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संतकबीरनगर पुलिस की तकनीकी निगरानी ने, मोबाइल स्वामियों के चेहरे पर लौटाई मुस्कान,


  • करीब 30 लाख रुपये कीमत के 131 मोबाइल बरामद, लखनऊ से बेंगलुरु और बिहार तक पहुंची पुलिस की तकनीकी पड़ताल

(Report and edited by-Mohammad Sayeed Pathan)

संतकबीरनगर। मोबाइल फोन गुम होने के बाद अक्सर लोगों के सामने दोहरी परेशानी खड़ी हो जाती है—एक तरफ महंगा उपकरण हाथ से चला जाता है तो दूसरी तरफ उसमें मौजूद निजी संपर्क और जरूरी डेटा को लेकर चिंता बनी रहती है। ऐसे मामलों में संतकबीरनगर पुलिस की तकनीकी निगरानी ने कई मोबाइल स्वामियों के लिए राहत की खबर दी है। पुलिस ने विभिन्न थाना क्षेत्रों से गुम हुए 131 मोबाइल फोन बरामद किए हैं, जिनकी अनुमानित कीमत करीब 30 लाख रुपये बताई गई है।

पुलिस के अनुसार यह कार्रवाई पुलिस अधीक्षक संदीप कुमार मीना के निर्देशन, अपर पुलिस अधीक्षक सुशील कुमार सिंह के मार्गदर्शन और क्षेत्राधिकारी सर्विलांस सेल/यातायात अमित कुमार के पर्यवेक्षण में की गई। सर्विलांस सेल प्रभारी रजनीश राय के नेतृत्व में गठित टीम ने तकनीकी माध्यमों की मदद से गुम मोबाइलों की तलाश की।

IMEI और तकनीकी ट्रेसिंग से मिली कामयाबी

मोबाइल बरामदगी में CEIR पोर्टल और CCTNS प्रणाली का इस्तेमाल किया गया। पुलिस ने गुम मोबाइलों से संबंधित IMEI, सिम और ट्रेसबिलिटी संबंधी तकनीकी जानकारी का विश्लेषण करते हुए उनकी लोकेशन और उपयोग से जुड़े सुरागों को खंगाला।

इस पूरी कार्रवाई का महत्वपूर्ण पहलू यह है कि बरामदगी केवल संतकबीरनगर जिले तक सीमित नहीं रही। पुलिस के मुताबिक लखनऊ, बेंगलुरु, बिहार समेत अलग-अलग राज्यों और शहरों से भी गुम मोबाइलों को ट्रेस किया गया। इसके लिए संबंधित राज्यों की पुलिस के साथ समन्वय स्थापित किया गया।

131 मोबाइल, लेकिन असली सफलता कितने मोबाइल मालिकों तक पहुंचने में?

पुलिस द्वारा जारी आंकड़े निश्चित रूप से बड़ी बरामदगी की तस्वीर पेश करते हैं, लेकिन इस कार्रवाई का मानवीय पक्ष इससे भी महत्वपूर्ण है। मोबाइल आज केवल बातचीत का साधन नहीं रह गया है। उसमें लोगों के संपर्क, फोटो, दस्तावेज और कई निजी जानकारियां सुरक्षित रहती हैं। ऐसे में गुम मोबाइल की वापसी संबंधित व्यक्ति के लिए आर्थिक राहत के साथ-साथ भावनात्मक संतोष भी देती है।

पुलिस के अनुसार मोबाइल बरामद होने की सूचना मिलने पर संबंधित स्वामियों ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए पुलिस टीम के प्रति आभार जताया।

अलग-अलग थानों की टीमों ने निभाई भूमिका

बरामदगी में सर्विलांस सेल के साथ कोतवाली खलीलाबाद, दुधारा, महिला थाना, धनघटा, महुली, मेंहदावल, बखिरा, बेलहरकला, धर्मसिंहवा महिला थाना और एएचटी इकाई के कर्मचारियों ने भूमिका निभाई।

जारी विवरण के अनुसार खलीलाबाद से 29, महुली से 26, दुधारा से 18, बेलहरकला से 18, एएचटी से 15, मेंहदावल से 10 और बखिरा से 10 मोबाइल समेत अन्य थानों से भी मोबाइल बरामद किए गए।

CEIR की जानकारी आम लोगों के लिए भी उपयोगी

मोबाइल गुम या चोरी होने की स्थिति में पुलिस ने आम लोगों से CEIR पोर्टल के माध्यम से शिकायत दर्ज कराने की अपील की है। इसके जरिए मोबाइल के IMEI को ब्लॉक और उपलब्ध तकनीकी जानकारी के आधार पर ट्रेस कराने की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है।

इसके लिए आधार कार्ड, मोबाइल खरीद का बिल यदि उपलब्ध हो, थाने में दर्ज गुमशुदगी अथवा एफआईआर की प्रति, मोबाइल धारक का विवरण, मोबाइल नंबर, IMEI नंबर और मोबाइल का मॉडल नंबर जैसे विवरण उपयोगी होते हैं।

तकनीक के साथ जागरूकता भी जरूरी

इस कार्रवाई से यह संकेत मिलता है कि गुम मोबाइलों की बरामदगी में तकनीकी प्रणालियों का इस्तेमाल अब महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। हालांकि आम मोबाइल उपयोगकर्ताओं के स्तर पर भी सावधानी जरूरी है। मोबाइल गुम होते ही देरी किए बिना थाने में शिकायत दर्ज कराना और IMEI संबंधी जानकारी सुरक्षित रखना बरामदगी की संभावना को बेहतर कर सकता है।

पुलिस अधीक्षक संदीप कुमार मीना ने मोबाइल बरामदगी करने वाली पुलिस टीम का उत्साहवर्धन करने के लिए 25 हजार रुपये के नकद पुरस्कार की घोषणा की है।

131 मोबाइल की बरामदगी से कई परिवारों के चेहरों पर मुस्कान लौटी है, लेकिन इस कार्रवाई का व्यापक संदेश यही है कि मोबाइल गुम होने के बाद उसे वापस पाना पूरी तरह असंभव नहीं है। समय पर शिकायत, IMEI की जानकारी और तकनीकी ट्रेसिंग इस प्रक्रिया में महत्वपूर्ण कड़ी बन सकती है।

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