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सीआरसी गोरखपुर के 8वें स्थापना दिवस पर दिव्यांगजनों और वरिष्ठ नागरिकों को सहायक उपकरण वितरित

Report- Mohammad Sayeed Pathan Editor Mission Sandesh Hindi News Paper 

गोरखपुर। पूर्वांचल के दिव्यांगजनों को गुणवत्तापूर्ण पुनर्वास सेवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से स्थापित सीआरसी गोरखपुर ने 2 सितंबर 2026 को अपने स्थापना के आठ वर्ष पूरे कर लिए। स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में दिव्यांगजनों एवं वरिष्ठ नागरिकों को उनकी आवश्यकता के अनुरूप सहायक उपकरणों का वितरण किया गया। कार्यक्रम ने जहां दिव्यांगजनों के प्रति संस्थान की सेवा प्रतिबद्धता को रेखांकित किया, वहीं पिछले आठ वर्षों में उपलब्ध कराई जा रही विभिन्न Rehabilitation Services की उपयोगिता भी सामने आई।

सीआरसी गोरखपुर के निदेशक श्री जितेंद्र यादव ने बताया कि संस्थान की स्थापना 2 सितंबर 2018 को हुई थी। इसका मूल उद्देश्य पूर्वांचल क्षेत्र के दिव्यांगजनों को उनके घर के नजदीक गुणवत्तापूर्ण Disability Rehabilitation Services उपलब्ध कराना था। उन्होंने कहा कि स्थापना के बाद से सीआरसी लगातार इसी लक्ष्य की दिशा में कार्य कर रहा है और विभिन्न आयु वर्ग तथा विभिन्न प्रकार की दिव्यांगता वाले लोगों को उनकी जरूरत के अनुसार सेवाएं उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है।

एक ही परिसर में कई Rehabilitation Services

सीआरसी गोरखपुर की प्रमुख विशेषता यह है कि यहां दिव्यांगजनों को विभिन्न क्षेत्रों से जुड़ी सेवाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध कराने का प्रयास किया गया है। संस्थान में CDEIC, PMDK, दिव्यांगजनों के लिए Free Coaching, वयस्क दिव्यांगजनों के लिए Vocational Training, Special Education, Speech Therapy, Physiotherapy, Psychological Counselling, Developmental Medicine और Occupational Therapy जैसी सेवाएं निःशुल्क उपलब्ध कराई जा रही हैं।

इन सेवाओं का उद्देश्य केवल दिव्यांगता से जुड़ी समस्या का उपचार करना नहीं, बल्कि दिव्यांगजनों की Functional Ability, Communication Skills, Mobility, Education, Vocational Skills और Social Participation को बेहतर बनाना भी है। इस दृष्टि से Rehabilitation को केवल चिकित्सा तक सीमित न रखकर Education, Skill Development और सामाजिक सहभागिता से जोड़ना महत्वपूर्ण माना जा सकता है।

प्रतिदिन 200 से अधिक Follow-up का दावा

सीआरसी निदेशक के अनुसार, संस्थान में प्रतिदिन 200 से अधिक दिव्यांगजन Follow-up Services का लाभ ले रहे हैं। यह संख्या संस्थान की सेवाओं की मांग और निरंतरता को दर्शाती है। हालांकि, इतनी बड़ी संख्या में लाभार्थियों को नियमित और गुणवत्तापूर्ण सेवाएं उपलब्ध कराना अपने आप में एक चुनौती भी है। ऐसे में भविष्य में बढ़ती जरूरतों के अनुरूप मानव संसाधन, तकनीकी सुविधाओं और Outreach Services को मजबूत करना संस्थान के लिए महत्वपूर्ण होगा।

सहायक उपकरणों से बढ़ेगी आत्मनिर्भरता

स्थापना दिवस पर दिव्यांगजनों और वरिष्ठ नागरिकों को Assistive Devices का वितरण कार्यक्रम का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा। सहायक उपकरण Mobility, Communication अथवा दैनिक जीवन की गतिविधियों में सहायता प्रदान कर लाभार्थियों की Independence और Quality of Life बेहतर करने में उपयोगी साबित हो सकते हैं।

विशेष रूप से वरिष्ठ नागरिकों के लिए उपयुक्त Assistive Devices उनकी दैनिक गतिविधियों में सुविधा देने के साथ-साथ उनकी सुरक्षित और स्वतंत्र जीवनशैली को बढ़ावा दे सकते हैं। वहीं दिव्यांगजनों के लिए उनकी आवश्यकता के अनुरूप उपकरण शिक्षा, रोजगार और सामाजिक गतिविधियों में भागीदारी बढ़ाने में सहायक हो सकते हैं।

AIIMS गोरखपुर के MBBS छात्रों ने किया भ्रमण

स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित गतिविधियों के अलावा AIIMS गोरखपुर के MBBS छात्रों ने भी सीआरसी गोरखपुर का भ्रमण किया। इस दौरान छात्रों ने संस्थान की विभिन्न सेवाओं और Rehabilitation से संबंधित कार्यप्रणाली की जानकारी प्राप्त की।

बताया गया कि MBBS छात्रों ने सीआरसी की सेवाओं को अधिक से अधिक जरूरतमंद लोगों तक पहुंचाने और दूर-दराज के क्षेत्रों में इसके बारे में जागरूकता बढ़ाने की दिशा में अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की। मेडिकल Education से जुड़े विद्यार्थियों का Rehabilitation Centre का Exposure भविष्य में उन्हें दिव्यांगजनों की जरूरतों को अधिक समग्रता से समझने में मदद कर सकता है।

आठ वर्षों की यात्रा में Outreach पर जोर जरूरी

सीआरसी गोरखपुर की आठ वर्षों की यात्रा को देखा जाए तो संस्थान ने दिव्यांगजनों के लिए Medical, Therapeutic, Educational और Vocational Services को एक साथ उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास किए हैं। बड़ी संख्या में Follow-up लाभार्थियों का जुड़ाव इन सेवाओं की आवश्यकता को भी सामने लाता है।

हालांकि, पूर्वांचल जैसे व्यापक भौगोलिक क्षेत्र में बड़ी आबादी तक Rehabilitation Services पहुंचाने के लिए केवल संस्थान में सेवाएं उपलब्ध कराना पर्याप्त नहीं होगा। Outreach Programmes, Early Identification, Community-Based Rehabilitation, Digital Counselling और ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता अभियान को और मजबूत किए जाने से उन दिव्यांगजनों तक भी सेवाएं पहुंचाई जा सकती हैं, जो दूरी, आर्थिक कठिनाई या जानकारी के अभाव में नियमित रूप से सीआरसी तक नहीं पहुंच पाते।

स्थापना दिवस पर सहायक उपकरण वितरण और AIIMS गोरखपुर के छात्रों का भ्रमण इस बात का संकेत है कि दिव्यांगजनों के पुनर्वास को Healthcare, Education और Community Support से जोड़कर आगे बढ़ाने की आवश्यकता है। सीआरसी गोरखपुर के लिए आठवें स्थापना दिवस का अवसर उपलब्धियों के साथ-साथ आने वाले वर्षों में सेवाओं के विस्तार और उनकी पहुंच को और व्यापक बनाने की दिशा में संकल्प लेने का भी अवसर है।

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