गोरखपुर। बहुदिव्यांग बच्चों की शिक्षा और उनके समावेशी अधिगम को प्रभावी बनाने के उद्देश्य से समेकित क्षेत्रीय केंद्र (CRC), गोरखपुर की ओर से “बहुदिव्यांग बच्चों के अधिगम की विशेषताएं” विषय पर एक दिवसीय Online CRE (Continuing Rehabilitation Education) Programme का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में देश के विभिन्न हिस्सों से जुड़े 126 प्रतिभागियों ने Online माध्यम से सहभागिता की।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य Multiple Disabilities वाले बच्चों की Learning Needs, Communication Skills, Social Interaction और Mobility से जुड़ी चुनौतियों को समझना तथा उनके अनुरूप Teaching-Learning Strategies विकसित करने के लिए Rehabilitation Professionals और शिक्षकों को आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराना रहा।
अलग-अलग होती है अधिगम की प्रक्रिया
कार्यक्रम में बतौर Resource Persons डॉ. विजय गुप्ता, श्री अमित कुमार, श्री राजेश कुमार यादव और श्री मंजेश कुमार ने बहुदिव्यांग बच्चों के अधिगम से संबंधित विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से जानकारी दी।
वक्ताओं ने कहा कि बहुदिव्यांग बच्चों को सामान्य बच्चों की तुलना में Communication, Socialization और Mobility से संबंधित अतिरिक्त चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। इन चुनौतियों का सीधा प्रभाव उनकी Learning Process पर पड़ता है। ऐसे में सभी बच्चों के लिए एक जैसी Teaching Method अपनाने के बजाय उनकी व्यक्तिगत क्षमता, आवश्यकता और कठिनाइयों को ध्यान में रखते हुए शिक्षा की रणनीति तैयार करना अधिक प्रभावी हो सकता है।
विशेषज्ञों ने जोर दिया कि बहुदिव्यांग बच्चों के लिए Individualized Learning Approach को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। पाठ्यक्रम और शिक्षण सामग्री तैयार करते समय आवश्यक Curriculum Adaptation तथा Accessibility का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए, ताकि बच्चे अपनी क्षमता के अनुरूप सीखने की प्रक्रिया में प्रभावी ढंग से भाग ले सकें।
Curriculum में Adaptation और Accessibility जरूरी
कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों ने बताया कि बहुदिव्यांग बच्चों के लिए तैयार किए जाने वाले Curriculum में उनकी जरूरत के अनुसार आवश्यक परिवर्तन किए जाने चाहिए। Teaching Material, Classroom Activities और Assessment Methods को भी बच्चे की क्षमता और जरूरत के अनुरूप Adapt किया जाना चाहिए।
इसके साथ ही शिक्षा के वातावरण को अधिक Accessible and Inclusive बनाने पर भी बल दिया गया। विशेषज्ञों के अनुसार, केवल पाठ्यक्रम में बदलाव पर्याप्त नहीं है, बल्कि बच्चे को Communication, Mobility और Social Participation के लिए आवश्यक Support System उपलब्ध कराना भी जरूरी है।
CRE Programme से Rehabilitation Professionals को लाभ
सीआरसी गोरखपुर के निदेशक श्री जितेंद्र यादव ने कार्यक्रम की सफलता पर शुभकामनाएं देते हुए कहा कि Rehabilitation Professionals की आवश्यकता और उनकी Professional Development को ध्यान में रखते हुए सीआरसी गोरखपुर की ओर से लगातार Online एवं Offline CRE Programmes आयोजित किए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से Professionals को नई जानकारी, आधुनिक Rehabilitation Practices और विभिन्न प्रकार की Disabilities से संबंधित नवीनतम दृष्टिकोणों से परिचित होने का अवसर मिलता है। इससे दिव्यांगजनों के लिए उपलब्ध Rehabilitation Services की गुणवत्ता को और बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।
प्रमाण-पत्र के नवीनीकरण में CRE की महत्वपूर्ण भूमिका
गौरतलब है कि CRE Programme Rehabilitation Professionals के लिए Continuing Education का महत्वपूर्ण माध्यम है। ऐसे कार्यक्रमों में सहभागिता के माध्यम से Professionals अपने ज्ञान और कौशल को अपडेट करने के साथ-साथ निर्धारित प्रक्रिया के तहत अपने Rehabilitation Certificate के Renewal के लिए आवश्यक Continuing Education से जुड़े Credits प्राप्त कर सकते हैं।
कार्यक्रम में देश के विभिन्न क्षेत्रों से प्रतिभागियों की भागीदारी यह दर्शाती है कि Disability Rehabilitation के क्षेत्र में Online Training और Continuing Education की उपयोगिता लगातार बढ़ रही है। विशेष रूप से ऐसे विषय, जो बहुदिव्यांग बच्चों की Individual Learning Needs से सीधे जुड़े हैं, शिक्षकों और Rehabilitation Professionals के लिए व्यावहारिक रूप से उपयोगी साबित हो सकते हैं।
कार्यक्रम का Coordination सुश्री आस्था यादव ने किया। आयोजन के दौरान विशेषज्ञों ने विषय से जुड़े महत्वपूर्ण बिंदुओं पर प्रतिभागियों का मार्गदर्शन किया और बहुदिव्यांग बच्चों के लिए अधिक Inclusive, Accessible और Child-Centric Learning Environment विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

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