(Report and edited by-Mohammad Sayeed Pathan)
संतकबीरनगर,। कृषि क्षेत्र में बदलती तकनीक और वैज्ञानिक पद्धतियों से किसानों को जोड़ने की कवायद के तहत संतकबीरनगर से किसानों का एक दल सात दिवसीय अंतर्राज्यीय कृषक प्रशिक्षण एवं भ्रमण कार्यक्रम के लिए रवाना किया गया। जिलाधिकारी आलोक कुमार ने गुरुवार को कलेक्ट्रेट परिसर से किसानों के दल को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।
प्रशासन की ओर से इस पहल का उद्देश्य किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों की व्यावहारिक जानकारी उपलब्ध कराना और उन्हें खेती में नवाचार अपनाने के लिए प्रेरित करना बताया गया है। जिलाधिकारी ने किसानों को प्रतिष्ठित कृषि संस्थानों में प्रशिक्षण लेकर वहां से प्राप्त तकनीकी जानकारी को अपने खेतों में प्रयोग करने की शुभकामनाएं दीं।
इन संस्थानों का करेंगे भ्रमण
प्रशिक्षण एवं भ्रमण के दौरान किसान भारतीय गेहूं अनुसंधान संस्थान, भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान, राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान और गुरुकुल प्राकृतिक खेती प्रक्षेत्र का भ्रमण करेंगे। यहां किसानों को फसल उत्पादन, उन्नत कृषि तकनीक, डेयरी तथा प्राकृतिक खेती से जुड़ी जानकारियां मिलने की उम्मीद है।
उप कृषि निदेशक डॉ. राकेश कुमार सिंह के अनुसार, आत्मा योजना का उद्देश्य किसानों को आधुनिक एवं वैज्ञानिक कृषि तकनीकों से जोड़ना, छोटे किसानों की आय बढ़ाने में मदद करना तथा उन्हें अधिक आत्मनिर्भर बनाना है। योजना के माध्यम से पारंपरिक खेती के साथ आधुनिक और जैविक खेती को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया जा रहा है।
प्रशिक्षण के बाद क्या बदलेगा खेती का तरीका?
किसानों को प्रशिक्षण और भ्रमण पर भेजना निश्चित रूप से कृषि ज्ञान को खेत तक पहुंचाने की दिशा में एक प्रयास है, लेकिन इसकी वास्तविक सफलता का आकलन भ्रमण पूरा होने के बाद किसानों द्वारा अपनाई गई तकनीकों और उसके परिणामों से ही किया जा सकेगा।
सवाल यह भी है कि प्रशिक्षण से लौटने वाले किसानों को आगे तकनीकी मार्गदर्शन, गुणवत्तापूर्ण बीज, कृषि उपकरण, बाजार की उपलब्धता और उत्पादन की लागत कम करने जैसी सुविधाएं कितनी प्रभावी ढंग से मिल पाएंगी। यदि प्रशिक्षण में मिली जानकारी को स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप खेतों तक पहुंचाने के लिए कृषि विभाग लगातार निगरानी और फॉलोअप करे, तो ऐसे कार्यक्रम किसानों के लिए अधिक उपयोगी साबित हो सकते हैं।
कृषि क्षेत्र में बढ़ती लागत, मौसम की अनिश्चितता और बाजार की चुनौतियों के बीच किसानों को केवल नई तकनीक की जानकारी देना पर्याप्त नहीं है। तकनीक के साथ व्यावहारिक प्रशिक्षण, स्थानीय स्तर पर विशेषज्ञ सलाह और उत्पाद के बेहतर बाजार तक पहुंच भी जरूरी है। ऐसे में इस सात दिवसीय भ्रमण कार्यक्रम के बाद किसानों के अनुभव और उसके वास्तविक प्रभाव पर नजर रखना महत्वपूर्ण होगा।
फिलहाल किसानों का दल प्रशिक्षण के लिए रवाना हो चुका है। अब देखना यह होगा कि प्रतिष्ठित कृषि संस्थानों से हासिल ज्ञान संतकबीरनगर के खेतों तक किस हद तक पहुंचता है और किसानों की खेती एवं आय में उसका कितना व्यावहारिक लाभ दिखाई देता है।




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