Top News

ऑपरेशन मुस्कान: खलीलाबाद पुलिस ने नाबालिग बालिका और उसकी बुआ को दूसरे राज्य से सकुशल बरामद किया

(Report Mohammad Sayeed Pathan Editor Mission Sandesh Hindi News Paper)

संतकबीरनगर। गुमशुदा एवं लापता बच्चों की सकुशल बरामदगी के लिए चलाए जा रहे ऑपरेशन मुस्कान अभियान के तहत थाना कोतवाली खलीलाबाद पुलिस और सर्विलांस टीम को महत्वपूर्ण सफलता मिली है। पुलिस ने घर से लापता हुई एक नाबालिग बालिका और उसकी बुआ को दूसरे राज्य से सकुशल बरामद कर उनके परिजनों के सुपुर्द कर दिया।

पुलिस के अनुसार, यह कार्रवाई पुलिस अधीक्षक संतकबीरनगर संदीप कुमार मीना के निर्देशन में, क्षेत्राधिकारी खलीलाबाद प्रियम राजशेखर पाण्डेय के पर्यवेक्षण तथा प्रभारी निरीक्षक थाना कोतवाली खलीलाबाद जयप्रकाश दूबे के नेतृत्व में की गई।

21 अगस्त को घर से निकली थीं दोनों

पुलिस के मुताबिक, 21 अगस्त 2026 को नाबालिग बालिका और उसकी बुआ घर से बाहर गई थीं। काफी समय बीतने के बाद भी दोनों वापस नहीं लौटीं तो परिजनों ने अपने स्तर से काफी तलाश की, लेकिन उनका कोई सुराग नहीं मिला।

इसके बाद 22 अगस्त 2026 को थाना कोतवाली खलीलाबाद में प्रार्थना पत्र दिया गया। पुलिस ने मामले में मु0अ0सं0 782/2026, धारा 137(2) बीएनएस के तहत अभियोग दर्ज करते हुए दोनों की तलाश के लिए पुलिस टीम गठित की।

मोबाइल साथ नहीं था, फिर भी तकनीकी साक्ष्यों से मिला सुराग

इस मामले की खास बात यह रही कि दोनों अपने साथ मोबाइल फोन लेकर नहीं गई थीं। इसके बावजूद पुलिस और सर्विलांस टीम ने उपलब्ध तकनीकी साक्ष्यों एवं अन्य सूचनाओं का विश्लेषण करते हुए तलाश जारी रखी।

लगातार प्रयासों के दौरान पुलिस टीम को दोनों की मौजूदगी दूसरे राज्य में होने की जानकारी मिली। इसके बाद आवश्यक कार्रवाई करते हुए दोनों को वहां से सकुशल बरामद कर लिया गया।

पुलिस की पूछताछ में दोनों के घर से नाराज होकर दूसरे राज्य चले जाने की बात सामने आने की जानकारी दी गई है। आवश्यक विधिक कार्रवाई पूरी करने के बाद पुलिस ने दोनों को सुरक्षित उनके परिजनों को सौंप दिया।

त्वरित कार्रवाई के साथ तकनीकी दक्षता भी बनी मददगार

मामले में पुलिस की सफलता केवल त्वरित कार्रवाई तक सीमित नहीं रही, बल्कि मोबाइल फोन उपलब्ध नहीं होने के बावजूद तकनीकी साक्ष्यों का विश्लेषण कर सुराग हासिल करना भी महत्वपूर्ण पहलू रहा। इससे स्पष्ट होता है कि गुमशुदगी के मामलों में पारंपरिक तलाश के साथ तकनीकी संसाधनों का प्रभावी इस्तेमाल पुलिस जांच को गति दे सकता है।

हालांकि, ऐसे मामलों में बरामदगी के बाद भी पुलिस के लिए यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण रहता है कि संबंधित नाबालिग की सुरक्षा, पहचान की गोपनीयता और आवश्यक विधिक प्रक्रिया का पूरी तरह पालन हो।

बरामदगी टीम

सकुशल बरामदगी में उपनिरीक्षक विनय कुमार पाण्डेय, चौकी प्रभारी तामेश्वरनाथ, आरक्षी मनीष प्रभात तथा महिला आरक्षी नीतू की भूमिका रही।

समीक्षात्मक निष्कर्ष: ऑपरेशन मुस्कान के तहत हुई यह कार्रवाई इस बात का उदाहरण है कि गुमशुदगी के मामलों में समय पर प्राथमिकी, लगातार पुलिस प्रयास और तकनीकी साक्ष्यों के समन्वित इस्तेमाल से लापता लोगों की सकुशल बरामदगी संभव है। खासकर नाबालिगों से जुड़े मामलों में ऐसी त्वरित कार्रवाई उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने की दृष्टि से महत्वपूर्ण है।

Post a Comment

Previous Post Next Post
Mission Sandesh
Mission Sandesh