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मिशन शक्ति 5.0: नाबालिग से दु#ष्क#र्म के मामले में बाल अपचारी पुलिस अभिरक्षा में, किशोर न्यायालय भेजा गया


(Report -Mohammad Sayeed Pathan Editor Mission Sandesh Hindi News Paper)

संतकबीरनगर। मिशन शक्ति अभियान फेज-5.0 के तहत महिला एवं बाल अपराधों के विरुद्ध चलाए जा रहे अभियान में थाना धनघटा पुलिस ने नाबालिग से दु#ष्क#र्म के मामले में एक बाल अपचारी को पुलिस अभिरक्षा में लेकर किशोर न्यायालय भेजने की कार्रवाई की है। पुलिस की त्वरित कार्रवाई को महिला एवं बाल अपराधों के मामलों में संवेदनशीलता के साथ आगे बढ़ाए गए कदम के रूप में देखा जा रहा है।

पुलिस के अनुसार, पुलिस अधीक्षक संतकबीरनगर संदीप कुमार मीना के निर्देशन, अपर पुलिस अधीक्षक सुशील कुमार सिंह के मार्गदर्शन तथा क्षेत्राधिकारी धनघटा अभयनाथ मिश्रा के पर्यवेक्षण में अपराध एवं अपराधियों के विरुद्ध अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में थाना धनघटा पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 2 सितंबर 2026 को थाना धनघटा में पंजीकृत मुकदमा अपराध संख्या 621/2026 से संबंधित बाल अपचारी को पुलिस अभिरक्षा में लिया।

पुलिस के मुताबिक, मामले में धारा 64(2)(m), 351(2) बीएनएस तथा धारा 5L, 5J(ii)/6 पॉक्सो एक्ट के तहत अभियोग दर्ज है। पुलिस अभिरक्षा में लिए गए बाल अपचारी को आवश्यक विधिक कार्रवाई के बाद किशोर न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करने के लिए रवाना किया गया।

शिकायत के अगले दिन पुलिस की कार्रवाई

पुलिस के अनुसार, 1 सितंबर 2026 को नाबालिग की ओर से उसके पिता द्वारा थाना धनघटा में प्रार्थना पत्र देकर अपनी पुत्री के साथ दुष्कर्म किए जाने का आरोप लगाया गया था। शिकायत के आधार पर संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर पुलिस ने जांच एवं साक्ष्य संकलन की प्रक्रिया शुरू की।

महिला एवं बाल अपराध की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस ने कार्रवाई को प्राथमिकता दी और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर 2 सितंबर को बाल अपचारी को पुलिस अभिरक्षा में लेकर किशोर न्यायालय भेज दिया।

कार्रवाई के साथ बाल अधिकारों का संरक्षण भी अहम

नाबालिग से जुड़े यौन अपराधों के मामलों में त्वरित कार्रवाई महत्वपूर्ण है, लेकिन इसके साथ ही बाल अपचारी के अधिकारों, नाबालिग पीड़िता की पहचान की गोपनीयता और किशोर न्याय प्रक्रिया का पालन भी जरूरी है। ऐसे मामलों में आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होगी।

पुलिस टीम

बाल अपचारी को निरुद्ध करने वाली पुलिस टीम में प्रभारी निरीक्षक दिलीप सिंह, वरिष्ठ उपनिरीक्षक राजेश कुमार दूबे तथा कांस्टेबल रामप्रवेश राजभर शामिल रहे।

नोट: नाबालिग पीड़िता की पहचान उजागर करने वाली कोई भी जानकारी प्रकाशित करना उचित नहीं है। साथ ही बाल अपचारी की पहचान भी सार्वजनिक न करना बाल न्याय संबंधी प्रावधानों की दृष्टि से महत्वपूर्ण है।

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