आर.पी.एम.एस. इंटर कॉलेज में जागरूकता कार्यक्रम, ओटीपी-पासवर्ड साझा न करने और संदिग्ध लिंक से दूर रहने की अपील
रिपोर्ट मोहम्मद सईद पठान एडिटर मिशन संदेश
संतकबीरनगर। डिजिटल सुविधाओं के बढ़ते इस्तेमाल के साथ साइबर ठगी के तरीके भी लगातार बदल रहे हैं। कभी फर्जी बैंक संदेश, कभी नौकरी का लालच तो कभी पुलिस अधिकारी बनकर लोगों को डराने के जरिए साइबर अपराधी लोगों की निजी और बैंकिंग जानकारी हासिल करने की कोशिश करते हैं। इसी खतरे के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से संतकबीरनगर पुलिस ने धनघटा क्षेत्र के आर.पी.एम.एस. इंटर कॉलेज में साइबर जागरूकता एवं सुरक्षा कार्यक्रम आयोजित किया।
पुलिस अधीक्षक संदीप कुमार मीना के निर्देशन, अपर पुलिस अधीक्षक सुशील कुमार सिंह के मार्गदर्शन तथा क्षेत्राधिकारी साइबर क्राइम अमित कुमार के पर्यवेक्षण में साइबर थाना और धनघटा पुलिस की टीम ने छात्रों, अभिभावकों तथा उपस्थित लोगों को ऑनलाइन धोखाधड़ी के विभिन्न तरीकों और उनसे बचाव के उपायों की जानकारी दी।
कार्यक्रम में बताया गया कि साइबर अपराधी अज्ञात कॉल, संदिग्ध लिंक, फर्जी ई-मेल, लॉटरी के प्रलोभन, क्यूआर कोड स्कैन कराने, फर्जी क्रेडिट मैसेज और वर्क फ्रॉम होम के नाम पर लोगों को निशाना बना सकते हैं। इसके अलावा, पुलिस अधिकारी बनकर डराने, सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने का झांसा देने और संदिग्ध एपीके (APK) फाइल डाउनलोड कराने जैसे तरीकों से भी धोखाधड़ी की आशंका रहती है।
पुलिस टीम ने लोगों को आगाह किया कि किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर मोबाइल में कोई फाइल या ऐप इंस्टॉल न करें। बैंक खाते से संबंधित जानकारी, ओटीपी, पासवर्ड और अन्य व्यक्तिगत विवरण किसी के साथ साझा न करें। सोशल मीडिया या मैसेजिंग ऐप पर मिलने वाले संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने से भी बचें। किसी ऑफर या सरकारी लाभ के संदेश पर भरोसा करने से पहले उसकी सत्यता की जांच करना जरूरी है।
साइबर ठगी होने की स्थिति में तत्काल कार्रवाई को महत्वपूर्ण बताते हुए पुलिस ने राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर सूचना देने और आधिकारिक पोर्टल cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराने की जानकारी दी।
इस कार्यक्रम की उपयोगिता इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि डिजिटल सेवाओं का इस्तेमाल अब छात्रों से लेकर बुजुर्गों तक व्यापक स्तर पर हो रहा है। ऐसे में केवल साइबर अपराध के तरीकों की जानकारी देना पर्याप्त नहीं है; लोगों को संदिग्ध संदेशों की पहचान करने, अपनी डिजिटल जानकारी सुरक्षित रखने और ठगी की स्थिति में बिना देरी शिकायत करने के लिए भी जागरूक करना जरूरी है।
साइबर जागरूकता कार्यक्रम तभी प्रभावी साबित होंगे, जब उनमें दी गई जानकारी लोगों की रोजमर्रा की डिजिटल आदतों का हिस्सा बने। खासकर विद्यार्थियों और अभिभावकों को जागरूक करना परिवारों तक साइबर सुरक्षा का संदेश पहुंचाने का प्रभावी माध्यम बन सकता है।
कार्यक्रम में उपनिरीक्षक शत्रुघ्न सिंह, महिला मुख्य आरक्षी अमृता सिंह, कांस्टेबल राजकुमार यादव सहित अन्य पुलिस अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे।
रिपोर्ट: मोहम्मद सईद पठान | मिशन संदेश
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