- निर्माण कार्यों की गुणवत्ता से समझौता नहीं, धन मिलने के बाद तय समय में परियोजनाएं पूरी करने के निर्देश; फैमिली आईडी और सेवा संकल्प अभियान की भी हुई समीक्षा
(Report and edited by-Mohammad Sayeed Pathan)
संतकबीरनगर, । जिले में विकास योजनाओं और निर्माण परियोजनाओं की प्रगति को लेकर जिलाधिकारी आलोक कुमार ने विभागीय अधिकारियों और कार्यदायी संस्थाओं को लक्ष्य के अनुरूप काम तेज करने के साथ-साथ गुणवत्ता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। कलेक्ट्रेट सभागार में हुई समीक्षा बैठक में सीएम डैशबोर्ड पर प्रदर्शित रैंकिंग, प्राप्तांक और ग्रेडिंग के आधार पर विभागवार योजनाओं एवं निर्माण कार्यों की समीक्षा की गई।
बैठक में मुख्य विकास अधिकारी जयकेश त्रिपाठी समेत विभिन्न विभागों के अधिकारी और कार्यदायी संस्थाओं के प्रतिनिधि मौजूद रहे।
रैंकिंग सुधारने की कवायद, लेकिन जमीनी प्रगति पर भी नजर जरूरी
समीक्षा के दौरान जिन विभागों और कार्यों की प्रगति अपेक्षाकृत धीमी पाई गई, उनके विभागाध्यक्षों को प्रदर्शन सुधारने के निर्देश दिए गए। डीएम ने अधिकारियों से कहा कि योजनाओं और निर्माण कार्यों में गुणात्मक प्रगति लाई जाए, ताकि जिले की सीएम डैशबोर्ड रैंकिंग बेहतर बनी रहे।
हालांकि विकास कार्यों की सफलता का आकलन केवल डैशबोर्ड पर प्राप्तांक या रैंकिंग से नहीं किया जा सकता। असली सवाल यह है कि योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक कितना पहुंच रहा है और निर्माण परियोजनाएं तय समय, लागत और निर्धारित गुणवत्ता के साथ धरातल पर कितनी प्रभावी हैं। ऐसे में विभागवार रैंकिंग के साथ वास्तविक उपलब्धियों और कमियों की निगरानी भी महत्वपूर्ण होगी।
निर्माण परियोजनाओं में गुणवत्ता पर विशेष जोर
डीएम ने कार्यदायी संस्थाओं को निर्माण कार्यों की गुणवत्ता में किसी भी प्रकार की कमी नहीं होने देने की चेतावनी दी। जिन परियोजनाओं के लिए धनराशि उपलब्ध हो चुकी है, उन्हें निर्धारित समय सीमा में पूरा कराने के निर्देश दिए गए।
साथ ही सभी निर्माणाधीन परियोजनाओं की लक्ष्य के सापेक्ष प्रगति, गुणवत्ता और वर्तमान स्थिति की जानकारी संबंधित अधिकारियों एवं कार्यदायी संस्थाओं से ली गई।
डीएम ने यह भी निर्देश दिया कि निर्माण कार्यों की प्रगति नियमित रूप से सीएमआईएस पोर्टल पर अपडेट की जाए। पूर्ण हो चुकी परियोजनाओं को संबंधित विभागों को हैंडओवर करने को भी कहा गया।
यहां प्रशासन के सामने दोहरी चुनौती है—एक ओर समय से परियोजनाएं पूरी करना और दूसरी ओर जल्दबाजी में गुणवत्ता से समझौता न होने देना। खासकर सार्वजनिक धन से बनने वाली परियोजनाओं में निर्माण की गुणवत्ता और उपयोगिता की स्वतंत्र जांच भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
विलंबित परियोजनाओं पर बढ़ेगा दबाव
बैठक में विलंबित परियोजनाओं की भी समीक्षा की गई। डीएम ने संबंधित विभागों और कार्यदायी संस्थाओं को ऐसी परियोजनाओं में तेजी लाकर उन्हें पूरा कराने के निर्देश दिए।
इसके अलावा सीएम डैशबोर्ड पर प्रदर्शित फ्लैगशिप प्रोजेक्ट्स की आंकड़ेवार समीक्षा की गई। अधिकारियों से लक्ष्य और उपलब्धि का विवरण लेते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए।
फैमिली आईडी पर भी प्रशासन का फोकस
बैठक में फैमिली आईडी बनाने की विकासखंडवार प्रगति की समीक्षा की गई। डीएम ने खंड विकास अधिकारियों को निर्देश दिया कि अपने क्षेत्रों और न्याय पंचायतों में ऐसे परिवारों की पहचान कराई जाए, जिनके पास राशन कार्ड नहीं है और उनकी फैमिली आईडी शत-प्रतिशत बनवाई जाए।
शहरी क्षेत्रों में नगर पालिका और नगर पंचायत के अधिशासी अधिकारियों को भी फैमिली आईडी निर्माण में प्रगति बढ़ाने के निर्देश दिए गए।
यह कार्य केवल आंकड़ा पूरा करने तक सीमित न रहे, बल्कि वास्तविक पात्र परिवारों की पहचान और उन्हें सरकारी योजनाओं से जोड़ने के उद्देश्य से किया जाए—तभी इसका व्यापक लाभ सामने आएगा।
योजनाओं से कोई पात्र व्यक्ति वंचित न रहे
डीएम ने सभी विभागीय अधिकारियों को अपने-अपने विभाग की विकास और जनकल्याणकारी योजनाओं की नियमित समीक्षा करने को कहा। उन्होंने निर्देश दिया कि यदि कहीं कोई कमी सामने आती है या कोई पात्र व्यक्ति योजना के लाभ से वंचित है तो उसका समयबद्ध समाधान कराया जाए।
आईसीडीएस, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य, समाज कल्याण, शिक्षा, युवा कल्याण सहित अन्य विभागों की योजनाओं की भी समीक्षा की गई और लक्ष्य के अनुरूप प्रगति एवं गुणवत्ता बढ़ाने के निर्देश दिए गए।
सेवा संकल्प अभियान को लेकर अधिकारियों को जिम्मेदारी
समीक्षा बैठक में 17 सितंबर से 17 अक्टूबर 2026 तक चलाए जा रहे सेवा संकल्प अभियान की सफलता पर भी चर्चा हुई। डीएम ने अधिकारियों को अपने-अपने विभाग से संबंधित योजनाओं, कार्यों और दायित्वों का निष्ठापूर्वक निर्वहन करने के निर्देश दिए।
अब निगरानी का असली पैमाना होगा परिणाम
बैठक में निर्देशों की लंबी सूची सामने आई है, लेकिन प्रशासन के सामने अब सबसे महत्वपूर्ण चुनौती निर्देशों को वास्तविक परिणाम में बदलने की है। सीएम डैशबोर्ड पर जिले की रैंकिंग सुधरना निश्चित रूप से प्रशासनिक प्रदर्शन का एक संकेतक हो सकता है, लेकिन सड़क, भवन, स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार और जनकल्याणकारी योजनाओं की वास्तविक स्थिति का आकलन तभी होगा जब इनके लाभ और गुणवत्ता का असर आम नागरिकों तक दिखाई दे।
इसलिए आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि धीमी गति वाली परियोजनाओं में कितना सुधार हुआ, कितनी परियोजनाएं समय पर पूरी हुईं, निर्माण की गुणवत्ता की कितनी जांच हुई और कितने पात्र परिवार वास्तव में योजनाओं से जुड़े। यही आंकड़े प्रशासन के दावों और जमीनी हकीकत के बीच की तस्वीर साफ करेंगे।
बैठक में जिला विकास अधिकारी रुक्मणी वर्मा, उपायुक्त श्रम एवं रोजगार प्रभात द्विवेदी, जिला अर्थ एवं संख्या अधिकारी अजय श्रीवास्तव, जिला युवा कल्याण अधिकारी डॉ. सलोनी गर्ग, अधिशासी अभियंता लोक निर्माण आरके पांडेय, अधिशासी अभियंता विद्युत राजेश कुमार, उपायुक्त उद्योग विनोद कुमार वर्मा, उप निदेशक कृषि डॉ. राकेश कुमार सिंह, जिला कृषि अधिकारी डॉ. सर्वेश यादव, जिला उद्यान अधिकारी समुद्रगुप्त मल्ल, जिला प्रोबेशन अधिकारी सतीश चंद्र, पर्यटन अधिकारी विकास नारायण सहित संबंधित विभागों एवं कार्यदायी संस्थाओं के प्रतिनिधि मौजूद रहे।

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