Report by- Mohammad Sayeed Pathan Editor Mission Sandesh
लखनऊ/संतकबीरनगर । विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों के बीच जिले की राजनीति में दल-बदल की गतिविधियां दिखाई देने लगी हैं। शुक्रवार को लखनऊ स्थित प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में संतकबीरनगर से जुड़े कई नेताओं और कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार इनमें समाजवादी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी से जुड़े रहे नेता व कार्यकर्ता शामिल हैं।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय की मौजूदगी में यूपी कांग्रेस के जॉइनिंग प्रभारी नितिन शर्मा ने नए सदस्यों को पार्टी की सदस्यता दिलाई। कांग्रेस में शामिल होने वालों में सपा छोड़कर आए डॉ. शमीम अंसारी, मोहम्मद शोएब अंसारी, नजरूल हसन अंसारी और मो. सलीम समेत अन्य नाम शामिल बताए गए हैं। वहीं भाजपा से शिवानंद तिवारी, गोपाल तिवारी, शिवराम कनौजिया, आदित्य तिवारी, राम शरण चौधरी, शिव शंकर पासवान और श्याम सुंदर चतुर्वेदी समेत कई लोगों के शामिल होने की जानकारी सामने आई है।
दावों के बीच संगठन विस्तार की चुनौती
कांग्रेस जिला अध्यक्ष प्रवीण चंद्र पांडेय ने कहा कि बड़ी संख्या में लोग कांग्रेस से जुड़ रहे हैं और उन्होंने 2027 में कांग्रेस की सरकार बनने का दावा किया। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने भी युवाओं और विभिन्न वर्गों के लोगों के कांग्रेस से जुड़ने की बात कही। इन बयानों को पार्टी नेताओं के राजनीतिक दावों के रूप में देखा जाना चाहिए, न कि चुनावी परिणाम के पूर्वानुमान के रूप में।
दरअसल, चुनावी राजनीति में किसी नेता या कार्यकर्ता का पार्टी बदलना अपने आप में संगठन की जमीनी ताकत का अंतिम प्रमाण नहीं माना जा सकता। महत्वपूर्ण यह होगा कि नए शामिल हुए नेताओं की स्थानीय सक्रियता कितनी है, वे अपने क्षेत्रों में कितना संगठन खड़ा कर पाते हैं और आने वाले महीनों में कांग्रेस का जिला संगठन इन नए चेहरों को किस तरह की जिम्मेदारी देता है।
सपा-भाजपा से आए नेताओं के मायने क्या?
संतकबीरनगर में सपा और भाजपा से जुड़े लोगों का कांग्रेस में शामिल होना स्थानीय राजनीतिक समीकरणों के लिहाज से चर्चा का विषय जरूर है। हालांकि इसका वास्तविक प्रभाव आगामी चुनाव में कितना होगा, यह स्थानीय संगठन, उम्मीदवारों, गठबंधन की स्थिति और मतदाताओं के रुझान सहित कई कारकों पर निर्भर करेगा।
ऐसे में फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि क्या कांग्रेस में शामिल हुए ये नेता केवल सदस्यता तक सीमित रहेंगे या आने वाले समय में पार्टी के बूथ और क्षेत्रीय संगठन को भी सक्रिय रूप से मजबूत करेंगे?
राजनीतिक दलों के लिए अब चुनौती केवल नए सदस्यों को जोड़ना नहीं, बल्कि उन्हें संगठनात्मक गतिविधियों में प्रभावी ढंग से सक्रिय करना भी होगी।

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