दृष्टिबाधित छात्रों की शिक्षा को नई दिशा: सीआरसी गोरखपुर के सीआरई कार्यक्रम का समापन, 30 से अधिक दिव्यांगजनों को मिले स्मार्टफोन और ब्रेल किट
गोरखपुर। समावेशी शिक्षा और दिव्यांगजन सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत सीआरसी गोरखपुर में आयोजित दो दिवसीय ऑफलाइन सतत पुनर्वास शिक्षा (सीआरई) कार्यक्रम का सफलतापूर्वक समापन हो गया। "दृष्टिबाधित छात्रों के लिए गणित एवं विज्ञान शिक्षण की विधि" विषय पर आधारित इस प्रशिक्षण कार्यक्रम ने न केवल पुनर्वास पेशेवरों के ज्ञान और कौशल को समृद्ध किया, बल्कि दृष्टिबाधित बच्चों की शिक्षा को अधिक प्रभावी और सुलभ बनाने की दिशा में भी सार्थक संदेश दिया। कार्यक्रम के समापन अवसर पर 30 से अधिक दृष्टिबाधित दिव्यांगजनों को स्मार्ट मोबाइल फोन और ब्रेल किट वितरित किए गए, जिससे आयोजन का महत्व और बढ़ गया।
देश के विभिन्न राज्यों से आए 43 प्रतिभागियों ने इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में भाग लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य दृष्टिबाधित बच्चों को गणित और विज्ञान जैसे जटिल विषयों को सरल, व्यावहारिक और अनुभवात्मक तरीके से पढ़ाने की आधुनिक तकनीकों से पुनर्वास व्यवसायिकों को परिचित कराना था। प्रशिक्षण सत्रों में विशेषज्ञों ने उन चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा की, जिनका सामना दृष्टिबाधित विद्यार्थी विज्ञान और गणित की पढ़ाई के दौरान करते हैं, साथ ही उनके समाधान के प्रभावी तरीकों को भी साझा किया।
कार्यक्रम में संसाधन व्यक्ति के रूप में राष्ट्रीय दृष्टिबाधित इंटर कॉलेज गोरखपुर के विशेष शिक्षक प्रदीप मिश्रा, सीआरसी गोरखपुर के विशेष शिक्षक अरविंद कुमार पांडे, प्रवक्ता सचिन यादव तथा विशेष शिक्षा विभाग के प्रवक्ता अमित कुमार ने प्रतिभागियों को विषयवस्तु की गहन जानकारी प्रदान की। विशेषज्ञों ने ब्रेल आधारित शिक्षण, स्पर्श आधारित मॉडल, सहायक तकनीकों और नवाचारपूर्ण शिक्षण पद्धतियों के माध्यम से गणित और विज्ञान को दृष्टिबाधित विद्यार्थियों के लिए अधिक सुलभ बनाने के उपायों पर विस्तार से प्रकाश डाला।
समीक्षात्मक दृष्टि से देखा जाए तो आज भी दृष्टिबाधित बच्चों की शिक्षा के क्षेत्र में प्रशिक्षित शिक्षकों और आधुनिक संसाधनों की कमी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। विज्ञान और गणित जैसे विषयों को पढ़ाने के लिए विशेष प्रशिक्षण की आवश्यकता होती है, क्योंकि पारंपरिक शिक्षण पद्धतियां इन विद्यार्थियों की आवश्यकताओं को पूरी तरह पूरा नहीं कर पातीं। ऐसे में सीआरसी गोरखपुर द्वारा आयोजित यह सीआरई कार्यक्रम केवल प्रशिक्षण का माध्यम नहीं, बल्कि समावेशी शिक्षा की अवधारणा को व्यवहारिक रूप देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है।
कार्यक्रम समन्वयक नागेंद्र पांडे के संचालन में संपन्न हुए इस आयोजन ने यह भी स्पष्ट किया कि पुनर्वास पेशेवरों के लिए नियमित प्रशिक्षण कितना आवश्यक है। पुनर्वास व्यवसायिकों को अपने प्रमाण-पत्र के नवीनीकरण हेतु सीआरई कार्यक्रमों में भाग लेना अनिवार्य होता है, जिससे वे नई तकनीकों और शिक्षण पद्धतियों से अद्यतन बने रहते हैं।
समापन अवसर पर आयोजित सहायक उपकरण वितरण कार्यक्रम भावनात्मक रूप से भी अत्यंत प्रेरणादायक रहा। 30 से अधिक दृष्टिबाधित दिव्यांगजनों को स्मार्टफोन और ब्रेल किट प्रदान किए गए, जो उनके दैनिक जीवन, शिक्षा और संचार को अधिक सहज बनाने में सहायक सिद्ध होंगे। सीआरसी गोरखपुर के निदेशक जितेंद्र यादव ने कहा कि दिव्यांगजनों की आवश्यकताओं की पूर्ति संस्थान की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक और सहायक उपकरण दिव्यांगजनों के आत्मविश्वास, आत्मनिर्भरता और सामाजिक सहभागिता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
यह कार्यक्रम इस बात का प्रमाण है कि यदि शिक्षा, तकनीक और संवेदनशीलता का समन्वय हो, तो दृष्टिबाधित बच्चों के लिए भी ज्ञान के द्वार समान रूप से खोले जा सकते हैं। सीआरसी गोरखपुर की यह पहल समावेशी और सशक्त समाज निर्माण की दिशा में एक प्रेरणादायक कदम मानी जा रही है।
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