- पुरानी रंजिश और विवाद के बीच हुई हत्या; पुलिस के अनुसार पूछताछ में आरोपी ने वार करने की बात स्वीकार की
(Report and edited by-Mohammad Sayeed Pathan)
संतकबीरनगर। बेलहरकला थाना क्षेत्र में 15 सितंबर को हुई हत्या के मामले में पुलिस ने घटना के करीब 24 घंटे के भीतर एक आरोपी को गिरफ्तार करने का दावा किया है। पुलिस के अनुसार आरोपी रामदास गुप्ता को जंगल दशहर मोड़, पिपरी के पास से गिरफ्तार किया गया और उसकी निशानदेही पर घटना में इस्तेमाल की गई धारदार-नुकीली परखी बरामद की गई।
पुलिस की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक कार्रवाई पुलिस अधीक्षक संदीप कुमार मीना के निर्देशन, अपर पुलिस अधीक्षक सुशील कुमार सिंह के मार्गदर्शन और क्षेत्राधिकारी मेंहदावल सर्वदवन सिंह के पर्यवेक्षण में की गई।
इलाज के दौरान हुई थी मौत
पुलिस के अनुसार 15 सितंबर को मृतक राजू की पत्नी मंजू देवी ने शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि पुरानी रंजिश को लेकर रामदास गुप्ता ने नुकीले धारदार हथियार से राजू के पेट में कई वार किए।
घायल राजू को एंबुलेंस से सीएचसी मेंहदावल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने इलाज के दौरान उसे मृत घोषित कर दिया। शिकायत के आधार पर बेलहरकला थाने में मु0अ0सं0 278/2026, धारा 103(1) बीएनएस और 3(2)(v) एससी/एसटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया।
पूछताछ में सामने आई विवाद की वजह
पुलिस का कहना है कि पूछताछ के दौरान गिरफ्तार आरोपी ने बताया कि राजू की पत्नी मंजू और उसके भाई महेंद्र के बीच पैसों के लेन-देन को लेकर विवाद था। इसी बात को लेकर 15 सितंबर की शाम राजू, उसकी पत्नी मंजू और आरोपी के बीच कथित तौर पर गाली-गलौज और मारपीट हुई।
पुलिस के मुताबिक आरोपी ने पूछताछ में झगड़े के दौरान अनाज निकालने में इस्तेमाल होने वाली नुकीली-धारदार परखी से राजू के सीने और पेट पर वार करने की बात बताई है।
हालांकि, पूछताछ में आरोपी द्वारा कही गई बात जांच का हिस्सा है और इसे अदालत में सिद्ध तथ्य नहीं माना जा सकता। मामले में घटना के अन्य पहलुओं, प्रत्यक्षदर्शियों और उपलब्ध साक्ष्यों की जांच महत्वपूर्ण होगी।
24 घंटे में गिरफ्तारी, लेकिन जांच की अगली चुनौती बड़ी
हत्या जैसे गंभीर मामले में 24 घंटे के भीतर गिरफ्तारी और कथित हथियार की बरामदगी पुलिस जांच की गति को दर्शाती है। लेकिन किसी मामले में गिरफ्तारी और बरामदगी के बाद भी जांच की अहम जिम्मेदारी खत्म नहीं होती। पुलिस को घटनाक्रम, विवाद की वास्तविक वजह, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान, चिकित्सकीय साक्ष्य और बरामद हथियार समेत अन्य साक्ष्यों का वैज्ञानिक तरीके से परीक्षण करना होगा।
खासकर ऐसे मामलों में जहां पुरानी रंजिश और पारिवारिक विवाद की बात सामने आ रही हो, घटनाक्रम की कड़ियों को साक्ष्यों से जोड़ना जांच की विश्वसनीयता के लिए महत्वपूर्ण रहेगा।
पुलिस टीम को 15 हजार रुपये का पुरस्कार
गिरफ्तारी और बरामदगी में थानाध्यक्ष बेलहरकला सर्वेश कुमार, उपनिरीक्षक राजेश कुमार दूबे, आरक्षी रोहित कुमार, सतीश कुमार त्रिपाठी, ओमप्रकाश चौरसिया तथा सर्विलांस सेल के आरक्षी अमरजीत मौर्य और पीयूष कुमार गुप्ता शामिल रहे।
पुलिस अधीक्षक संदीप कुमार मीना ने टीम का उत्साहवर्धन करने के लिए 15 हजार रुपये के नकद पुरस्कार की घोषणा की है।
अब मामले में पुलिस की त्वरित गिरफ्तारी के बाद अगला महत्वपूर्ण चरण साक्ष्यों का वैज्ञानिक परीक्षण और न्यायिक प्रक्रिया है, जिससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि घटना की पूरी परिस्थितियां क्या थीं और आरोपों की पुष्टि किन साक्ष्यों से होती है।

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