कल्यानपुर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर समाजवादी पार्टी से जुड़े स्थानीय कार्यकर्ताओं ने इसे “राष्ट्रीय बेरोजगारी दिवस” के रूप में मनाते हुए रोजगार के मुद्दे पर विरोध-प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं ने ताली, थाली और घंटी बजाकर पैदल मार्च निकाला तथा युवाओं के लिए रोजगार और सरकारी भर्तियों से जुड़ी मांगें उठाईं।
प्रदर्शनकारियों का कहना था कि शिक्षित और कुशल युवाओं के सामने रोजगार की चुनौती बनी हुई है। उनके अनुसार विभिन्न सरकारी विभागों में रिक्त पद होने के बावजूद भर्ती प्रक्रिया अपेक्षित गति से नहीं हो रही है। उन्होंने सरकार से रिक्त सरकारी पदों को जल्द भरने तथा भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की।
इस दौरान मुलायम सिंह यूथ ब्रिगेड के जिलाध्यक्ष ठाकुर सौरभ सिंह, छात्र सभा के प्रदेश उपाध्यक्ष अभिषेक कटियार, राष्ट्रीय सचिव छात्र सभा पंकज यादव, प्रदेश सचिव यूथ ब्रिगेड नसीम खान और जिला महासचिव यूथ ब्रिगेड परवेज मंसूरी समेत अन्य कार्यकर्ता मौजूद रहे।
रोजगार को लेकर उठाई गईं तीन प्रमुख मांगें
प्रदर्शनकारियों ने सरकार के सामने तीन प्रमुख मांगें रखीं। इनमें सरकारी विभागों में रिक्त सभी पदों को जल्द भरना, संविदा एवं ठेका व्यवस्था के स्थान पर स्थायी सरकारी रोजगार को बढ़ावा देना तथा सेना में नियमित भर्ती सुनिश्चित करने की मांग शामिल रही।
इसके अलावा प्रदर्शनकारियों ने हर वर्ष बड़ी संख्या में रोजगार उपलब्ध कराने और भर्ती परीक्षाओं में कथित धांधली तथा पेपर लीक पर प्रभावी रोक लगाने की मांग भी उठाई।
“दो करोड़ नौकरी” के दावे पर तथ्य क्या कहते हैं?
प्रदर्शन के दौरान वर्ष 2014 से जुड़ा “हर साल दो करोड़ नौकरी” का दावा भी उठाया गया। हालांकि उपलब्ध भाजपा के 2014 के आधिकारिक घोषणापत्र में रोजगार एवं उद्यमिता को उच्च प्राथमिकता देने, रोजगार सृजन वाले क्षेत्रों को बढ़ावा देने और कौशल विकास पर जोर देने की बात दर्ज है; घोषणापत्र में “हर साल दो करोड़ नौकरियां” देने का स्पष्ट उल्लेख नहीं मिलता।
इसलिए इस राजनीतिक दावे को उसी संदर्भ में देखना जरूरी है। रोजगार को लेकर सरकार की नीतियों और उनके वास्तविक परिणामों का आकलन अलग-अलग रोजगार संकेतकों और समयावधि के आंकड़ों से किया जाना अधिक उपयुक्त होगा।
बेरोजगारी के आंकड़े क्या बताते हैं?
केंद्र सरकार के सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) के PLFS 2025 के अनुसार 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के शिक्षित व्यक्तियों के लिए सामान्य स्थिति के आधार पर बेरोजगारी दर 6.5 प्रतिशत रही, जबकि 15–29 वर्ष आयु वर्ग में यह दर 9.9 प्रतिशत दर्ज की गई।
वहीं MoSPI के जुलाई 2026 के मासिक PLFS आंकड़ों के अनुसार 15 वर्ष और उससे अधिक आयु वर्ग में अखिल भारतीय बेरोजगारी दर 5.1 प्रतिशत थी। यह आंकड़ा वर्तमान रोजगार बाजार की तस्वीर का एक संकेतक है, लेकिन अकेले इससे रोजगार की गुणवत्ता, वेतन, सरकारी नौकरियों की उपलब्धता या युवाओं की रोजगार संबंधी सभी समस्याओं का आकलन नहीं किया जा सकता।
मुद्दा राजनीतिक प्रदर्शन से आगे रोजगार नीति का भी
प्रधानमंत्री के जन्मदिन को बेरोजगारी दिवस के रूप में मनाना विपक्षी राजनीति द्वारा रोजगार के मुद्दे को उठाने का एक तरीका है। दूसरी ओर, रोजगार के वास्तविक हालात पर बहस के लिए सरकारी आंकड़ों, भर्ती की स्थिति, परीक्षा प्रक्रिया, रिक्त पदों और निजी क्षेत्र में रोजगार सृजन जैसे अलग-अलग पहलुओं को साथ देखना जरूरी है।
प्रदर्शन के माध्यम से युवाओं की ओर से उठाई गई मांगों में सरकारी रिक्तियों को भरने, स्थायी रोजगार और भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता जैसे मुद्दे शामिल हैं। अब इन मांगों पर सरकार की ओर से क्या कदम उठाए जाते हैं और विभिन्न स्तरों पर लंबित भर्तियों की स्थिति क्या है, यह आगे की सार्वजनिक बहस का महत्वपूर्ण हिस्सा रहेगा।
मिशन संदेश | न्यूज़ पोर्टल
नोट: प्रदर्शन से संबंधित दावे संबंधित समाजवादी पार्टी कार्यकर्ताओं के वक्तव्यों पर आधारित हैं। रोजगार संबंधी आंकड़े केंद्र सरकार के MoSPI/PLFS के उपलब्ध आधिकारिक आंकड़ों से लिए गए हैं।

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