यवस्था की जमीनी हकीकत का जायजा लिया।
निरीक्षण दल में परियोजना निदेशक (बाढ़) एवं परियोजना विशेषज्ञ (FW&IS) आशीष शर्मा, प्रोजेक्ट एसोसिएट (ICEM) प्रशांत कुमार तथा यूएनडीपी की मौसम विशेषज्ञ सुश्री सहाना हेगड़े शामिल रहीं। टीम ने बिड़हर घाट बाढ़ निरीक्षण केंद्र, तुरकौलिया नायक स्थित बाढ़ चौकी, गायघाट और ग्राम तिघरा का निरीक्षण किया। इस दौरान बाढ़ चौकी और बाढ़ शरणालय की व्यवस्थाओं का अवलोकन किया गया तथा ग्रामीणों से संभावित आपदा के समय मिलने वाली सहायता और पूर्व सूचना प्रणाली की जानकारी ली गई।
ग्राम तिघरा में प्रधान, एडीओ पंचायत और ग्राम सचिव के साथ साफ-सफाई तथा राहत व्यवस्थाओं पर चर्चा की गई। टीम ने आपदा राहत पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन बजट एवं राहत प्रक्रिया की जानकारी दी। ग्रामीणों ने बताया कि संभावित बाढ़ की चेतावनी उन्हें मोबाइल संदेशों के माध्यम से मिल जाती है तथा स्थिति गंभीर होने पर लेखपाल को तत्काल सूचना दी जाती है। लोगों को यह भी जागरूक किया गया कि सांप काटने, आकाशीय बिजली गिरने अथवा अन्य आपात स्थितियों में डायल-112 के माध्यम से भी सहायता प्राप्त की जा सकती है।
समीक्षात्मक दृष्टि
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण और ग्रामीणों से संवाद निश्चित रूप से आपदा प्रबंधन की तैयारी का महत्वपूर्ण हिस्सा है, लेकिन केवल निरीक्षण और बैठकें पर्याप्त नहीं होंगी। हर वर्ष बाढ़ के दौरान कई गांवों में राहत सामग्री, सुरक्षित आश्रय, नावों की उपलब्धता, स्वास्थ्य सेवाओं और पशुओं के चारे जैसी बुनियादी व्यवस्थाओं को लेकर शिकायतें सामने आती रही हैं।
यदि इस निरीक्षण के आधार पर कमियों को समय रहते दूर किया जाता है, राहत चौकियों को संसाधनों से सुसज्जित किया जाता है और चेतावनी तंत्र को अंतिम व्यक्ति तक प्रभावी बनाया जाता है, तभी इस पहल का वास्तविक उद्देश्य पूरा होगा। अन्यथा यह दौरा भी केवल औपचारिक निरीक्षण बनकर रह जाएगा। आपदा प्रबंधन की सफलता कागजी तैयारियों से नहीं, बल्कि संकट की घड़ी में त्वरित राहत, समन्वित कार्रवाई और प्रभावित लोगों तक समय पर सहायता पहुंचाने से मापी जाएगी।


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