गाजियाबाद। उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद से साइबर ठगी का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। साइबर अपराधियों ने 84 वर्षीय सेवानिवृत्त बैंक मैनेजर और उनकी पत्नी को 12 दिनों तक कथित "डिजिटल अरेस्ट" में रखकर डर और दबाव का माहौल बनाया तथा उनसे करीब 2.20 करोड़ रुपये की ठगी कर ली। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
जानकारी के अनुसार, वैशाली थाना क्षेत्र की रामप्रस्थ ग्रीन सोसाइटी निवासी सेवानिवृत्त बैंक मैनेजर राम प्रकाश हरिया (84) को 22 मई को व्हाट्सएप वीडियो कॉल आई। कॉल करने वाले ने खुद को दरियागंज थाने का पुलिस अधिकारी बताते हुए दावा किया कि वर्ष 2023 में हुए एक बड़े बैंक घोटाले में उनके नाम का बैंक खाता इस्तेमाल किया गया है और उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी हो चुका है।
जेल भेजने का डर दिखाकर बनाया शिकार
ठगों ने बुजुर्ग दंपति को धमकाया कि उन्हें "डिजिटल अरेस्ट" किया जा रहा है। इसके बाद परिवार की पूरी जानकारी ली गई और हिदायत दी गई कि इस बारे में किसी रिश्तेदार, विशेषकर नातिन, को कुछ न बताया जाए। ठग रोजाना वीडियो कॉल पर कई घंटे तक पूछताछ करते रहे और गिरफ्तारी तथा कानूनी कार्रवाई का भय दिखाते रहे।
नकली कोर्ट में कराई पेशी
पीड़ित के अनुसार, 22 मई से 4 जून तक रोज चार से आठ घंटे तक वीडियो कॉल के माध्यम से पूछताछ की गई। इस दौरान साइबर ठगों ने कथित ऑनलाइन कोर्ट की कार्यवाही भी दिखाई, जहां एक व्यक्ति ने खुद को जज बताकर कहा कि जांच पूरी होने तक उनकी संपत्ति और बैंक खातों की जांच होगी तथा सभी पैसे सरकारी खाते में जमा कराने होंगे। भरोसा दिलाया गया कि निर्दोष साबित होने पर पूरी रकम लौटा दी जाएगी।
डर के माहौल में बुजुर्ग ने अलग-अलग बैंक खातों में कुल 2.20 करोड़ रुपये ट्रांसफर कर दिए। इनमें से लगभग 70 लाख रुपये उन्होंने गोल्ड लोन और परिचितों से उधार लेकर जुटाए थे।
ठगी का एहसास होने पर दर्ज कराई शिकायत
कुछ दिनों बाद जब ठगों के फोन आने बंद हो गए तो दंपति को अपने साथ हुई ठगी का एहसास हुआ। इसके बाद उन्होंने साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराई।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, शिकायत के आधार पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। जिन बैंक खातों में रकम भेजी गई, उनकी जांच की जा रही है। साइबर क्राइम टीम धनराशि के ट्रांजैक्शन और आरोपियों की पहचान कर पूरे गिरोह तक पहुंचने का प्रयास कर रही है।
पुलिस की अपील
साइबर पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान कॉल, वीडियो कॉल या खुद को पुलिस, सीबीआई, ईडी, कोर्ट अथवा अन्य सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताने वाले व्यक्ति के दबाव में आकर पैसे ट्रांसफर न करें। यदि कोई "डिजिटल अरेस्ट" या गिरफ्तारी की धमकी देता है तो तत्काल 1930 साइबर हेल्पलाइन या निकटतम साइबर थाने से संपर्क करें।

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