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12 साल पुराने दुष्कर्म मामले में फैसला: अभियुक्त को 10 वर्ष का कठोर कारावास, 1.20 लाख रुपये अर्थदंड


Report Sayeed Pathan Editor Mission Sandesh Hindi News Paper 

संत कबीर नगर । जिले में अपराधों के मामलों में प्रभावी अभियोजन और न्यायालय में मजबूत पैरवी के लिए चलाए जा रहे “ऑपरेशन कन्विक्शन” अभियान के तहत संतकबीरनगर पुलिस को एक पुराने मामले में न्यायिक सफलता मिली है। एएसजे/एफटीसी द्वितीय, जनपद संतकबीरनगर की अदालत ने युवती को बहला-फुसलाकर भगाने और दुष्कर्म के मामले में दोषसिद्ध अभियुक्त मुजीबुर्रहमान पुत्र शौकत अली, निवासी कोहरियावां, थाना दुधारा को अलग-अलग धाराओं में सजा सुनाई है।

पुलिस के अनुसार, अदालत ने अभियुक्त को धारा 376 भादवि के तहत 10 वर्ष के कठोर कारावास और 75 हजार रुपये अर्थदंड, जबकि धारा 366 के तहत 7 वर्ष के कारावास और 40 हजार रुपये अर्थदंड तथा धारा 506 के तहत 2 वर्ष के कठोर कारावास और 5 हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया है। इस प्रकार विभिन्न धाराओं में कुल 1.20 लाख रुपये का अर्थदंड लगाया गया है।

2012 में दर्ज हुआ था मुकदमा

पुलिस के मुताबिक, यह मामला करीब 12 वर्ष पुराना है। वादी हजारीलाल निवासी कोहरियावां ने 14 फरवरी 2012 को थाना दुधारा में अपनी पुत्री को बहला-फुसलाकर भगा ले जाने और दुष्कर्म किए जाने के संबंध में प्रार्थना पत्र दिया था। इसके आधार पर अभियुक्त मुजीबुर्रहमान के विरुद्ध मुकदमा अपराध संख्या 129/2012 में धारा 366, 376 और 506 भादवि के तहत अभियोग दर्ज किया गया।

पुलिस के अनुसार मामले की विवेचना तत्कालीन थानाध्यक्ष अशोक कुमार यादव द्वारा की गई और साक्ष्यों के आधार पर आरोपपत्र न्यायालय में प्रेषित किया गया। लंबी न्यायिक प्रक्रिया के बाद अब अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और सुनवाई के आधार पर अभियुक्त को दोषसिद्ध करते हुए सजा सुनाई है।

तीन धाराओं में अलग-अलग सजा

अदालत के आदेश के अनुसार धारा 366 भादवि के तहत अभियुक्त को सात वर्ष के कारावास के साथ 40 हजार रुपये अर्थदंड दिया गया है। अर्थदंड अदा नहीं करने पर एक वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।

वहीं धारा 376 भादवि के तहत 10 वर्ष का कठोर कारावास और 75 हजार रुपये अर्थदंड लगाया गया है। अर्थदंड के भुगतान में चूक होने पर एक वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।

धारा 506 भादवि के तहत अभियुक्त को दो वर्ष के कठोर कारावास और 5 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई गई है। इस अर्थदंड के भुगतान में भी चूक होने पर एक वर्ष का अतिरिक्त कारावास निर्धारित किया गया है।

पुलिस पैरवी की सफलता, लेकिन लंबी न्यायिक प्रक्रिया भी सवाल

पुलिस ने इस फैसले को “ऑपरेशन कन्विक्शन” के तहत गुणवत्तापूर्ण विवेचना और प्रभावी अभियोजन पैरवी का परिणाम बताया है। निश्चित रूप से गंभीर अपराधों में दोषसिद्धि होना पीड़ित पक्ष को न्याय दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

हालांकि, इस मामले का दूसरा पहलू भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। 2012 में दर्ज हुए मामले में 2026 में फैसला आना न्यायिक प्रक्रिया की लंबी अवधि को भी सामने लाता है। अपराध की गंभीरता को देखते हुए पीड़ित पक्ष को न्याय मिलने में लगने वाला समय स्वयं एक महत्वपूर्ण सार्वजनिक मुद्दा है। पुलिस की विवेचना और अभियोजन की प्रभावशीलता के साथ यह भी जरूरी है कि गंभीर आपराधिक मामलों का निस्तारण यथासंभव समयबद्ध तरीके से हो।

फिलहाल न्यायालय के फैसले के बाद पुलिस ने इसे अपनी अभियोजन रणनीति की उपलब्धि बताया है। वहीं मामले में अंतिम न्यायिक स्थिति और आगे की किसी अपील की जानकारी संबंधित न्यायालयी रिकॉर्ड के अनुसार ही स्पष्ट होगी।

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