दिव्यांगजनों की राह हुई आसान: बीआरडी गेट से सीआरसी तक अब ई-कार्ट की सुविधा, अभिभावकों की वर्षों पुरानी मांग पूरी

 
गोरखपुर मिशन संदेश । दिव्यांगजनों की सुविधाओं और उनके सम्मानजनक आवागमन को प्राथमिकता देते हुए सीआरसी गोरखपुर ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। अब पुनर्वास सेवाओं के लिए सीआरसी आने वाले दिव्यांग बच्चों और उनके अभिभावकों को बीआरडी मेडिकल कॉलेज के मुख्य गेट से केंद्र तक पहुंचने के लिए लंबी दूरी पैदल तय नहीं करनी पड़ेगी। आरईसी लिमिटेड (रूरल इलेक्ट्रिफिकेशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड) (Rural Electrification Corporation Limited) के कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर) मद से प्राप्त 16 सीटर ई-कार्ट जल्द ही नियमित संचालन में आ जाएगी, जिससे दिव्यांगजनों की यात्रा कहीं अधिक सुगम और सम्मानजनक बन सकेगी।

सीआरसी गोरखपुर में प्रतिदिन पूर्वांचल सहित पड़ोसी राज्यों से भी बड़ी संख्या में दिव्यांगजन पुनर्वास, चिकित्सा परामर्श, प्रशिक्षण एवं अन्य सेवाओं के लिए पहुंचते हैं। लेकिन बीआरडी गेट से सीआरसी परिसर की लगभग 700 मीटर दूरी लंबे समय से उनके लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई थी। विशेष रूप से शारीरिक, दृष्टि अथवा बहु-दिव्यांगता से ग्रसित बच्चों और उनके अभिभावकों को इस दूरी को तय करने में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था।

स्थिति तब और जटिल हो जाती थी जब बीआरडी प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था के तहत बाहरी वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध होने के कारण अभिभावकों के पास पैदल चलने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता था। गर्मी, बारिश और ठंड जैसे मौसमीय हालात में यह समस्या और अधिक गंभीर रूप ले लेती थी। कई अभिभावकों ने समय-समय पर इस संबंध में अपनी पीड़ा और मांग सीआरसी प्रशासन के समक्ष रखी थी।

सीआरसी गोरखपुर के निदेशक जितेंद्र यादव ने बताया कि दिव्यांगजनों और उनके परिवारों की इस वास्तविक आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए संस्थान ने आरईसी लिमिटेड से सीएसआर सहयोग का अनुरोध किया था। संस्था ने सामाजिक उत्तरदायित्व का परिचय देते हुए सीआरसी को 16 सीटर आधुनिक ई-कार्ट उपलब्ध कराया है। उन्होंने बताया कि ई-कार्ट दो दिन पूर्व ही सीआरसी परिसर पहुंच चुकी है तथा आवश्यक प्रशासनिक और तकनीकी औपचारिकताएं पूरी होते ही सप्ताह के अंत तक इसका नियमित संचालन प्रारंभ कर दिया जाएगा।

देखा जाए तो दिव्यांगजनों के लिए केवल पुनर्वास सेवाएं उपलब्ध कराना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन सेवाओं तक उनकी सहज और सम्मानजनक पहुंच सुनिश्चित करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। अक्सर सरकारी और सामाजिक संस्थाओं में आधारभूत सुविधाओं की कमी के कारण दिव्यांगजन अतिरिक्त कठिनाइयों का सामना करते हैं। ऐसे में सीआरसी गोरखपुर की यह पहल ‘सुगम्यता’ की अवधारणा को व्यवहारिक रूप देने का एक सराहनीय उदाहरण है।

ई-कार्ट के आगमन से दिव्यांग बच्चों और उनके अभिभावकों में उत्साह का माहौल है। कई अभिभावकों ने इसे उनकी वर्षों पुरानी समस्या का समाधान बताया है। यह सुविधा न केवल शारीरिक श्रम को कम करेगी, बल्कि दिव्यांगजनों के आत्मसम्मान और आत्मविश्वास को भी बढ़ाने का कार्य करेगी।

यह पहल दर्शाती है कि जब संस्थागत संवेदनशीलता और सामाजिक सहयोग एक साथ आते हैं, तो दिव्यांगजनों के जीवन में वास्तविक और सकारात्मक परिवर्तन संभव हो पाता है। सीआरसी गोरखपुर का यह कदम दिव्यांग-अनुकूल समाज निर्माण की दिशा में एक प्रेरणादायक उदाहरण बनकर उभरा है।

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