(Report and edited by-Mohammad Sayeed Pathan)
संतकबीरनगर,। जिला सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में जिलाधिकारी आलोक कुमार ने जिले में सड़क दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए संबंधित विभागों को कई अहम निर्देश दिए। कलेक्ट्रेट सभागार में हुई बैठक में खास तौर पर एनएचएआई मार्गों की बदहाली, अवैध कट, गलत दिशा में वाहन चलाने, नो-पार्किंग, ब्लैक स्पॉट और स्कूली वाहनों की फिटनेस जैसे मुद्दे सामने आए।
बैठक में पिछली बैठकों में दिए गए निर्देशों पर विभागों द्वारा की गई कार्रवाई की समीक्षा भी की गई। हालांकि सड़क सुरक्षा के मामले में असली चुनौती केवल निर्देश जारी करने की नहीं, बल्कि उनके धरातल पर समयबद्ध और लगातार अनुपालन की है।
झाड़ियों, टूटी पटरियों और अवैध कट पर नजर
जिलाधिकारी ने एनएचएआई के प्रतिनिधि को सड़क किनारे उगी झाड़ियों की सफाई कराने के निर्देश दिए। इसके साथ ही पटरी और नालियों की मरम्मत तथा अवैध कट बंद कराने से जुड़े बिंदुओं की समीक्षा की गई।
सड़क किनारे झाड़ियां और खराब पटरी केवल सौंदर्य या रखरखाव का मामला नहीं हैं, बल्कि कई स्थानों पर ये वाहन चालकों की दृश्यता और सुरक्षित आवागमन को प्रभावित कर सकती हैं। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि निर्देश के बाद इन समस्याओं का समाधान कितनी जल्दी होता है।
गलत साइड और नो-पार्किंग पर चलेगा अभियान
डीएम ने परिवहन विभाग और यातायात पुलिस को गलत साइड तथा नो-पार्किंग में वाहन खड़े करने वालों के खिलाफ नियमित कार्रवाई के निर्देश दिए। साथ ही चालान की संख्या भी प्रदर्शित करने को कहा गया।
यह निर्देश इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि केवल चालान की कार्रवाई पर्याप्त नहीं मानी जा सकती। किस क्षेत्र में कितने वाहन गलत साइड में पकड़े गए, किन स्थानों पर नो-पार्किंग की समस्या लगातार बनी हुई है और कार्रवाई के बाद स्थिति में कितना सुधार हुआ—इसका सार्वजनिक आंकड़ा सड़क सुरक्षा अभियान की प्रभावशीलता को ज्यादा स्पष्ट करेगा।
ट्रैक्टर-ट्रॉलियों पर रिफ्लेक्टर, दुर्घटनाओं का खतरा कम करने की कोशिश
बैठक में मालवाहक वाहनों, विशेषकर ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के पीछे रिफ्लेक्टर रेडियम पट्टी लगाने के लिए विशेष अभियान चलाने का निर्देश दिया गया। रात के समय बिना पर्याप्त रिफ्लेक्टर वाले धीमी गति के वाहनों को पीछे से आने वाले वाहनों द्वारा समय पर देख पाना मुश्किल हो सकता है।
ऐसे में अभियान की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि कितने वाहनों पर वास्तव में रेडियम पट्टी लगाई गई और कितने वाहनों के खिलाफ कार्रवाई हुई।
प्रमुख चौराहों पर ट्रैफिक लाइट और संकेतक लगाने के निर्देश
जिले के प्रमुख चौराहों पर यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए ट्रैफिक लाइट लगाने तथा सुरक्षा संबंधी संकेतकों को स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करने के निर्देश दिए गए। ब्लैक स्पॉट पर टेबल टॉप रम्बल स्ट्रिप बनाने की बात भी कही गई।
इसके साथ ही हेलमेट और सीट बेल्ट के इस्तेमाल को लेकर जागरूकता अभियान चलाने तथा नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ चालान और विधिक कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए।
स्कूली वाहनों की फिटनेस पर विशेष जोर
बैठक का सबसे महत्वपूर्ण पहलू स्कूली वाहनों की सुरक्षा से जुड़ा रहा। जिलाधिकारी ने परिवहन विभाग को जिले के सभी स्कूली वाहनों का शत-प्रतिशत सत्यापन कराने के निर्देश दिए।
परमिट और फिटनेस की नियमित जांच करने तथा अनफिट पाए जाने वाले वाहनों का चालान कर उन्हें बंद कराने को कहा गया। डीएम ने स्पष्ट किया कि किसी भी विद्यालय में एक भी अनफिट वाहन संचालित नहीं होना चाहिए।
यह निर्देश बच्चों की सुरक्षा के लिहाज से बेहद अहम है। अब निगरानी का वास्तविक पैमाना यह होगा कि सत्यापन अभियान में कितने वाहन जांचे गए, कितने फिट पाए गए और कितने वाहनों के खिलाफ कार्रवाई हुई।
सवाल सिर्फ निर्देशों का नहीं, अमल का है
जिला सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए हैं, लेकिन सड़क सुरक्षा की चुनौती केवल बैठकों और निर्देशों से खत्म नहीं होगी। ब्लैक स्पॉट, अवैध कट, अतिक्रमण, नो-पार्किंग, गलत साइड, खराब सड़क किनारे और अनफिट स्कूली वाहनों पर लगातार कार्रवाई ही इन निर्देशों की वास्तविक सफलता तय करेगी।
जरूरत इस बात की भी है कि संबंधित विभाग समयबद्ध कार्रवाई की रिपोर्ट सार्वजनिक करें, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि बैठक में लिए गए फैसलों का सड़क पर कितना असर पड़ा और दुर्घटनाओं वाले संवेदनशील स्थानों की स्थिति में कितना सुधार आया।
बैठक में अपर जिलाधिकारी सत्य प्रकाश, अधिशासी अभियंता लोक निर्माण विभाग आरके पांडेय, एआरटीओ प्रियंवदा सिंह, अधिशासी अभियंता विद्युत राजेश कुमार, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी अमित कुमार सिंह, यातायात निरीक्षक परमहंस, सहायक अभियंता लोक निर्माण विमल कुमार, नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी अवधेश भारती सहित संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।

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