(Report and edited by Mohammad Sayeed Pathan)
संतकबीरनगर। सांथा विकासखंड के अमरहा स्थित गो-आश्रय स्थल का जिलाधिकारी आलोक कुमार ने गुरुवार को स्थलीय निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान गोवंशों के लिए भूसा, चारा, दाना-चोकर, पानी और देखरेख सहित अन्य व्यवस्थाओं का जायजा लिया गया। मौके पर कुल 54 गोवंश संरक्षित पाए गए।
जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को गोवंशों के लिए भूसा, हरा चारा, दाना-चोकर और पानी की पर्याप्त उपलब्धता लगातार बनाए रखने के निर्देश दिए। गोवंशों की देखरेख के लिए दो केयरटेकर कार्यरत पाए गए, जिन्होंने मानदेय मिलने की जानकारी दी। गो-आश्रय स्थल पर सीसीटीवी और विद्युत व्यवस्था भी ठीक पाई गई।
व्यवस्था ठीक, लेकिन पहुंच मार्ग और परिसर में सुधार की जरूरत
निरीक्षण में गो-आश्रय स्थल का एप्रोच मार्ग बेहतर स्थिति में नहीं पाया गया। जिलाधिकारी ने मार्ग को दुरुस्त कराने के साथ ही परिसर में इंटरलॉकिंग कराने के निर्देश दिए।
गो-आश्रय स्थल में केवल पशुओं के लिए भोजन और पानी की उपलब्धता ही पर्याप्त नहीं है। बारिश, कीचड़, जलभराव और आवागमन की स्थिति भी गोवंशों की देखभाल तथा कर्मचारियों के कामकाज को प्रभावित कर सकती है। ऐसे में एप्रोच मार्ग और परिसर को दुरुस्त कराने के निर्देश को बुनियादी सुविधा सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा सकता है।
रूटीन निरीक्षण पर जोर
जिलाधिकारी ने मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी और संबंधित खंड विकास अधिकारी को गो-आश्रय स्थलों का नियमित निरीक्षण करने के निर्देश दिए। इसका उद्देश्य केवल किसी एक दिन की व्यवस्था देखना नहीं, बल्कि गोवंशों के लिए चारा-पानी, स्वास्थ्य और साफ-सफाई जैसी सुविधाओं की निरंतर निगरानी सुनिश्चित करना है।
अब महत्वपूर्ण यह होगा कि इन निर्देशों का अनुपालन कागजों तक सीमित रहता है या गो-आश्रय स्थल की व्यवस्थाओं में नियमित रूप से दिखाई भी देता है।
किसान कल्याण केंद्र में कर्मचारी नहीं मिले
गो-आश्रय स्थल के बगल में बने किसान कल्याण केंद्र का निरीक्षण भी जिलाधिकारी ने किया। यहां निरीक्षण के दौरान कृषि विभाग का कोई कर्मचारी उपस्थित नहीं मिला। इस पर जिलाधिकारी ने उप कृषि निदेशक को निर्देश दिया कि कृषि विभाग के कर्मचारी सप्ताह में कम से कम दो दिन किसान कल्याण केंद्र पर अनिवार्य रूप से उपस्थित रहें।
किसान कल्याण केंद्र का उद्देश्य किसानों को कृषि संबंधी जानकारी और उनकी समस्याओं के समाधान में मदद करना है। ऐसे में केंद्र पर संबंधित विभाग के कर्मचारी की अनुपस्थिति उसकी उपयोगिता पर स्वाभाविक सवाल खड़े करती है। अब सप्ताह में दो दिन कर्मचारियों की उपस्थिति सुनिश्चित होने के बाद यह देखना भी जरूरी होगा कि किसानों को वास्तव में कितनी सेवाएं और तकनीकी जानकारी उपलब्ध हो रही है।
केंद्र में विद्युत कनेक्शन सुनिश्चित कराने के निर्देश भी उप कृषि निदेशक को दिए गए।
पंचायत भवन संचालित मिला
निरीक्षण के दौरान गो-आश्रय स्थल के पास बने पंचायत भवन का भी जायजा लिया गया। पंचायत भवन संचालित और क्रियाशील पाया गया।
कुल मिलाकर अमरहा के निरीक्षण में गो-आश्रय स्थल पर कई व्यवस्थाएं संतोषजनक मिलीं, लेकिन एप्रोच मार्ग, परिसर में इंटरलॉकिंग और नियमित निगरानी की आवश्यकता सामने आई। वहीं किसान कल्याण केंद्र में कृषि विभाग के कर्मचारी की अनुपस्थिति ने यह सवाल भी खड़ा किया कि ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों के लिए बनाए गए ऐसे केंद्रों का संचालन जमीनी स्तर पर कितना प्रभावी है।
अब प्रशासन के सामने चुनौती निरीक्षण के दौरान दिए गए निर्देशों को समयबद्ध तरीके से लागू कराने और उनकी नियमित समीक्षा करने की है, ताकि गो-आश्रय स्थल और किसान कल्याण केंद्र दोनों अपने निर्धारित उद्देश्य के अनुरूप प्रभावी रूप से काम कर सकें।




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