Top News

डीएम का निरीक्षण : कस्तूरबा गांधी विद्यालय खजुरी में 86 में सिर्फ 37 बच्चे मिले, एक शिक्षिका भी गैरहाजिर; भवन और मरम्मत खर्च की जांच के निर्देश


(Report and edited by-Mohammad Sayeed Pathan)

संतकबीरनगर । सांथा विकासखंड के कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय खजुरी में गुरुवार को जिलाधिकारी आलोक कुमार के निरीक्षण में शिक्षा व्यवस्था और विद्यालय की बुनियादी सुविधाओं से जुड़े कई ऐसे तथ्य सामने आए, जिन पर तत्काल सुधार की जरूरत महसूस की गई। पंजीकृत 86 छात्राओं के सापेक्ष निरीक्षण के दौरान महज 37 बच्चे उपस्थित मिले। वहीं तीन पूर्णकालिक शिक्षिकाओं के सापेक्ष एक शिक्षिका अनुपस्थित पाई गई।

निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने छात्राओं से सीधे बातचीत कर पठन-पाठन की स्थिति और शिक्षण कार्य के बारे में जानकारी ली। बच्चों को पढ़ाई के प्रति प्रेरित भी किया गया। इस दौरान यह तथ्य सामने आया कि विद्यालय में अंग्रेजी विषय का कोई शिक्षक उपलब्ध नहीं है। जिलाधिकारी ने इस कमी को गंभीरता से लेते हुए जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए।


86 में 37 की उपस्थिति, सवाल सिर्फ संख्या का नहीं

आवासीय विद्यालय में बच्चों की उपस्थिति सामान्य विद्यालयों की तुलना में विशेष महत्व रखती है। ऐसे में 86 पंजीकृत बच्चों में केवल 37 की मौजूदगी ने उपस्थिति व्यवस्था और निगरानी पर सवाल खड़े किए हैं। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अनुपस्थित बच्चों के संबंध में विद्यालय स्तर पर क्या फॉलोअप किया जा रहा है और उनकी अनुपस्थिति के कारणों की नियमित समीक्षा होती है या नहीं।

शौचालय और भवन की स्थिति पर भी उठे सवाल

निरीक्षण के दौरान विद्यालय के शौचालय और भवन की स्थिति संतोषजनक नहीं पाई गई। जिलाधिकारी ने लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता को टीम गठित कर भवन की तकनीकी जांच कराने और रिपोर्ट उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है।

इससे भी महत्वपूर्ण पहलू यह रहा कि विद्यालय भवन की मरम्मत के लिए करीब दो वर्ष पूर्व उपलब्ध कराई गई धनराशि के खर्च की जांच के निर्देश दिए गए हैं। इससे यह सवाल भी सामने आता है कि यदि मरम्मत के लिए धनराशि उपलब्ध कराई गई थी तो वर्तमान में भवन और शौचालय की स्थिति अपेक्षित स्तर पर क्यों नहीं है। जांच रिपोर्ट से ही स्पष्ट होगा कि धनराशि का उपयोग किस प्रकार और किस स्तर पर किया गया।


निरीक्षण पंजिका में भी सामने आई कमी

जिलाधिकारी ने उपस्थिति पंजिका की जांच के दौरान पाया कि जुलाई माह में हुए निरीक्षण से संबंधित कोई टिप्पणी दर्ज नहीं थी। इस पर जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को जांच कर रिपोर्ट उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया।

यह बिंदु इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि निरीक्षण का उद्देश्य केवल कमियां दर्ज करना नहीं, बल्कि पूर्व में सामने आई कमियों पर हुई कार्रवाई की निगरानी भी है। यदि निरीक्षण के बाद टिप्पणियां और अनुपालन दर्ज नहीं होंगे तो निगरानी व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

निर्माणाधीन उच्चीकृत विद्यालय की गुणवत्ता पर भी नजर

विद्यालय परिसर के बगल में निर्माणाधीन उच्चीकृत विद्यालय का भी जिलाधिकारी ने संज्ञान लिया। संबंधित अधिकारियों को निर्माण कार्य गुणवत्तापूर्ण और निर्धारित समयसीमा में पूरा कराने के निर्देश दिए गए।

कुल मिलाकर खजुरी कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय का निरीक्षण केवल औपचारिक निरीक्षण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें छात्र उपस्थिति, शिक्षकों की उपलब्धता, विषयवार शिक्षण, भवन की स्थिति, स्वच्छता, पूर्व में उपलब्ध कराई गई मरम्मत धनराशि और निरीक्षण व्यवस्था जैसे कई महत्वपूर्ण पहलू सामने आए।

अब इन निर्देशों की असली परीक्षा उनके अनुपालन में होगी। खासकर मरम्मत धनराशि की जांच, भवन की तकनीकी रिपोर्ट और बच्चों की कम उपस्थिति के कारणों पर होने वाली कार्रवाई यह तय करेगी कि निरीक्षण के बाद विद्यालय की व्यवस्था में कितना वास्तविक सुधार आता है।

Post a Comment

Previous Post Next Post
Mission Sandesh
Mission Sandesh