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ब्रह्मानंद पहलवान हत्याकांड: दो महिला आरोपियों को राहत नहीं, अग्रिम जमानत याचिकाएं खारिज


  • "आंखों में लाल मिर्च पाउडर डालकर हमला करने का आरोप; 11 चोटों का पोस्टमार्टम रिपोर्ट में उल्लेख, चश्मदीद गवाहों और पेन ड्राइव में साक्ष्यों का अभियोजन ने दिया हवाला"

(Report by- Mohammad Sayeed Pathan Editor)

संत कबीर नगर। जिले के चर्चित ब्रह्मानंद यादव हत्याकांड में जिला एवं सत्र न्यायालय ने आरोपी निशा यादव और शीला देवी की अग्रिम जमानत याचिकाएं खारिज कर दी हैं। सत्र न्यायाधीश रणधीर सिंह ने अपराध की प्रकृति, मामले के उपलब्ध तथ्यों और दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करने के बाद यह आदेश पारित किया। अदालत के इस फैसले से फिलहाल दोनों आरोपियों को गिरफ्तारी से पहले जमानत की राहत नहीं मिल सकी है।

मामला 22 सितंबर 2026 को हुई ब्रह्मानंद यादव की हत्या से जुड़ा है। अभियोजन के अनुसार, घटना में पहले उनकी आंखों में लाल मिर्च पाउडर डालकर उन्हें गिराया गया और फिर अन्य आरोपियों ने लाठी-डंडे, गंडासे तथा फरसे से हमला किया। हालांकि, मामले में आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक सुनवाई और साक्ष्यों के परीक्षण के बाद ही होगी।

बाजार जाते समय घात लगाकर हमला करने का आरोप

जिला शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) विशाल श्रीवास्तव के अनुसार, 22 सितंबर 2026 को दोपहर करीब 2:50 बजे ब्रह्मानंद यादव अपनी बुलेट मोटरसाइकिल से गिठिनी बाजार जा रहे थे। आरोप है कि राकेश यादव के घर के पास पहले से मौजूद निशा यादव, पत्नी दुर्गेश, और शीला देवी, पत्नी जनार्दन, ने कथित साजिश के तहत उनकी आंखों में पिसा हुआ लाल मिर्च पाउडर डाल दिया।

अभियोजन का कहना है कि मिर्च पाउडर पड़ने के बाद ब्रह्मानंद यादव मोटरसाइकिल समेत सड़क पर गिर पड़े। इसके बाद अन्य सह-अभियुक्तों ने उन पर लाठी-डंडे, गंडासे और फरसे से हमला कर दिया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए।

घटना की जानकारी मिलने पर परिजन उन्हें पुलिस की आपातकालीन सेवा 112 के वाहन से जिला अस्पताल ले गए, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सिर समेत शरीर के विभिन्न हिस्सों पर कुल 11 चोटों का उल्लेख होने की बात अभियोजन पक्ष ने अदालत के समक्ष रखी।

बचाव पक्ष ने बताया झूठा फंसाने का मामला

मुकदमे में वादी रामाकान्त यादव की तहरीर पर खलीलाबाद थाने में भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी।

अग्रिम जमानत की मांग करते हुए बचाव पक्ष ने दलील दी कि दोनों महिलाओं को पुरानी रंजिश के कारण झूठा फंसाया गया है। उनके घरेलू महिला होने का तर्क भी अदालत के समक्ष रखा गया।

इसके विपरीत, जिला शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) विशाल श्रीवास्तव ने जमानत याचिकाओं का विरोध करते हुए अपराध की गंभीरता पर जोर दिया। अभियोजन पक्ष के अनुसार, मामले में चश्मदीद गवाहों के बयान और केस डायरी में उपलब्ध पेन ड्राइव से संबंधित साक्ष्य आरोपियों की कथित भूमिका की ओर संकेत करते हैं।

अदालत ने क्यों खारिज कीं याचिकाएं?

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने मामले की परिस्थितियों और अपराध की गंभीर प्रकृति को ध्यान में रखते हुए अग्रिम जमानत देने को उचित नहीं माना। इसी आधार पर निशा यादव और शीला देवी की अग्रिम जमानत याचिकाएं निरस्त कर दी गईं।

फैसला जांच और न्यायिक प्रक्रिया के लिहाज से अहम

ब्रह्मानंद यादव हत्याकांड में दो महिला आरोपियों की अग्रिम जमानत याचिकाएं खारिज होना अभियोजन पक्ष के लिए महत्वपूर्ण न्यायिक घटनाक्रम है। इस आदेश से यह स्पष्ट होता है कि अदालत ने इस स्तर पर आरोपियों को गिरफ्तारी से पूर्व संरक्षण देने के पक्ष में निर्णय नहीं लिया। हालांकि, अग्रिम जमानत याचिका खारिज होना अपने आप में दोष सिद्ध होने के बराबर नहीं है। मामले में आरोपों की पुष्टि, साक्ष्यों का मूल्यांकन और दोषसिद्धि का प्रश्न आगे की न्यायिक प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।

मिशन संदेश की नजर: इस मामले में आगे की जांच, उपलब्ध साक्ष्यों की न्यायिक जांच और सभी आरोपियों की भूमिका का निष्पक्ष निर्धारण महत्वपूर्ण रहेगा। पीड़ित पक्ष को न्याय दिलाने के साथ-साथ न्यायिक प्रक्रिया में निष्पक्षता और कानून के अनुरूप कार्रवाई सुनिश्चित करना भी आवश्यक है।

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