सीआरसी गोरखपुर की पहल: अभिभावकों को दिया गया सीपी बच्चों के घरेलू पुनर्वास का प्रशिक्षण

(Report & Edit By-Mohammad Sayeed)

गोरखपुर। अत्यधिक शारीरिक तनाव (स्पास्टिसिटी) से प्रभावित सेरेब्रल पाल्सी (सीपी) बच्चों के समग्र पुनर्वास और बेहतर जीवन गुणवत्ता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से कंपोजिट रीजनल सेंटर (सीआरसी), गोरखपुर में शुक्रवार को एक विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य ऐसे बच्चों के अभिभावकों को जागरूक करना था, जिनके हाथ-पैरों में अत्यधिक खिंचाव और तनाव के कारण बैठने, खड़े होने, चलने-फिरने तथा दैनिक गतिविधियों में कठिनाइयां उत्पन्न होती हैं।

कार्यक्रम के दौरान सीआरसी गोरखपुर के फिजियोथैरेपी विभाग के प्रवक्ता डॉ. विजय गुप्ता ने व्यावहारिक प्रदर्शन के माध्यम से बताया कि स्पास्टिसिटी से प्रभावित बच्चों के उपचार में नियमित फिजियोथैरेपी अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उन्होंने बच्चों को विभिन्न व्यायाम कराकर दिखाए और कहा कि केंद्र पर मिलने वाली फिजियोथैरेपी सेवाएं बच्चों के लिए लाभकारी हैं, लेकिन वास्तविक और स्थायी सुधार तभी संभव है जब अभिभावक घर पर भी नियमित रूप से इन अभ्यासों को जारी रखें।

डॉ. गुप्ता ने कहा कि केवल केंद्र आधारित उपचार पर निर्भर रहने से सुधार की गति सीमित हो सकती है, जबकि घर और केंद्र दोनों स्तरों पर समन्वित प्रयास बच्चों की कार्यक्षमता में उल्लेखनीय परिवर्तन ला सकते हैं। उन्होंने अभिभावकों को बच्चों की शारीरिक आवश्यकताओं को समझने और पुनर्वास प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी निभाने की सलाह दी।

कार्यशाला को संबोधित करते हुए सीआरसी गोरखपुर के निदेशक जितेंद्र यादव ने कहा कि संस्थान दिव्यांगजनों को गुणवत्तापूर्ण एवं विशेषज्ञ सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि पुनर्वास केवल चिकित्सकीय प्रक्रिया नहीं, बल्कि परिवार, विशेषज्ञों और समाज के सामूहिक सहयोग से जुड़ा एक सतत अभियान है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि बच्चे का घर पर नियमित प्रबंधन नहीं होगा तो पूर्ण सुधार की संभावना सीमित रह जाती है। इसी सोच के तहत सीआरसी समय-समय पर अभिभावक प्रशिक्षण और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करता रहता है।

कार्यक्रम में नैदानिक मनोविज्ञान विभाग के सहायक प्राध्यापक राजेश कुमार ने भी अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि शारीरिक चुनौतियों के साथ-साथ मानसिक और भावनात्मक सहयोग भी बच्चों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। अभिभावकों को बच्चों के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाना चाहिए, जिससे उनमें आत्मविश्वास और सामाजिक सहभागिता बढ़ सके।

कार्यक्रम का संचालन कार्यक्रम समन्वयक मंजेश कुमार ने किया। कार्यशाला में बड़ी संख्या में दिव्यांगजन, उनके अभिभावक, सीआरसी के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। प्रतिभागियों ने विशेषज्ञों से सीधे संवाद कर अपनी समस्याओं और जिज्ञासाओं का समाधान भी प्राप्त किया।

इसी क्रम में सीआरसी गोरखपुर परिसर में भारत सरकार की स्वच्छता संबंधी पहल के अनुरूप विशेष सफाई अभियान भी चलाया गया। संस्थान के अधिकारियों और कर्मचारियों ने परिसर की साफ-सफाई में सक्रिय भागीदारी निभाई। कार्यक्रम का समन्वय नागेंद्र पांडेय एवं राजकिशोर शुक्ला ने किया।

यह उल्लेखनीय है कि सीआरसी गोरखपुर में इस प्रकार के पुनर्वास, जागरूकता और स्वच्छता संबंधी कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित किए जाते हैं। यह पहल न केवल दिव्यांग बच्चों के बेहतर भविष्य की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि अभिभावकों को पुनर्वास प्रक्रिया का सक्रिय साझेदार बनाकर समाज में समावेशी विकास की अवधारणा को भी मजबूत करती है।

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