(Report and edited by-Mohammad Sayeed Pathan)
संतकबीरनगर। IGRS पोर्टल पर दर्ज शिकायतों के निस्तारण में लापरवाही और असंतुष्ट फीडबैक को पुलिस अधीक्षक संदीप कुमार मीना ने गंभीरता से लिया है। शुक्रवार, 14 अगस्त को उन्होंने कोतवाली खलीलाबाद, दुधारा, धनघटा और बेलहरकला थानों से संबंधित शिकायतों के निस्तारण की स्थिति और उसकी गुणवत्ता की समीक्षा की।
समीक्षा के दौरान कुछ मामलों में शिकायतों के निस्तारण में अपेक्षित गुणवत्ता, तत्परता और संवेदनशीलता का अभाव सामने आया। इस पर पुलिस अधीक्षक ने संबंधित पुलिस कर्मियों को अपने दायित्वों के प्रति गंभीरता बरतने तथा शिकायतों का प्रभावी ढंग से निस्तारण करने के सख्त निर्देश दिए।
इसी क्रम में कोतवाली खलीलाबाद में तैनात (दारोगा) उपनिरीक्षक शैलेन्द्र कुमार द्वारा शिकायतों के निस्तारण में अपेक्षित स्तर की कार्रवाई नहीं किए जाने पर लापरवाही के दृष्टिगत उन्हें दंड स्वरूप दौड़ कराई गई। एसपी ने भविष्य में शिकायतों के निस्तारण में किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं बरतने की हिदायत दी।
केवल निस्तारण नहीं, गुणवत्ता पर भी जोर
IGRS जैसी शिकायत निवारण व्यवस्था में महज औपचारिक निस्तारण पर्याप्त नहीं माना जा सकता। शिकायतकर्ता की वास्तविक समस्या को समझना, मौके की जांच करना, नियमानुसार कार्रवाई करना और शिकायतकर्ता को संतोषजनक समाधान उपलब्ध कराना इसकी मूल भावना है। असंतुष्ट फीडबैक की बढ़ती संख्या निस्तारण की गुणवत्ता पर सवाल खड़े कर सकती है।
पुलिस अधीक्षक ने सभी पुलिसकर्मियों को निर्देशित किया कि IGRS प्रार्थना पत्रों और असंतुष्ट फीडबैक से जुड़ी शिकायतों का समयबद्ध, निष्पक्ष, संवेदनशील और गुणवत्तापूर्ण निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। शिकायतकर्ता की बात गंभीरता से सुनी जाए और प्रत्येक मामले में नियमानुसार प्रभावी कार्रवाई की जाए।
उन्होंने स्पष्ट किया कि शिकायतों के निस्तारण में लापरवाही, उदासीनता या शिकायतकर्ता के प्रति असंवेदनशील व्यवहार सामने आने पर संबंधित पुलिसकर्मी के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
समीक्षात्मक तौर पर देखें तो एसपी की कार्रवाई का संदेश स्पष्ट है—IGRS पर शिकायत का निस्तारण केवल आंकड़ा पूरा करने की प्रक्रिया नहीं, बल्कि शिकायतकर्ता को वास्तविक राहत देने की जिम्मेदारी है।


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