संतकबीरनगर । सोशल मीडिया और डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल कर लोगों को ब्लैकमेल कर ठगी करने वाले साइबर अपराधियों के खिलाफ संतकबीरनगर पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। साइबर थाना संतकबीरनगर ने एक युवती को कथित रूप से ब्लैकमेल कर करीब 5 लाख 6 हजार 580 रुपये की धनराशि ठगने के मामले में फतेहपुर जनपद के दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने दोनों आरोपियों को पूछताछ और उपलब्ध डिजिटल एवं अभिलेखीय साक्ष्यों के आधार पर गिरफ्तार कर न्यायालय के समक्ष पेश करने के लिए रवाना किया।
पुलिस के अनुसार यह कार्रवाई पुलिस अधीक्षक संतकबीरनगर संदीप कुमार मीना के निर्देशन में साइबर अपराधों की रोकथाम एवं अपराधियों के विरुद्ध चलाए जा रहे अभियान के तहत की गई।
निजी तस्वीरें वायरल करने की धमकी का आरोप
पुलिस को दी गई शिकायत के मुताबिक, पीड़ित पक्ष की पुत्री को 25 अगस्त 2025 से 04 अक्टूबर 2025 के बीच अलग-अलग नाम और मोबाइल नंबरों के माध्यम से कथित तौर पर ब्लैकमेल किया गया। शिकायत में आरोप लगाया गया कि युवती को डराया-धमकाया गया तथा उसके निजी/आपत्तिजनक फोटो वायरल करने की धमकी देकर लगातार धनराशि की मांग की गई।
शिकायत के अनुसार भय और दबाव के कारण युवती ने अलग-अलग माध्यमों से रकम भेजी। पुलिस ने जांच के दौरान कुल ₹5,06,580 की साइबर ठगी से जुड़े तथ्यों की पड़ताल की।
मामले की गंभीरता को देखते हुए साइबर थाना संतकबीरनगर में मु0अ0सं0 09/2026 दर्ज किया गया। पुलिस के मुताबिक प्रारंभ में भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4), 351(2) तथा 66डी आईटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर विवेचना शुरू की गई।
डिजिटल साक्ष्यों से संदिग्ध खाताधारकों तक पहुंची पुलिस
विवेचना के दौरान पुलिस ने बैंकिंग लेनदेन, अभिलेखीय साक्ष्यों और डिजिटल तथ्यों का विश्लेषण किया। जांच में सामने आए संदिग्ध खाताधारकों रामू मौर्या और राजेन्द्र प्रसाद, दोनों निवासी जनपद फतेहपुर, को पूछताछ के लिए साइबर थाना बुलाया गया।
पुलिस का कहना है कि विस्तृत पूछताछ और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर दोनों की कथित संलिप्तता सामने आने के बाद मुकदमे में धारा 308(2) बीएनएस की बढ़ोतरी की गई और दोनों को अभियुक्त बनाते हुए गिरफ्तार कर लिया गया।
दोनों आरोपियों से मोबाइल और नकदी बरामद
पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपी रामू मौर्या पुत्र स्वर्गीय जीत पाल के कब्जे से ₹400 नकद और एक मोबाइल फोन, जबकि राजेन्द्र प्रसाद पुत्र गजराज के कब्जे से ₹1,100 नकद और एक मोबाइल फोन बरामद किया गया।
दोनों आरोपियों को नियमानुसार न्यायालय रवाना किया गया है।
अभी जांच में कई अहम कड़ियां जुड़ना बाकी
पुलिस ने स्पष्ट किया है कि मामले की विवेचना अभी जारी है। अपराध में इस्तेमाल किए गए मोबाइल फोन, सिम कार्ड और अन्य डिजिटल उपकरणों की बरामदगी, ठगी की रकम के आगे के प्रवाह तथा अंतिम लाभार्थी का पता लगाना बाकी है।
इसके अलावा अन्य संदिग्ध बैंक खातों, यूपीआई आईडी और डिजिटल ट्रांजेक्शन का सत्यापन किया जा रहा है। पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि इस कथित साइबर ठगी में कोई अन्य व्यक्ति या संगठित नेटवर्क शामिल है अथवा नहीं।
समीक्षात्मक नजरिया: गिरफ्तारी से आगे नेटवर्क तक पहुंचना होगी चुनौती
यह मामला साइबर अपराध के बदलते तौर-तरीकों की गंभीर तस्वीर पेश करता है। निजी तस्वीरों और डिजिटल सामग्री को सार्वजनिक करने की धमकी देकर पीड़ित को आर्थिक दबाव में लाना साइबर अपराध का गंभीर स्वरूप है। ऐसे मामलों में पीड़ित अक्सर सामाजिक बदनामी और मानसिक दबाव के कारण शिकायत करने में भी देर कर सकते हैं।
संतकबीरनगर साइबर पुलिस की कार्रवाई में डिजिटल और बैंकिंग साक्ष्यों का इस्तेमाल महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में सामने आया है। हालांकि, दो आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद भी जांच का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा अभी बाकी है। ठगी की रकम किन खातों में गई, उसका अंतिम लाभार्थी कौन रहा और कथित ब्लैकमेलिंग में इस्तेमाल किए गए मोबाइल नंबरों तथा डिजिटल उपकरणों के पीछे कौन-कौन लोग थे—इन सवालों के जवाब जांच को आगे बढ़ाने में अहम होंगे।
यदि पुलिस धनराशि के पूरे डिजिटल ट्रेल का पता लगाकर अन्य संदिग्ध खातों और कथित सहयोगियों तक पहुंचती है, तो यह कार्रवाई महज दो गिरफ्तारियों तक सीमित न रहकर साइबर ठगी के पूरे नेटवर्क को उजागर करने में प्रभावी साबित हो सकती है।
गिरफ्तार करने वाली टीम
कार्रवाई में उपनिरीक्षक रमेश यादव, उपनिरीक्षक ललित कांत यादव, हेड कांस्टेबल हिन्दे आजाद, कांस्टेबल रामप्रवेश मद्धेशिया, कांस्टेबल शिवम यादव, कांस्टेबल राघवेन्द्र कुमार सिंह, कांस्टेबल सौरभ यादव और कांस्टेबल धीरेन्द्र कुमार प्रसाद शामिल रहे।
महत्वपूर्ण नोट: पुलिस द्वारा लगाए गए आरोपों और आरोपियों की कथित संलिप्तता की अंतिम पुष्टि न्यायालय में प्रस्तुत साक्ष्यों एवं न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर होगी।

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